जेब में नहीं कौड़ी, बातें लंबी-चौड़ी

Kanpur Updated Mon, 25 Jun 2012 12:00 PM IST
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मनोज चौरसिया
कानपुर। नगर निगम का स्थिति आमदनी अठन्नी और खर्चा रुपैया वाली है। आमदनी इतनी कम है कि अपने खर्चे ही पूरे नहीं होते, शहर के विकास की तो बात ही छोड़ दीजिए। इसके लिए सरकार का मुंह ताकना पड़ता है। बजट मिला तो काम हो गया, वर्ना नहीं। महापौर पद के प्रत्याशी तो बढ़ चढ़कर दावे कर रहे हैं। कोई शहर को हाईटेक बनाने की बात कहता है तो कोई चमकाने की, पर ये होगा कैसे? हकीकत यह है कि महापौर के पास एक कलम खरीदने तक का अधिकार नहीं है। आमदनी कैसे बढ़े? इसका फार्मूला फिलहाल तो किसी के पास नहीं है।


इनसेट
आय -
मद आय (करोड़ रुपए में)
हाउस टैक्स समेत विभिन्न करों से आय 88
13 वें वित्त आयोग से मिलने वाला धन 24
अवस्थापना निधि से प्राप्त होने वाला धन 13
योग 125

खर्च -
मद धन (करोड़ रुपए में)
सार्वजनिक निर्माण (विकास कार्य) 68 करोड़ रुपए
स्वच्छता पर खर्च 26
संविदा कर्मियों के वेतन समेत सफाई पर खर्च 26
वेतन एवं पेंशन पर सालाना खर्च 200
स्टेंशनरी समेत अन्य खर्च 50
योग 370 करोड़ रुपए
नोट - बाकी धन की भरपाई के लिए नगर निगम प्रशासन को सरकार का मुंह ताकना पड़ता है। नगर निगम के एक अफसर का कहना है कि नगर निगम को यदि सालाना लगभग 300 करोड़ रुपए अतिरिक्त आय हो या केंद्र अथवा राज्य सरकार से विशेष पैकेज के रूप में यह धन मिले तभी शहरवासियों को सभी मूलभूत समस्याओं से निजात मिल पाएगी।

इनसेट बाक्स -
आंकड़ों की बाजीगरी
(नगर निगम का चालू वित्तीय वर्ष का बजट - 1543 करोड़ रुपए)

आय
मद आय (करोड़ रुपए में)
हाउस टैक्स समेत विभिन्न करों से आय 88
13 वें वित्त आयोग से मिलने वाला धन 24
अवस्थापना निधि से प्राप्त होने वाला धन 13
योग 125

खर्च -
मद धन (करोड़ रुपए में)
सार्वजनिक निर्माण (विकास कार्य) 68 करोड़ रुपए
स्वच्छता पर खर्च 26
संविदा कर्मियों के वेतन समेत खर्च 26
वेतन एवं पेंशन पर सालाना खर्च 200
स्टेंशनरी समेत अन्य खर्च 50
कुल 370 करोड़ रुपए
-----------------------------------------
नोट- नगर निगम में विभिन्न मदों में होने वाले खर्च को भिन्न - भिन्न मदों में प्राप्त होने वाले धन के बराबर करने और टैक्स के मद में होने वाली कम आय को ज्यादा दिखाते हुए शासन से अतिरिक्त धन लेने के लिए भी आंकड़ों की बाजीगरी की जाती है।



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धन की कमी से होने वाली दिक्कतें
- सड़कों, गलियों का निर्माण नहीं हो पा रहा।
- पर्याप्त सफाई कर्मी न होने के कारण सफाई कार्य प्रभावित ।
- पर्याप्त कर्मचारी और संसाधन न होने से कैटल कैचिंग दस्ता निष्क्रिय
- पर्याप्त हैंडपंप और सबमर्सिवल पंप का संकट
- मालियों की कमी और बाउंड्री आदि न होने के कारण पार्कों का रख-रखाव प्रभावित
- कर्मचारियों की कमी से अतिक्रमण अभियान प्रभावित
- फागिंग न होने से मच्छरों की रोकथाम नहीं
- नालों की ठीक से सफाई न होने से जलभराव की समस्या।
-रोड लाइटों की व्यवस्था नहीं

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