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झोले में लइया और जेब में रुपैया तो ठीक

Kanpur Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। जेल में कदम-कदम पर पैसे का खेल चलता है। पैसा है तो मजा वर्ना तरह-तरह की सजा। कैदी तो कैदी उनसे मिलने आने वाले परिजन और दोस्त-रिश्तेदार भी जेल के जंगलराज से त्रस्त हैं। कैदियों से एक बार मिलाई करने के बदले जेल स्टाफ 250- 350 रुपए तक वसूलता है। मिलाई करके जब कैदी बैरिकों में लौटते हैं तो स्टाफ को पैसा देना होता है वर्ना पिटाई और उत्पीड़न शुरू हो जाता है। और तो और कमजोर कैदियों से पक्के और स्टाफ वाले परिजनों द्वारा दी गई रकम भी छीन लेते हैं। इसी वजह से कैदी परिजनों से छोटे नोट (10-10 के) मंगाते हैं जिन्हें कई जगह बांटकर छिपाना आसान होता है। मिलाई के समय कैदियों को दिए जाने वाले सामान में लोग अधिकतर लइया जरूर रखते हैं क्योंकि इस पर ज्यादा छानबीन नहीं होती। फिर भले ही लइया की पालीथिन के नीचे टमाटर, प्याज हो, तो चलता है। रविवार को जेल के बाहर ‘अमर उजाला’ ने पड़ताल की। मिलाई करके लौटे परिजनों की दास्तान सुनीं। रविवार का दिन होने के कारण दो पालियों में कुल 178 बंदियों की मिलाई हुई।
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(सुबह 10.20 बजे)

नोट थमाओ, झोला अंदर ले जाओ
जिला कारागार के बाहर दूर-दराज इलाकों से आए लोगों की भीड़ थी। जेल के बाहर मुलाकातियों को धूप, बारिश से बचाव के कोई इंतजाम नहीं हैं। कोई ऊंची दीवार की छांव में तो कोई सड़क पार पेड़ों के नीचे खड़ा धूप से बचने का इंतजार कर रहा था। परिजन थैलों में कैदियों के लिए खाने-पीने की वस्तुएं लिए थे। सुबह पहली पाली में 115 लोगों ने मिलाई की पर्ची लगा रखी थी। थैलों के बारे में पूछने पर हिचकते हुए 1-2 लोगों ने बताया कि लइया-चना, दालमोठ, अचार वगैरह है। ये सामान अंदर चला जाता है? इस सवाल पर बोले 3 जगह 20-25 रुपये देने पड़ते हैं। फिर तलाशी लेने वाले मूड पर निर्भर होता है, कभी-कभी तो पैसा लेकर भी झोला छीनकर किनारे कर देते हैं। तब तक मुलाकातियों की पुकार शुरू हो गई और लोग जेल गेट पर लाइन में लग गए। पहली मिलाई करीब 10.30 बजे शुरू हुई जो 11.30 बजे तक चली।


(दोपहर 12.30 बजे)

1 मिलाई में 500 खर्च
जेल में अपने भाई से मिलकर लौट रहे लाटूश रोड निवासी सौरभ ने बताया कि एक बार मिलाई करने पर कम से कम 500 रुपए तक का खर्च आता है। कुछ सामान जेल के अंदर भाई को पहुंचाते हैं तो कदम-कदम पर पैसा देना होता है। भाई को भी ‘खर्चा’ देना पड़ता है क्योंकि अंदर उसे भी मिलाई की कीमत देनी पड़ती है।


(दोपहर 12.40 बजे)

1000 का नोट साफ
जेल में बंद साढ़ू से मिलकर लौटे विकास नगर निवासी गुड्डू भदौरिया ने बताया कि पिछली बार आया था तो 1000 रुपये दिए थे। इस बार भी 1000 दिए। प्याज, टमाटर, लइया-चना आदि पहुंचाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं। मिलाई की जगह पर पहुंचते-पहुंचते ही 200-250 खर्च हो जाते हैं। साढ़ू को भी अंदर वसूली चुकाने के लिए पैसे देने पड़ते हैं


(दोपहर 1.05 बजे)

भाई से मुलाकात करके लौटे गोविंदनगर निवासी जीतू वाजपेयी ने कहा कि औरों से पैसे पड़ते हैं लेकिन अपना हिसाब ठीक है इसलिए पैसे बच जाते हैं।

पति से मुलाकात करने मंधना से आई कोमल ने कहा कि गरीब हूं फिर भी जेल वाले तरस नहीं खाते। थोड़ा सा लइया-चना ही दे पाती हूं उसके भी 20-30 रुपए ले लेते हैं। गरीबी के कारण ही महीने में 1 ही बार मिलने आ पाती हूं। हर बार कहां से 400-500 रुपए लाऊं।




जेल का धनशास्त्र

-बैरिक से मिलाई के लिए आने वाले कैदियों को बैरिक में लौटने पर 250-350 रुपए तक वसूली देनी पड़ती है। न दो तो बार-बार पिटाई, भंडारे में काम करने और झाड़ू-पोछा लगाने आदि की सजा दी जाती है। उसका सामान भी छीन लिया जाता है। मिलाई में भी अड़ंगा लगा दिया जाता है। अंदर की आवाज बाहर तक आ नहीं पाती इसलिए कैदी चुपचाप वसूली की रकम दे देते हैं।

-बंदी से मिलाई के समय परिजन बिस्कुट, दालमोठ, लइया, चना, अचार, मिर्च, कच्चा टमाटर, प्याज आदि दे सकते है। पर यह सामान बंदी तक तभी पहुंचेगा जब निर्धारित वसूली दे दी जाएगी।

-जेल में बैरिकों के अंदर अपना खाना पकाने की भी व्यवस्था है पर सिर्फ मालदारों के लिए। अगर आप स्टाफ को तय रकम देते हैं तो सूखी रोटियां, प्लास्टिक और कपड़े की बाती आदि जलाकर दाल-सब्जी में तड़का आदि लगा सकते हैं। वैसे अधिकतर मालदारों के लिए भंडारे से ही स्पेशल दाल-रोटी आ जाती है बशर्ते इसके लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह रकम दी जाए। बैरिक में चूल्हा जलाने के लिए प्रति व्यक्ति प्रति माह 900-1500 तक की रकम तय है।


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जिम्मेदार बोले
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ऐसी कोई बात नहीं है कि बंदी को मिलाई करने के लिए 300 रुपए देने ही पड़ेंगे। यदि ऐसा है तो मैं पता लगाऊंगा। वैसे मैं शहर में अभी नया हूं। पहले यहां की सभी व्यवस्थाओं के बारे में जानकारी कर रहा हूं। रही बात मिलाई में वसूली की तो इसकी भी जानकारी की जाएगी।
अरुण कुमार सिंह, जेलर
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पर्ची के लिए भी हैं दोगुने रेट
जेल में मिलाई की पर्ची लगाने के 50 पैसे से 1 रुपये लगते हैं, पर लिए जाते हैं 2 से 5 रुपये। कैदियों से मिलाई के लिए फोन से पर्ची लगाने की भी सुविधा है। पर इसके लिए 2 रुपये की जगह 5 लिए जाते हैं। स्थिति यह है कि छुट्टियों के दिन पर्ची के पैसे नहीं लिए जाते हैं। पर वहां तैनात सिपाही मिलाई करने वालों से 5 रुपये से लेकर 10 रुपये झटक ही लेते हैं।

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