महिला ने थाने में दिखाई ‘दबंगई’

Kanpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। जीटी रोड जच्चा-बच्चा अस्पताल के सामने शनिवार रात पुलिस पर हमला करने के आरोप में पकड़ी गई शालिनी स्वरूपनगर थाने में भी दबंगई दिखाने से बाज नहीं आई। थानाप्रभारी से सिपाही तक को धमकी दी। बाद में सिपाही की तहरीर को आधार बनाकर पुलिस ने शालिनी, उसके पति, तीन बेटे एवं दामाद के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की है। इन पर बलवा, पुलिस पर फायरिंग, आरोपी छुड़ाने, जानमाल की धमकी देने की धाराएं लगाई गई हैं। रविवार दोपहर मेडिकल के बाद महिला को जेल भेज दिया गया।
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शनिवार रात साइकिल सवार से लूट की सूचना पर पहुंची स्वरूपनगर पुलिस पर हमला हुआ था। आरोपी की मां शालिनी थाने लाई गई। इंस्पेक्टर के पूछताछ करने पर वह भड़क गई। बोली- पहले वाले अफसर से मेरे बारे में पूछ लेना। छूट कर आने दो, एक-एक को सबक सिखाऊंगी। मुझे और परिवार को साजिशन फंसाया जा रहा है। उधर थानाप्रभारी विवेक सिंह ने बताया कि शालिनी हर सवाल का उल्टा जवाब दे रही थी। इससे मेडिकल कराकर उसे जेल पहुंचा दिया गया। सिपाही हरे कृष्ण ने रिपोर्ट लिखाई है। उसके मुताबिक वह और सिपाही कपिलदेव गश्त पर थे। जच्चा-बच्चा के सामने साइकिल वाले का पर्स लूटकर एक शख्स भागता दिखा। दौड़ाने पर वह करीब ही शालिनी की झोपड़ी में घुस गया। पुलिस ने पकड़ा तो झोपड़ी में मौजूद लोगों ने हमला बोला और लुटेरे को छुड़ा लिया। दोनों सिपाही घायल हुए। थानाप्रभारी ने बताया कि शालिनी, उसके पति हरिश्चंद्र, बेटों भदौआ, चंदन एवं धर्मेद्र और दामाद अमर को नामजद किया गया है। भदौआ को भी पकड़ लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है। थानाप्रभारी ने बताया शालिनी अपराधी प्रवृत्ति की है। पहले भी पुलिस से मुजाहमत, अवैध शराब में जेल जा चुकी है। चंदन काकादेव से लूट में बंद हुआ था। कुछ ही दिन बाहर आया है। धर्मेंद्र और भदौआ इलाहाबाद के चौक थाने से लूट में जेल जा चुके हैं। पति और दामाद की भी छवि अच्छी नहीं है। वह अपराधों में लिप्त बेटों को प्रश्रय देती है।
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क्षेत्र में वारदात करता चंदन
रावतपुर से कोकाकोला चौराहे तक चंदन का जलवा है। बकौल पुलिस यह इन्हीं क्षेत्र में लूट करता और किसी ने किसी झोपड़ी में घुस जाता है। कोई शिकायत करने सामने नहीं आता, इस वजह से कार्रवाई नहीं होती। यह स्कूली लड़कों की तरह बैग लेकर रावतपुर चौराहे पर खड़ा होता है। टेंपो में भीड़ देख साथ बैठता है। फिर नाखूनों में फंसे ब्लेड के सहारे माल पार कर झोपड़पट्टी के पास उतर जाता है। हालात यह है कि यदि किसी टेंपो वाले ने सवारियों से कहा कि अपनी जेब-पर्स संभाल कर रखना तो उसकी पिटाई आम बात है।
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