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सेंट्रल की प्रीपेड बूथ सेवा: 6 लाख किसकी जेब में!

Kanpur Updated Mon, 18 Jun 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। सेंट्रल स्टेशन पर यात्रियों को तय रेट पर आटो-टेंपो मुहैया कराने के लिए खोले गए प्रीपेड टैक्सी बूथ जनता का नहीं बल्कि जीआरपी का ‘कल्याण’ कर रहे हैं। इस सेवा से पुलिस को सालाना औसतन करीब 9 लाख रु पए की आमदनी होती है जबकि विभागीय कल्याण कोष में बमुश्किल ढाई-पौने 3 लाख रुपए ही जमा कराए जा रहे हैं। करीब 6 लाख रुपए कहां जा रहे हैं? किसी को नहीं पता। जीआरपी की शह पर ही प्रीपेड टैक्सी बूथ पर आटो-टेंपो वाले निर्धारित से ज्यादा किराया भी वसूल लेते हैं और विवाद होने पर सिपाही उन्हीं के पक्ष में खड़े हो जाते हैं क्योंकि उनको भी हिस्सा मिलता है।
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4 साल पहले सेंट्रल पर कैंट और सिटी साइड में प्रीपेड आटो सेवा लंबे-चौड़े दावों के साथ शुरू की गई थी। तय हुआ था कि रेलवे, जीआरपी और ट्रैफिक पुलिस की कमेटी के सदस्य हर 6 महीने में भाड़ा तय करेंगे पर 2 साल से संयुक्त कमेटी की बैठक ही नहीं हुई और बूथ पर जो लिस्ट टंगी है उसमें चालक और जीआरपी मिलीभगत करके मनमाना किराया लिख देते हैं। इसके अलावा यात्रियों को बिना प्रीपेड सेवा के मनचाहे भाड़े पर भी ले जाया जाता है। इसका हिस्सा भी जीआरपी अफसरों वहां पर ड्यूटी करने वाले सिपाहियों को मिलता है। नियमानुसार बूथ से बुकिंग पर जाने वाले हर वाहन से हर चक्कर में 5 रुपये जीआरपी को दिए जाते हैं। इसकी पर्ची भी मिलती है।


आमदनी का आंकड़ा

- औसतन दोनों ओर चलते हैं लगभग 100 आटो
- एक आटो एक बार में देता है 5 रुपए तो आमदनी हुई 500 रुपए
- 24 घंटे में लगते हैं औसतन 5 फेरे तो आमदनी हो गई 2500 रुपए
- एक महीने में लगभग 75000 आमदनी तो पूरे साल में करीब 9 लाख रुपए आमदनी


पुलिस मुख्यालय में जमा होता है सालाना 3 लाख
कानपुर। जीआरपी के रिकार्ड के मुताबिक पुलिस मुख्यालय में प्रीपेड बूथ सेवा से साल भर में 3 लाख रुपए जमा कराए जाते हैं। पुलिस कल्याण निधि कोष में जमा होने वाली इस राशि को सिपाहियों और मातहतों को विशेष परिस्थितियों में जारी करने की व्यवस्था है पर अभी तक ये रकम केवल अफसरों के कहने पर खर्च की जाती है। पिछले 4 साल में फूटी कौड़ी भी कानपुर में तैनात किसी भी सिपाही या दारोगा की मदद में नहीं जारी हुई।


‘रजिस्टर देखकर ही कुछ बता सकते’
कानपुर। जीआरपी प्रभारी सीपी सिंह का कहना है कि जो पैसा इकट्ठा होता है, उसे पुलिस मुख्यालय के फंड में जमा कराया जाता है। रोजाना आटो चालकों से लगभग ढाई हजार रुपए की वसूली होती है। क्या पूरी राशि जमा कराते हैं? तो उन्होंने जवाब दिया कि रजिस्टर देख कर ही बता सकते हैं पर हकीकत यह है कि दोनों ओर से आने वाली वसूली में 800-850 रुपए ही रोजाना के हिसाब से कराए जा रहे हैं।

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