अब तिमंजिले मकान पर चढ़ गया सांड़

Kanpur Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। बिरहाना रोड पर एक सांड़ सीढ़ियों के सहारे एक मकान की तीसरी मंजिल पहुंच गया। सींग से घर के दरवाजे को तोड़ने का प्रयास किया तो परिवार के लोगों की नींद खुली। चोरों के खौफ से पूरा परिवार दहशत में आ गया। हिम्मत करके दरवाजे पर पहुंचे तो सांड़ देखकर पूरा परिवार घबरा गया। मदद की गुहार पर पहुंचे मोहल्ले के लोग पहुंचे पर बेबस तमाशा देखते रहे। दहशतजदा परिवार रात भर जागता रहा। सुबह दमकल की टीम पहुंची। उसे तीसरी मंजिल से नीचे उतारने में एक फायर अफसर और दो जवान घायल हो गए। थोड़ी देर बाद सांड़ फिर वहां पहुंच गया। इससे अफरा-तफरी मच गई। बाद में नगर निगम कैटिल कैचिंग दस्ते ने सांड़ को पकड़ा। यह घटनाक्रम शनिवार रात साढ़े बारह बजे शुरू हुआ और सुबह साढ़े आठ बजे खत्म हुआ।
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शेयर कारोबारी आशीष कनौडिया का बिरहाना रोड में तीन मंजिला मकान है। वह तीसरी मंजिल में मां सुधा, पिता कैलाश कनौडिया, पत्नी प्रीति और तीन साल की बेटी दिवांशी के साथ रहते है। आशीष ने बताया कि रात साढ़े बारह बजे अचानक दरवाजे पर किसी के दस्तक देने की आवाज सुनाई दी। चोर होने की आशंका पर तेजी से आशीष ने आवाज लगाई लेकिन खटपट बंद नहीं हुई। इस पर उन्होंने दरवाजे पर बनी खिड़की खोलकर देखा, दरवाजे पर सांड़ खड़ा था। उन्होंने दरवाजा खोला और सांड़ को भगाने की कोशिश की, तो वह भीतर घुसने लगा। इस पर उन्होंने फौरन दरवाजा बंद कर लिया और लोगों को मोबाइल कर इसकी सूचना दी। थोड़ी ही देर बाद तमाम लोग उनके घर पहुंच गए और सांड़ को भगाने की कोशिश की, पर वह टस से मस नहीं हुआ। सुबह छह बजे उन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को पूरा वाकया बताया। तब करीब आधा घंटे बाद लाटूश रोड स्टेशन प्रभारी कृष्ण बिहारी गुप्ता दो दमकलों और मातहतों के साथ वहां पहुंचे। फायर कर्मियों रस्से का फंदा सांड़ के गले में डालकर उसे खींचने का काम शुरू किया। बड़ी मशक्कत के बाद दमकलकर्मी सांड़ को आठ बजे नीचे उतार सके। इस दौरान एफएसओ कृष्ण विहारी, अवधेश सिंह और रूप सिंह घायल हो गए। आपदा प्रबंधन के मुख्य प्रशिक्षक लखन शुक्ला, शिव मंगल, रोहित, और श्याम सुंदर ने भी फायर कर्मियों का सहयोग किया। टीम ने कैनाल पटरी के पास जाकर सांड़ छोड़ दिया। थोड़ी देर में वह फिर मोहल्ले में पहुंच गया। किसी ने नगर निगम कंट्रोल रूम को सूचना दी तो वहां से कैटिल कैचिंग दस्ता वहां पहुंचा और सांड़ को पकड़ कर ले गया। तक जाकर लोगों ने राहत की सांस ली।
दो टीमाें के साथ मौके पर गया था। बामुश्किल सांड़ को उतारा जा सका। इसके लिए करीब डेढ़ घंटे तक जवानों को सांड़ से जूझना पड़ा। कृष्ण बिहारी गुप्ता, एफएसओ।
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नयागंज, हालसी रोड, कलक्टरगंज, बिरहाना रोड, पी रोड समेत कई बाजारों और घनी आबादी वाले इलाकों में आवारा जानवरों को पकड़ने चल रहा है। डॉ. यूपी अग्रवाल, प्रभारी, कैटिल कैचिंग विभाग, नगर निगम
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आवारा जानवरों का निशाना बने-
1. 2011 में नौबस्ता में सांड़ ने बुजुर्ग को पटका, मौत।
2. दबौली में बाजार में दौड़ाकर बुजुर्ग महिला को सींग मारी। इलाज के दौरान मौत।
3. गुमटी में सांड़ के हमले से इंजीनियर की मौत।
4. मई 2012 में कैनाल पटरी सब्जी मंडी में गाय की सींग से महिला जख्मी।
5. परमट में बुजुर्ग को पटका, मौत।
6. ग्वालटोली में रिटायर्ड शिक्षक को सींग मारकर जख्मी किया। इलाज के दौरान मौत।
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कैटिल कैचिंग दस्ता:
नगर निगम के पास - 3 ट्रक, 2 चालू, 1 खराब
कर्मचारी- 7 स्थाई, 30 संविदा कर्मचारी
कांजी हाउस- एक (दर्शनपुरवा में), क्षमता-50-60 जानवर अधिकतम
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शहर में आवारा जानवर- 3.5 लाख (लगभग)
आवारा कुत्ते- 1.5 लाख
गाय, सांड़, घोड़े, गधे आदि- 1.5 लाख
सुअर- 50 हजार
बंदरों की कोई संख्या नहीं
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संसाधनों की है कमी
-नगर निगम में निलंबित पशुचिकित्साधिकारी की कई महीनों से बहाली नहीं हुई। पद खाली है।
शहर में खाली पार्कों में कांजी हाउस बनाने का प्रस्ताव ठंडे बस्ते में।
-कैटिल कैचिंग दस्ता दुधारू गायें ज्यादातर पकड़ता। सांड़ या जानवर कभी-कभार पकड़ते हैं।
-कैटिल कैंचिग विभाग में स्टाफ और संसाधनों की कमी है।
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