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रासायनिक-जैविक खतरों का ‘कवच’ बना रहा शहर

Kanpur Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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वैभव शर्मा
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कानपुर। देश का रक्षा तंत्र ही नहीं, कॉरपोरेट जगत भी न्यूक्लियर-बायोलॉजिकल-केमिकल (एनबीसी) हमलों या हादसों को लेकर चिंतित है। यह चिंता मांग के रूप में सामने आ रही है। अब तक सिर्फ डिफेन्स रिसर्च डेवलपमेंट आर्गनाइजेशन (डीआरडीओ) को एनबीसी ग्लव्स और ओवर बूट सप्लाई करने वाली शहर की कपिल पॉलिमर्स के पास बड़े कॉरपोरेट घरानों से उत्पाद संबंधी मांग और प्रश्न आ रहे हैं। कंपनी के तकनीकी प्रमुख जगदीश अरोरा ने बताया कि सुरक्षा और गुणवत्ता को ध्यान में रखते हुए सभी को डीआरडीओ के मार्फत आने को कहा है। वर्तमान में डीआरडीओ को एनबीसी ओवर बूट और ग्लव्स सप्लाई कर रही यह देश में एकमात्र कंपनी है।
श्री अरोरा ने बताया कि पानी के जहाज के निर्माण से जुड़े केंद्र सरकार के उपक्रमों से सीधे आर्डर आ रहे हैं। निजी क्षेत्र की बड़ी कंपनी एलएंडटी व अन्य ने भी जानकारी मांगी है। उन्हें डीआरडीओ के माध्यम से ही आर्डर देने की सलाह दी है। सेना के साथ ही मिलेट्री ट्रेनिंग कॉलेज, बीएसएफ, सीआरपीएफ और चुनिंदा राज्यों की पुलिस को भी एनबीसी उत्पाद सप्लाई हो रहे हैं। उन्होंने बताया कि आम जनजीवन में तरह-तरह के रेडिएशन का खतरा बढ़ गया है। निजी कंपनियों में उत्पादन की आधुनिकतम तकनीक प्रयुक्त हो रही हैं। किसी हादसे में रेडियोएक्टिव संक्रमण फैलने पर सबसे पहले उसकी रोकथाम करने वाले दल को एनबीसी सुरक्षा कवर देने के लिए सरकारी और निजी एजेंसी मांग कर रही हैं। अब तक डीआरडीओ को करीब 2 लाख एनबीसी ग्लव्स सप्लाई कर चुके हैं। उत्पादों को अधिक आधुनिक, उपयोगी और कारगर बनाने पर शोध जारी है।
इसलिए हैं खास
- बुटायल रबर से बने हैं उत्पाद। इन्हें पहनने के बाद अधिकतम डेढ़ घंटे प्रभावित क्षेत्र में रह सकते हैं बचाव कर्मी।
-उत्पाद 6 घंटे तक संक्रमण से सुरक्षा देने में सक्षम
- आर्मी, एयरफोर्स, नेवी के कड़े मानकों को पूरा करते हैं उत्पाद
- पहले स्वीडन से आते थे एनबीसी सुरक्षा कवच। उन पर चार गुना अधिक खर्च आता था
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