सिंगल एंट्रेंस टेस्ट के लिए राजी आईआईटी

Kanpur Updated Thu, 28 Jun 2012 12:00 PM IST
कानपुर/नई दिल्ली। ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जैम (जेईई) 2013 में बदलाव के खिलाफ उठे विरोध के सुरों के बीच मानव संसाधन विकास मंत्रालय और आईआईटी काउंसिल ने बीच का रास्ता निकाल लिया है। इसके तहत आईआईटी, एनआईईटी और एआईईईई का सिंगल एंट्रेंस कराया जाएगा। इसमें हर बोर्ड (सीबीएसई, आईसीएसई, समस्त स्टेट बोर्ड) के टॉप-20 फीसदी छात्र-छात्राओं को शामिल होने का मौका मिलेगा। सिंगल एंट्रेंस में सफल होने वाले 1.50 लाख अभ्यर्थियों को आईआईटी की देखरेख में होने वाले एडवांस ज्वाइंट एंट्रेंस एग्जाम (एजेईई) में बैठने को मिलेगा। इसमें सफल होने वाले टॉप के 10 हजार अभ्यर्थियों को आईआईटी के बीटेक पाठ्यक्रम में दाखिला दिया जाएगा। इससे ज्यादा रैंक के अभ्यर्थी आईएसएमयू धनबाद, आईटी बीएचयू, राजीव गांधी पेट्रोलियम इंस्टीट्यूट रायबरेली, एनआईटी, ट्रिपल आईटी सहित अन्य संबद्ध तकनीकी संस्थानों में दाखिला ले सकेंगे। काउंसिल के नए फार्मूले से सभी आईआईटी की एकेडमिक सीनेट भी सहमत हैं। उम्मीद है कि काउंसिल के फार्मूले को आगामी सत्र से लागू करने की मंजूरी एकेडमिक सीनेट से भी मिल जाएगी।
जेईई में प्रस्तावित बदलाव से उठे विवाद को बुधवार को नई दिल्ली में हुई आईआईटी काउंसिल की बैठक में खत्म करने की कोशिश की गई है। मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल की गैरमौजूदगी में काउंसिल ने जेईई में बदलाव का लगभग वही प्रारूप तय किया है, जिसे आईआईटी कानपुर की एकेडमिक सीनेट पास कर चुकी है। सीनेट के सदस्य प्रोफेसर दीपक गुप्ता, प्रोफेसर वाईएन सिंह और प्रोफेसर नीरज मिश्रा ने बताया कि इंटरमीडिएट के अंकों को अब जेईई में चयन का आधार नहीं बनाया जाएगा। काउंसिल ने जो फार्मूला तय किया है, उसके मुताबिक हर बोर्ड के टॉप-20 फीसदी अभ्यर्थी सिंगल एंट्रेंस, एजेईई में शामिल होंगे। इससे स्क्रीनिंग की प्रक्रिया और आसान हो जाएगी। प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अर्हता भी बदलेगी। सीबीएसई, आईसीएसई, स्टेट बोर्ड से 65-78 फीसदी अंक पाने वाले अभ्यर्थी ही नए फार्मूले में फिट बैठ सकेंगे। अभी तक आईआईटी की प्रवेश परीक्षा में शामिल होने की अर्हता 60 फीसदी है। उन्होंने बताया कि सिंगल एंट्रेंस, एजेईई में सफल होने वाले सभी अभ्यर्थियों की आनलाइन काउंसिलिंग एकसाथ होगी। यही नहीं आईआईटी की प्रवेश परीक्षा 2014-15 में बदलाव के लिए एक फोरम बनाने का फैसला हुआ है। इसमें सभी आईआईटी के एकेडमिक सीनेट के सदस्यों को जगह दी जाएगी, जो कि बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।




अब टॉपरों को महत्व
अब जेईई में किसी छात्र के बारहवीं के अंकों का महत्व अलग तरह से होगा। यदि छात्र अपने बोर्ड के शीर्ष 20 फीसदी टॉपरों में शामिल है, तभी वह आईआईटी में दाखिला पा सकेगा। यानी हर बोर्ड के 20 फीसदी टॉपर छात्र आईआईटी में दाखिला पाने के दावेदार होंगे।

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