लखनऊ में बनेगी पहली वाइस डिटेक्शन लैब

Kanpur Updated Sat, 23 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। यूपी में पहली वाइस डिटेक्शन लैब लखनऊ में स्थापित की जाएगी। इसके लिए प्रस्ताव शासन को भेजा गया है। उम्मीद है कि निकाय चुनाव के बाद लैब के लिए 1.50 करोड़ रुपए मिल जाएंगे। इसके अलावा कानपुर में विधि विज्ञान प्रयोगशाला (फोरेंसिक लैब) स्थापित की जाएगी। शुक्रवार को दौरे पर शहर आए एडीजी (टेक्निकल सर्विसेज) सुब्रत त्रिपाठी ने ‘अमर उजाला’ को यह जानकारी दी। उन्होंने बताया कि अभी तक अपराधों के खुलासे में मदद के लिए आवाज का मिलान पुलिस हैदराबाद और चंडीगढ़ की लैब से कराती है।
एडीजी ने बताया कि प्रदेश में आगरा, लखनऊ और वाराणसी में फोरेंसिक लैब हैं। अब 5 जोनल हेड क्वार्टर पर फोरेंसिक लैब स्थापित होंगी। पहले कानपुर जोन की लैब झांसी में बनाए जाने का प्रस्ताव था लेकिन पूर्व में कानपुर जोन में तैनात रहे एक आईजी ने शहर में लैब बनाए जाने की सिफारिश की थी। उनका तर्क था कि कानपुर महानगर है और अन्य जिलों की अपेक्षा यहां ज्यादा वारदात होती हैं। आईजी की इस सिफारिश को स्वीकार कर लिया गया है। एडीजी ने बताया कि प्रदेश में 5 फोरेंसिक लैब बनाने के लिए 60 करोड़ रुपए की मांग शासन की गई है। पहले चरण में कानपुर समेत 4 जोनल हेड क्वार्टर में लैब स्थापित करने का प्रस्ताव है। बजट आवंटित होते ही निर्माण प्रारंभ हो जाएगा। एडीजी ने बताया कि फोरेंसिकलैब में खून, हत्या में प्रयुक्त शस्त्र, हैंड राइटिंग समेत कई तहत की जांचें होती हैं। अब लाई डिटेक्टर टेस्ट और डीएनए जांच भी फोरेंसिक लैब, लखनऊ में सफलता पूर्वक की जा रही हैं। पहले इन जांचों के लिए हैदराबाद और चंड़ीगढ़ लैब की मदद लेनी पड़ती थी। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि कई यूनिटों में घटिया रा मैटेरियल के इस्तेमाल की शिकायतें मिली हैं। कई घटनाओं में फील्ड यूनिट ने जो तथ्य बटोरे वे घटिया रा मैटेरियल की वजह से ही पुख्ता नहीं हो सके। उनकी सही रिपोर्ट नहीं आ सकी। इस मामले की जांच कराई जाएगी।


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निरीक्षण में आल इज वेल
कानपुर। छावनी थाना परिसर में स्थित फील्ड यूनिट दफ्तर के निरीक्षण में एडीजी सुब्रत त्रिपाठी को सब कुछ ठीक मिला। उन्होंने कहा कि आल इज वेल। एडीजी ने कहा कि समिति संसाधनों में फील्ड यूनिट सही काम कर रही है। इस बेसिक यूनिट का काम किसी घटनास्थल पर तथ्य जुटाना और फिर सुरक्षित तरीके से सेंट्रल लैब तक पहुंचाना है। उन्होंने कहा कि किसी भी घटना के आरोपी को सजा दिलाने के लिए फोरेंसिक जांच की अहम भूमिका है। फोरेंसिक टीम को किसी भी घटनास्थल पर सही तथ्य जुटाने में सफलता तभी मिल सकती है, जब तक घटनास्थल को छेड़ा न जाए। इसके लिए जरूरी है कि घटनास्थल को फौरन सीज कर दिया जाए। पुलिस भी फोरेंसिक टीम के पड़ताल करने केबाद ही वहां जाए। इसके पहले दोपहर में पीएसी गेस्ट हाउस में एडीजी से आईजी पीयूष आनंद, डीआईजी अमिताभ यश समेत कई अफसरों से मुलाकात की।

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