नोट थमाते जाओ, माल चढ़ाते जाओ

Kanpur Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
कानपुर। सेंट्रल की तरह अनवरगंज स्टेशन पर भी रेलवे पुलिस की मनमानी और सुरक्षा इंतजामों की ऐसी-तैसी जारी है। यात्री सुविधाओं का हाल बदहाल है। सोमवार शाम संवाददाता ने यहां का हाल-चाल लिया तो अराजकता साफ दिखी। कालिंदी एक्सप्रेस का एस्कार्ट करने वाले सिपाही सुरक्षा से अधिक माल के पैकेटों पर निगाह रखे थे। रिक्शे या आटो से पैकेट उतरते ही सिपाही पैसा ले रहे थे और बिना बुकिंग के माल कोचो में चढ़ रहा था। नोपार्किंग के साथ ही मेन गेट के मुहाने तक आटो, दोपहिया के अलावा रिक्शेवाले जमे थे। जनरल टिकट काउंटरों पर धक्कामुक्की हो रही थी। इंक्वायरी काउंटर न होने से यात्री इधर-उधर भटक रहे थे।

सीन1
शाम 4:45 बजे अनवरगंज स्टेशन पर तीन रिक्शों से माल उतरा। बिना नेमप्लेट लगाए जीआरपी सिपाही आगे बढ़ा। रिक्शे के साथ आए युवक के बगल में जाकर बुदबुदाया। युवक ने जेब से निकाल कर कुछ नोट सिपाही को पकड़ाए और छह पैकेट लेकर अंदर चला गया। इसी तरह आधे घंटे के भीतर 44 पैकेट माल आया और बिना बुकिंग के ट्रेन में चढ़ा दिया गया। हर पैकेट के हिसाब से जीआरपी के दो सिपाहियों ने पैसा लिया।

सीन- 2
अनवरगंज स्टेशन के हाल और बाहरी ओर जनरल काउंटरों पर लंबी लाइन लगी थी। आवाजें आ रही थीं कि जल्दी करो वरना ट्रेन छूट जाएगी। महिलाएं भी कोने में खडे़ होकर टिकट ले रही थीं। शाम 4 से 7:00 बजे के बीच छह ट्रेनें कानपुर सेंट्रल या फर्रुखाबाद की ओर आती-जाती हैं। इस कारण यहां भारी भीड़ होती है। सिर्फ दो टिकट काउंटर होने से यात्रियों को समय से टिकट तक नहीं मिलता। मजबूरी में बगैर टिकट सफर करते हैं। या फिर सिपाहियों से सेटिंग करके कोच में बैठते हैं।

सीन-3
मेन गेट पर बाएं ओर वाहन न खडे़ करने का बोर्ड टंगा है पर बोर्ड के नीचे से लेकर दूसरी साइड तक दोपहिया, चौपहिया, आटो और रिक्शेवालों का इस कदर जमावड़ा लगा है कि यात्रियों को आने-जाने में दिक्कतें हो रही हैं।

सीन-4
स्टेशन के भीतर घुसते ही प्लेटफार्म नंबर एक के दायीं तरफ बने टायलेट से बदबू आ रही थी। प्लेटफार्म ऊंचा था पर एएसएम से लेकर स्टेशन अधीक्षक कक्ष कोई चार फुट नीचे है। इंक्वायरी के नाम पर कोई भी खिड़की या काउंटर नहीं। यात्री या तो आरक्षण खिड़की में या फिर एएसएम दफ्तर जाकर ट्रेनों की जानकारी कर रहे थे। जानकारी बाबू के मूड पर निर्भर थी। कन्नौज निवासी महिला ने टिकट काउंटर पर बाबू से कालिंदी का टाइम पूछा तो बाबू ने जवाब दिया कि टिकट बांटे कि ट्रेन बताएं।


दो टूक एसपी रेलवे आगरा प्रतिभा अंबेडकर
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- कालिंदी के एस्कार्ट सिपाही यात्रियों से पैसा लेकर माल को आरक्षित कोचों में लोड कराते हैं।
-ऐसी बातें क्यों करते हैं। क्या सिपाही सुरक्षा के बजाय यात्रियों से पैसा लेकर माल को लदवाते हैं? ऐसा नहीं होगा।

-सिपाही बाकायदा गेट पर खड़े होकर पैसा ले रहे थे। ये सीन कैमरे में कैद है।
ऐसी जानकारी नहीं थी। रही बात वसूली की तो सच होगी। इसकी जांच करा कार्रवाई कराएंगे।

-सिपाही यात्रियों को स्लीपर कोचों में सीटें भी पैसा लेकर दे रहे हैं।
रेलवे अफसरों को सूचना देकर चेकिंग करवाएंगे। कोई सिपाही पकड़ा जाता है तो कार्रवाई तय।


(वसूली की कहानी यात्रियों की जुबानी फोटो भी)


20 रुपए जीआरपी एस्कार्ट के सिपाहियों को देकर रास्ते भर की झंझट से मुक्ति पाते हैं। न देते तो रास्ते में कागज के नाम पर धमकाते और उतार भी देते।
दिलीप,जनरल मर्चेंट कारोबारी कन्नौज


हर कोई सेट है। रेलवे अफसरों से कहो या पुलिस अफसरों से, कोई नहीं सुनता। अभी देखा कि टीटीई गेट छोड़कर बाहर आया और 20 रुपए लेकर चला गया। व्यापार करते हैं। विरोध करेेंगे तो धंधा भी नहीं कर पाएंगे।
राकेश, कारोबारी छिबरामऊ

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