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नेपाल के सहारे कर चोरी करने वालों पर कसेगा शिकंजा

Kanpur Updated Sun, 24 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। कर चोरी का आसान विकल्प बन चुके नेपाल के जरिए अब काली कमाई को छुपाना आसान नहीं होगा। दोनों देशों के बीच 12 जून से दोहरी कराधान संधि (डबल टैक्सेशन ट्रिटी ) प्रभावी हो गई है। अब दोनों देशों के अधिकारियों को मांगने पर न केवल एक-दूसरे के नागरिकों की आय और संपत्तियों की सूचनाएं अनिवार्य रूप से साझा करनी होंगी, बल्कि काली कमाई से बनाई गई संपत्तियों को वे जब्त भी कर सकेंगे। स्थानीय आयकर अफसरों का मानना है कि परिक्षेत्र के ऐसे व्यवसाई जिनके आफिस नेपाल में भी हैं, संदिग्ध गतिविधियों पर उनके खिलाफ कार्रवाई आसान हो जाएगी।
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भारत-नेपाल के बीच फ्री-बॉर्डर होने की वजह से एक ओर बड़े पैमाने पर ट्रेडिंग का कार्य होता है, वहीं कर चोरी भी बड़े पैमाने पर होती है। तमाम भारतीय व्यवसाइयों ने नेपाल में अपने दफ्तर खोल रखे हैं। जब कभी आयकर आयकर विभाग इनकी काली कमाई पकड़ लेता है तो नेपाल में अपने व्यवसाय से आय दिखाकर वहां टैक्स दिए जाने की बात कहकर बच जाते थे। इसके अलावा यदि कोई करदाता नेपाल में हुई आय पर भारत में टैक्स दे भी देता था तो उसका स्रोत नहीं पता चलता था। हाल ही में कानपुर के एक पान मसाला समूह पर पड़े छापे में भी उसके नेपाल में दफ्तरों का पता चला था। इसके अलावा कत्था, गुटखा व अन्य ट्रेड से जुड़े कारोबारी वहां दफ्तर खोले हुए हैं। ऐसा दोनों देशों के बीच सूचनाएं साझा करने के कमजोर तंत्र के चलते होता था। मगर अब दोहरी कराधान संधि के तहत दोनों देशों के लिए सूचनाएं देना बाध्यता होगी। आयकर मामलों की विशेषज्ञ सीए पूजा श्रीवास्तव के मुताबिक इस संधि से एक ओर कर चोरों पर शिकंजा कसेगा, वहीं अच्छी नीयत से कार्य करने वालों को तमाम फायदे होंगे। तमाम लोग कर चोरी के लिए अपने भुगतानों को नेपाल में फर्जी खाते खोलकर करवा लेते थे। इसके बाद इसे भारत में वहां हुई कमाई बताकर ट्रांसफर करवा लेते थे। आयकर विभाग के लिए इन्हें पकड़ पाना वाकई मुश्किल होता था। मगर अब ऐसे लेनदेनों की धरपकड़ भी आसान हो जाएगी। इसके अलावा तमाम मामले ऐसे भी हैं जिनमें भारत में की गई काली कमाई से नेपाल में संपत्ति बना ली गई। संधि के तहत यदि आयकर विभाग यह साबित कर देता है कि संबंधित व्यक्ति ने कर चोरी करके संपत्ति बनाई है तो नेपाल सरकार इन्हें जब्त करके भारत को टैक्स अदायगी की कार्रवाई करेगी।


छात्रों-अध्यापकों को फायदा
कानपुर। अध्ययन करने के लिए भारत से नेपाल जाने या नेपाल से भारत आने वाले छात्र यदि यहां अपने जीविकोपार्जन के लिए शिक्षण संबंधी कार्य करते हैं तो अब उन्हें 2 वर्षों तक आयकर नहीं देना होगा। इसके अलावा अध्यापन कार्य के लिए नेपाल जाने वालों को वहां से होने वाली आय 2 वर्षों तक आयकर से मुक्त रहेगी।


(बयान)
16 मार्च को हुई संधि 12 जून से प्रभावी हो गई है। इस संबंध में विभाग ने अधिसूचना जारी कर दी है। भारत से बड़े पैमाने में लोग नेपाल में व्यवसाय कर रहे हैं। यह संधि दोनों देशों के आर्थिक पक्ष को मजबूती देगी। इससे कालेधन पर लगाम लगाने में सफलता मिलेगी, साथ ही श्रोत की जानकारी विभाग को मिल सकेगी।
बीपी सिंह, आयकर आयुक्त

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