बड़ी चोरी खुलती नहीं, साइकिल चोरी का क्या करें

Kanpur Updated Thu, 07 Jun 2012 12:00 PM IST
कानपुर। ‘पुलिस आपकी मित्र है, आपकी रक्षा के लिए है’। ये वाक्य थानों और पुलिस अफसरों के आफिस के बाहर दीवारों पर अक्सर लिखे दिखते हैं। यह भी सच है कि हर चमकती चीज सोना नहीं होती सो जरा पुलिस के इन दावों को परख भी लीजिए। कई बार या यूं कहिए कि अधिकतर अपनी पुलिस दगा दे जाती है या फिल्मों की तरह सब कुछ हो जाने के बाद आती है। मंगलवार का ही मामला ले लीजिए। लखनऊ क्रासिंग पर एक सब्जी विक्रेता अनवार का पैर मालगाड़ी से कट गया। लोग आते-जाते देखते रहे। खपरा मोहाल की श्वेता मेहरोत्रा ने 100 नंबर डाल कर पुलिस से मदद मांगी तो उधर से कहा गया ‘मैडम ज्यादा नेता न बनो’। खैर श्वेता खुद आटो से अनवार को असपताल ले गई। इसके बाद बुधवार को ‘अमर उजाला’ ने 100 नंबर का हाल-चाल लिया। नजारा आपके सामने है। बुधवार दोपहर से रात तक कई 100 नंबर पर फोन मिलाया तो कहा गया कि ‘ साइकिल चोरी की रिपोर्ट नहीं होती। बाइक चोरी हुई है, तो वहीं खड़े रहो, जांच के बाद कार्रवाई होगी। जैसे जवाब मिले।


दोपहर-1.56 बजे: कंट्रोल रूम में फोन उठा। बताया गया कि चकेरी के श्याम नगर मोड़ पर किसी ने कार का शीशा तोड़कर पर्स पार कर दिया है। जवाब मिला, कार का दरवाजा ठीक से बंद करके जाना चाहिए। किसी को वहां छोड़ जाते। तुम लोगों की लापरवाही का सिर दर्द पुलिस को झेलना पड़ता है। संबंधित थाने जाकर अप्लीकेशन दो, चोरी की नहीं, गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज हो जाएगी।

शाम-4.02 बजे। कंट्रोल रूम में फोन करके बताया गया कि गुजैनी घरेलू सामान लेने आया था। दुकान के बाहर से साइकिल चोरी हो गई है। आपरेटर ने जवाब दिया कि साइकिल चोरी की रिपोर्ट नहीं होती है। ज्यादा है, तो संबंधित थाने में जाओ। बड़ी चोरियां खुलती नहीं है, तो तुम्हारी साइकिल कहां से मिलेगी।

शाम-4.35 बजे। कंट्रोल रूम में महिला आपरेटर ने फोन उठाया। बताया गया कि रावतपुर क्रासिंग के पास से बाइक गायब हो गई है। जवाब मिला..तो क्या करें। रोज न जाने कितनी बाइकें चोरी होती हैं। फिर भी नाम और पता बताओ। वहीं खड़े रहो, थोड़ी देर में पुलिस आएगी, जांच करेगी। इसके बाद कार्रवाई होगी। कितनी देर में पुलिस पहुंचेगी पूछने पर आपरेटर ने कहा ज्यादा जल्दी है, तो घर जाओ।

शाम-5.28 बजे। कंट्रोल रूम का फोन उठा। बताया गया कि पीरोड में पानी टंकी केनिकट एक व्यक्ति बेहोश पड़ा है। आपरेटर ने तपाक से जवाब दिया मर गया है या जिंदा है। पता नहीं कहने पर बोली हिला-डुला कर देखो। जिंदा है, तो अस्पताल पहुंचा, पुलिस आती रहेगी। तुम अपना नाम और पता नोट करा दो। यह सुनते ही फोन काट दिया गया।



(बयान)
कंट्रोल रूम की व्यवस्था जल्द सुधरेगी। रिकार्डिंग सिस्टम लगाया जाएगा। हर काल रिकार्ड होगी, जिसमें आपरेटर का जवाब भी रिकार्ड होगा। सलीके से जवाब न देने वाले आपरेटर पर कार्रवाई होगी। पुलिस का मौके पर जाने का समय भी रिकार्ड में रखा जाएगा।
अजय कुमार साहनी, एएसपी प्रभारी कंट्रोल रूम।

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