अफसर मेहरबान तो कोचिंग संचालक पहलवान

Kanpur Updated Thu, 26 Jul 2012 12:00 PM IST
कानपुर। कभी सीधे-सादे टीचर थे। कानपुर में पनपे कोचिंग उद्योग ने उन्हें उद्योगपति बना दिया। अब उद्योगपति तो अपने फायदे के हिसाब से ही काम करेगा। शहर में चल रही कोंचिगों के ज्यादातर संचालकों की यही कहानी है। फिर शुरू होता है फायदे के लिए हर वैध-अवैध गठजोड़। देखिए और खुद महसूस कीजिए । क्या कोई लोकसेवक बिना किसी फायदे के अपने कर्तव्य से विमुख हो सकता है ? यकीनन नही। कोचिंग केंद्रों और उनसे जुड़े हॉस्टल्स पर गृहकर बकाया है। फुटपाथों पर अवैध साइकिल दादा टाइप लोगों के भरोसे चल रही है। अवैध होर्डिग्सि़ से शहर पटा है। इन मामलों में निगम अधिकारियों ने खामोशी ओढ़ रखी है, क्यों ?
किसी कोचिंग में आग लगे या कोई हादसा हो जाए तो उससे निपटने के क्या इंतजामात है, कोई अधिकारी कोचिंग संचालकों से क्यों सवाल नहीं करता? पहले छापा मारा तो कोचिंग और हॉस्टल्स में बिजली चोरी पकड़ी गई। अब ऐसा क्या हो गया जो केस्को, कोचिंगों में बिजली चोरी की पड़ताल के बारे में सोचता तक नहीं? और काकादेव पुलिस के क्या कहने, रिकॉर्ड तो यही कहता है कि पूरे इलाके में रामराज्य है। अमर उजाला के फोन घनघना रहे हैं, कोचिंग संचालकों के खिलाफ शिकायतों का अंबार लग रहा है। पुलिस से क्यों नहीं कहते, अभिभावक और पीडि़त छात्रों का जवाब होता है- उन्हीं का तो संरक्षण है, वरना खुलेआम शोषण करने की किसी की हिम्मत होती क्या? पीडि़तों को मीडिया से भी कम शिकायत नहीं है। अमर उजाला इस पूरे गठजोड़ को आइना दिखाने की कोशिश कर रहा है। शायद अफसरों का जमीर जागे और यह गठजोड़ टूटे।

यह संरक्षण नहीं तो और क्या है?
बकाया वसूली पर जोर नहीं
काकादेव में चलने वाली कोचिंग मंडी वार्ड 14 अंबेडकर नगर में आता है। नगर निगम जोन 6 के दफ्तर से मिली जानकारी के मुताबिक कोचिंग केंद्रों और हास्टलों पर वर्ष 2012-13 का 10465398 गृह कर बना है। इन पर करीब 1.55 करोड़ रुपए पहले का बकाया चल रहा है। हालांकि नगर निगम गृह कर तो इनसे व्यावसायिक श्रेणी का ही लेता है पर बकाया वसूली पर कोई ध्यान नहीं ।
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अवैध स्टैंड- मनमाने होर्डिग्सि़
ज्यादातर चर्चित कोचिंग केंद्रों के बाहर चल रहे अवैध साइकिल स्टैंड नगर निगम को नजर नहीं आते हैं। कोचिंग संचालक क्षेत्र के दादा टाइप लोगों को स्टैंड लगाने की छूट देकर अपने छोटे-मोटे विवाद निपटाते रहते हैं। अभिभावकों से पढ़ाई के अलावा इसका शुल्क भी वसूला जाता है। डेढ़ माह पहले नगर निगम अफसरों ने विवाद होने पर एक स्टैंड हटवाया था। कुछ कोचिंग केंद्रों के बाहर फुटपाथ पर जनरेटर रखे जाते हैं। इनसे यूजर चार्ज नहीं वसूला जाता है। एक-दो होर्डिग्सि़ का पैसा देकर मनमाने ढंग से होर्डिग्सि़ लगाए जाते हैं पर नगर निगम को इसकी अनदेखी करता है।
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अफसर बोले-
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बकाया गृहकर वसूलने के लिए सख्ती की जाएगी। अवैध पार्किगिं पर वसूली करने वालों के खिलाफ जल्द अभियान चलाया जाएगा। होर्डिग्सि़ हटवाने के लिए दो-चार दिन में दस्ता भेंजेगें।
-उमाकांत त्रिपाठी, अपर नगर आयुक्त प्रथम
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कई बार पकड़ी बत्ती चोरी अभी भी चालू
कई कोचिंग केंद्रों और हास्टलों में केस्को ने पिछले साल बिजली चोरी पकड़ी थी। केस्को को चूना लगाने का यह धंधा अभी भी उसी तरह चल रहा है। केस्को को कोचिंग मंडी से करीब 20 लाख रुपए हर माह मिलता है। ज्यादातर के कनेक्शन 5 किलो वाट से ऊपर के हैं। लाखों रुपए कमाने वाले कुछ कोचिंग संचालक तो समय से बिजली बिल जमा ही नहीं करते हैं। पिछले माह भी बकाया जमा न होने पर इनकी बिजली काटी और जोड़ी गई। कनेक्शन कम लोड का और बिजली खपत ज्यादा होती है। केस्को के कुछ अभियंता मिलीभगत कर इन्हें लाभ पहुंचाते हैं।
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अफसर बोले-
बकाया जमा न करने पर हर माह 8-10 कोचिंग संचालकों की बिजली काटी जाती है। खपत से कम किलो वाट के कनेक्शन की शिकायतें मिली हैं। इसकी जांच कराई जाएगी।
-वाईपी सिंह, अधिशाषी अभियंता सर्वोदय नगर
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आग लगे उनकी बला से
कोचिंग केंद्रों में दुर्घटना या आग से बचाव के कोई बंदोबस्त नहीं है। कई कोचिंग केंद्रों में तो हाल में एक ही दरवाजा है। ऐसे में कोई दुर्घटना होने पर छात्र-छात्राओं का सुरक्षित निकलना मुश्किल हो जाएगा। आग से बचाव के भी कोई बंदोबस्त नहीं है। एक क्लास में 400 से लेकर 1000 तक बच्चे बिठाने वाले कोचिंग संचालकों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है। कुछ कोचिंग संचालक ही अग्निशमन यंत्र लगाए हैं। बाकी के यहां यह भी नहीं लगे हैं। अग्नि शमन विभाग या प्रशासनिक अफसरों ने इस ओर कोई ध्यान नहीं दिया है।
अफसर बोले-
रिहायशी भवनों में कोचिंग चल रही है। इसलिए किसी ने अनापत्ति प्रमाणपत्र लिया ही नहीं होगा। हो सकता है कि पंजीकरण के समय अनापत्ति प्रमाणपत्र मांगा जाता हो। इसकी जानकारी नहीं है। उच्च शिक्षा अधिकारी को इस बारे में पत्र लिखा जाएगा। सभी कोचिंग संचालकों को सुरक्षा के बंदोबस्त करने की नोटिस दी जाएगी।
-हरवीर सिंह मलिक, मुख्य अग्निशमन अधिकारी
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काकदेव पुलिस की चाल, पीडि़तों से ही सवाल
कोचिंग संचालकों के प्रभाव में काकादेव थाने की पुलिस अभिभावकों की शिकायतों पर ध्यान नहीं देती है। शिकायती अर्जी लेकर जाने पर उन्हीं से उल्टे-सीधे सवाल किए जाते हैं। यही कारण है कि अभिभावकों ने शिकायतें लेकर थाने जाना छोड़ दिया है। कोचिंग संचालकों के छोटे-मोटे झगड़े फसाद पुलिस पंचायत कर निपटाती है। ऐसा काकादेव पुलिस क्यों करती है,सब समझते हैं।

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