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क्या वतन पर मिटने वालों का यही बाकी निशां होगा?

Kanpur Updated Wed, 15 Aug 2012 12:00 PM IST
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...शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले, वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशां होगा।
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हितैषी जी द्वारा लिखा यह गीत उन दिनों हर क्रांतिकारी के मन में नया जोश भर देता था। उन्हें लगता था कि उनका बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा, एक दिन देश स्वतंत्र होगा और आजाद हिन्दुस्तान में सांस लेने वाली पीढ़ी उनके बलिदान को याद रखेगी। लेकिन 15 अगस्त के मौके पर अमर उजाला ने जब स्वतंत्रता आंदोलन की ऐतिहासिक घटनाओं के गवाह रहे स्थलों का निरीक्षण किया तो कुछ और ही हकीकत सामने आई।
मेमोरियल वेल
15 जुलाई, 1857 को इस कुएं में अंग्रेजों के लगभग 200 परिजनों को काट कर फेंका गया था। स्मारक पुरातत्व स्थल व अवशेष अधिनियम 1958 (24) के तहत संरक्षित किया गया। संरक्षण के बाद इस कुएं को ढक कर चबूतरा बना दिया गया। बच्चे अब इसके ऊपर स्केटिंग व साइकिलिंग करते हैं। चबूतरा जगह-जगह टूटा है। वेल के सामने लगी तात्या टोपे की प्रतिमा का चौबारा भी टूट रहा है।
नानाराव पार्क बीबीघर
इस पार्क में अंग्रेजों के समय में एक मंजिली इमारत हुआ करती थी। बताते हैं कि 1857 में 27 जून से लेकर 15 जुलाई तक नानाराव पेशवा ने लगभग दो सौ अंग्रेज महिलाओं और बच्चों को यहां बंदी बनाकर रखा था। बीबीघर एक अंग्रेज अफसर द्वारा अपनी रखैलों को ठहराने के लिए बनवाया गया था। प्रशासन इसे तरणताल के आसपास का स्थान बताता है। पर जानकार बताते हैं कि स्वीमिंग पूल के नीचे आज भी बीबीघर का इतिहास दफन है।

बूढ़ा बरगद
1857 में इस बरगद पर अंग्रेजों ने एकसाथ 133 क्रांतिकारियों को सूली पर चढ़ा दिया था। खोखला हो चुका ये बरगद चार साल पहले गिर चुका है। इसकी शाखाएं सूखी लकड़ी में तब्दील हो चुकी हैं। बस्ती के कई लोग इस पर कपड़े सुखाते हैं, बच्चे डालों पर लुका-छिपी खेलते हैं। प्रशासन की ओर से इसके रखरखाव की कोई भी व्यवस्था नहीं हैं।

बिठूर
आजादी और ऐतिहासिक दृष्टि से मशहूर बिठूर का हाल बदतर है। रानी लक्ष्मी बाई का किला, पेशवा नाना साहब की इमारत खंडहर हो चुकी है। इससे जुड़े पास के ब्रह्मावर्त घाट, पत्थर घाट और ध्रुव का इतिहास भी गर्त में हैं।


फूलबाग-क्वीन्स पार्क
.आजादी से पहले इसे क्वीन्स पार्क के नाम से जाना जाता था। इसे 1890 में बनाया गया था। आजादी के बाद इस बिल्डिंग पर झंड़ा फहराया जाता था। बड़ी सभाएं होती थीं। सन् 2000 के दशक में यहां म्यूजियम बना कर गदर की कहानी बयां करती कई ऐतिहासिक चीजें रखी गई थीं। जिसे बंद कर दिया गया। पार्क में आज आवारा जानवरों और गंदगी का साम्राज्य है।

फूलबाग में गणेश शंकर विद्यार्थी के स्मारक का प्लास्टर उखड़ रहा है। नई सड़क पर जहाँ विद्यार्थी जी को गोली मारी गयी थी, वहाँ आज तक कोई स्मारक नहीं बन सका है।

राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की प्रतिमाओं का हाल भी अच्छा नहीं है। महात्मा गांधी इंटर कालेज में लगी गांधी जी प्रतिमा में कई दरारें हैं, 50 साल हो गये पर प्रतिमा में आज तक एक छत्र तक नहीं लग सका।

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