‘हर भारतीय पर 36 हजार कर्ज, अब तो जागो’

Kanpur Updated Thu, 21 Jun 2012 12:00 PM IST
कानपुर। टीम अन्ना के सदस्यों ने बुधवार को शहर आकर लोगों को झकझोरा। लोगों को दब्बू, डरपोक, धृतराष्ट्र कहकर जागने को कहा। कहा कि चुनावों में जाति-धर्म, रिश्तेदारों-बिरादरी वालों को वोट देने की आदत छोड़ें। जनप्रतिनिधि, भ्रष्ट ब्यूरोक्रेसी ने देश को कर्ज के गड्ढे में धकेल दिया है। आज देश का हर नागरिक 36 हजार रुपये का कर्जदार है। इसका जवाब सरकारों और जनप्रतिनिधियों से मांगें। टीम के सदस्यों ने 25 जुलाई को दिल्ली के जंतर-मंतर पर होने वाले टीम अन्ना के आमरण अनशन का औचित्य भी समझाया। विभिन्न मामलों में आरोपी केंद्रीय कैबिनेट मंत्रियों की जांच के लिए स्पेशल इनवेस्टीगेशन टीम (एसआईटी) और दागी सांसदों का पर्दाफाश करने के लिए स्पेशल टास्क फोर्स के गठन की मांग की। देश के अन्य राज्यों की तुलना में पिछड़ते जा रहे उत्तर प्रदेश और बदहाली की ओर बढ़ रहे कानपुर की ओर ध्यान आकर्षित किया।
बीएनएसडी शिक्षा निकेतन बेनाझाबर में मुख्य वक्ता किरण बेदी कनपुरियों पर जमकर बरसीं। कहा आप लोग दब्बू हैं, डरपोक और धृतराष्ट्र हैं। 5 साल बाद आंखों पर पट्टी बांधकर लाइन में लगकर जात-पात, धर्म, गांव, रिश्तेदार के नाम पर भ्रष्टाचारियों को वोट दे आते हैं, इसीलिए गरीब हैं। देश में 100 करोड़ स्कूलों की जरूरत है। बुनियादी स्वास्थ्य सेवा नहीं हैं। सड़कें टूटी हैं, रोजगार के अवसर नहीं हैं। उत्तर प्रदेश तो बिहार से भी पिछड़ रहा है। इन सबका कारण आपका गलत वोट है। उन्होंने कहा कि कथित जनप्रतिनिधि, भ्रष्ट ब्यूरोक्रेसी ने देश पर बहुत आर्थिक बोझ लाद दिया है। वर्तमान में देश का हर नागरिक 36 हजार रुपये का कर्जदार है। बिना किसी कसूर के देश में पैदा होने वाला हर बच्चा कर्ज में दब रहा है। मांगिए इन जनप्रतिनिधियों से हिसाब।
कुमार विश्वास ने उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार पर करारे वार किए। कहा, प्रदेश सरकार ने घोषणा की है कि नोएडा, गाजियाबाद में उनको अधिक बिजली मिलेगी जो अधिक भुगतान करेंगे। ये कैसा समाजवाद है? एक कथित युवराज दलित के घर खाना खाकर उसकी मार्केटिंग करते हैं। राजधर्म का हवाला देते हुए बोले, कि राजा का काम दलित के घर खाना खाना नहीं है। जब वो खाना खाए, उससे पहले सुनिश्चित कर ले कि उसके देश का कोई दलित भूखा न हो। ईस्ट का मैनचैस्टर कहे जाने वाले कानपुर पर चिंता जताते हुए कहा कि हर साल बद से बदतर हो रहे हैं हालात। एक केंद्रीय मंत्री की ओर इशारा करते हुए बोले उनकी स्थिति दिन पर दिन सुधर रही है। मूलरूप से कानपुर की रहने वाली शाजिया इल्मी ने कहा कि अन्ना का आंदोलन भाजपा और कांग्रेस की जंग नहीं है, सत्ता परिवर्तन की भी जंग नहीं, यह व्यवस्था परिवर्तन की जंग है। अन्ना मूवमेंट पर मुस्लिम विरोधी, दलित विरोधी होने के आरोप लगते हैं जबकि वह भ्रष्टाचार विरोधी हैं और भ्रष्टाचार का कोई धर्म नहीं होता। अन्ना संदेश यात्रा के संयोजक संजय सिंह ने ‘एक बूढ़ा आदमी है या यूं कहो, इस अंधेरी कोठरी में एक रोशनदान है...’ के माध्यम से अन्ना की सार्थकता बताई। उन्होंने कहा यात्रा के दौरान एहसास हुआ कि अन्ना का आंदोलन शहरों के साथ ही गांवों में भी मजबूत है। समारोह में पूर्व सांसद इलियास आजमी, रामबालक मिश्रा, राममोहन पाठक, योगेश श्रीवास्तव, रामधीरज, संजीव सिंह, सत्यप्रकाश आजाद, प्रमोद, विष्णु आदि मौजूद थे।


झलकियां
- समारोह स्थल पर टीम अन्ना और स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों के फोटो उनके स्वभाव के अनुसार सभागार के रास्ते में आमने-सामने सजाए गए थे। अन्ना के सामने महात्मागांधी, केजरीवाल के सामने भगतसिंह, किरणबेदी के सामने लक्ष्मीबाई, कुमार विश्वास के सामने सुभाष चंद्र बोस, संजय सिंह के सामने चंद्रशेखर आजाद, शाजिया इल्मी के फोटो के सामने झलकारी बाई का फोटो लगाए गए थे।

- वित्त मंत्री प्रणव मुखर्जी पर व्यंग्य किए गए। कुमार विश्वास ने उनकी वफादारी को प्रणाम करते हुए कहा कि तीन पीढ़ियों के वफादार रहे हैं।

- आयोजन में युवाओं के साथ ही बुजुर्गों का उत्साह भी देखते ही बना। 85 वर्ष तक के बुजुर्ग आयोजन में शुरु से अंत तक मौजूद रहे। युवाओं में आईआईटी स्टूडेंट, फ्रोफेशनल मौजूद थे।

- शुकुल श्रीवास्तव ने गणेश ओम, आईआईटी के म्यूजिक ग्रुप के सोहम, शौर्यदीप, अक्षय, अभिजीत, प्रतुल, श्रेयन आदि ने वैष्णव जन तो.. प्रस्तुत किया।


महापौर प्रत्याशी भी आए
कानपुर। समारोह को राजनीतिक रूप से भुनाने के लिए भी होड़ रही। समारोह स्थल पर महापौर प्रत्याशी गणेश तिवारी और राजेंद्र अग्रवाल तो श्रोताओं के रूप में मौजूद रहे लेकिन विभा दुबे मंच पर चढ़ने को अड़ गईं। इंडिया अगेंस्ट करप्शन टीम के मना करने पर वे नीचे आकर बैठ गईं। थोड़ी देर बाद फिर गुलदस्ता लेकर पहुंच गई और मना करने पर बिगड़ गईं।


त्वरित टिप्पणी (फोटो हैं)

‘ बहुत ऊर्जा मिली, भ्रष्टाचार के विरोध में हम आगे नहीं आएंगे, तो व्यवस्था कैसे सुधरेगी’
मीनाक्षी सिंह, ट्रेड यूनियन


‘देश का सबसे बड़ा दुश्मन भ्रष्टाचार है। उसे सबक सिखाना चाहती हूं। आयोजन से प्रेरणा मिली’
अनु, सीए स्टूडेंट

‘पिता पद्मराज जैन स्वतंत्रता सेनानी थे। अन्याय के खिलाफ उनकी परंपरा को आगे चलाना चाहता हूं। अन्ना प्रेरणा देते हैं’
अशोक जैन( 77)

‘मेरी उम्र 80 वर्ष है। नौकरी में तरह-तरह के लोग देखे हैं। अन्ना की हुंकार के बाद भ्रष्ट सरकारी मशीनरी में डर है। इस मुहिम को युवा आगे बढ़ाएं’
एसडी श्रीवास्तव, रिटायर्ड विदेश व्यापार विभाग कर्मी

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