कानपुर। केस्को ने 2.50 लाख शहरियों को राहत की तैयारी शुरू कर दी है। एमडी ने कई सब स्टेशनों का दौरा कर हकीकत परखी तो खुलासा हुआ कि 6.6 केवी की लाइन को 11 केवी में बदलना जरूरी है। 35 साल पुराने ब्रेकर बड़ी दिक्कत पैदा कर रहे हैं। प्रथम चरण में चार सब स्टेशनों को अपग्रेड करने और एक सब स्टेशन को उच्चीकृत करने का प्रस्ताव बनाने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है।
एमडी आरएस पांडेय ने सब स्टेशनों का दौरा किया तो खुलासा हुआ कि घनी बस्तियों में फाल्ट ज्यादा होने से अक्सर बिजली आपूर्ति बाधित होती है। कटौती के अलावा घंटों फाल्ट ठीक करने में लग जाते हैं। इससे हंगामा और बवाल बढ़ते हैं। एमडी ने अधिशाषी अभियंताओं की बैठक में समय से फाल्ट ठीक न होने का कारण पूछा तो बताया गया कि शहर में बिछी कुल लाइन की 25 फीसदी लाइन 6.6 केवी की है। यह सबसे ज्यादा दिक्कत करती है। एमडी ने बताया कि सर्वे शुरू करा दिया गया है कि कहां और कितनी अंडर ग्राउंड लाइन 6.6 केवीए की है। इस आधार पर प्रस्ताव बनवाया जाएगा। इसके बाद बोर्ड भेजकर बजट मंजूर कराकर काम शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह माह लगेंगे पर इसके परिणाम अच्छे साबित होंगे। अधिशाषी अभियंता तकनीकी एकेएस चौहान का कहना है कि प्रथम चरण के काम पूरे होने से ही करीब 2.50 लाख लोगों को राहत मिल जाएगी।
इनसेट-
1-क्या समस्या
-6.6 केवी की पिल्का केबिल छह मीटर तक जमीन के नीचे बिछी
-फाल्ट लोकेट, खुदाई और ठीक करने में 10-12 घंटे लगते
-कई सब स्टेशन अभी 6.6 केवी की लाइन के सहारे ही चलते
-35 साल पुराने ब्रेकर समस्या बने हैं। पार्ट भी नहीं मिलते
2-क्या होगा
-म्योर मिल चमनगंज, चीना पार्क, साइकिल मार्केट सब स्टेशन 11 केवी के होंगे
-म्योर मिल सब स्टेशन को आरपीएच से जोड़कर उच्चीकृत किया जाएगा
-प्रथम चरण के काम के बाद शहर की 6.6 की पूरी लाइन और ब्रेकर बदले जाएंगे
---
तो इसलिए पिछले साल दुरुस्त मिली बत्ती
इतने ही संसाधन में पिछले साल गर्मी में एमडी रितू माहेश्वरी के कार्यकाल में दुरुस्त बिजली मिलने के सवाल पर वर्तमान एमडी आरएस पांडेय ने कई जवाब दिए। उनका कहना है कि पिछले साल कानपुर में 24 घंटे आपूर्ति थी। इस तरह कम से कम 22 घंटे बिजली मिल रही थी। विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली खरीद कर प्रदेश में आपूर्ति हो रही थी। इस समय चार घंटे बिजली कटौती है। इस तरह करीब 17-18 घंटे ही आपूर्ति है। कटौती से सब स्टेशनों पर ब्रेकर शट डाउन करना पड़ता है। इस प्रक्रिया से फाल्ट बढ़ते हैं। कटौती के बाद आपूर्ति शुरू होने पर एकदम से लोड बढ़ने से ओवरलोडिंग से फाल्ट होते हैं। इस साल डिमांड भी बढ़ी है। हालत यह है कि करीब सौ मेगावाट लोड तो इनवर्टर का ही है।
कानपुर। केस्को ने 2.50 लाख शहरियों को राहत की तैयारी शुरू कर दी है। एमडी ने कई सब स्टेशनों का दौरा कर हकीकत परखी तो खुलासा हुआ कि 6.6 केवी की लाइन को 11 केवी में बदलना जरूरी है। 35 साल पुराने ब्रेकर बड़ी दिक्कत पैदा कर रहे हैं। प्रथम चरण में चार सब स्टेशनों को अपग्रेड करने और एक सब स्टेशन को उच्चीकृत करने का प्रस्ताव बनाने के लिए सर्वे शुरू करा दिया गया है।
एमडी आरएस पांडेय ने सब स्टेशनों का दौरा किया तो खुलासा हुआ कि घनी बस्तियों में फाल्ट ज्यादा होने से अक्सर बिजली आपूर्ति बाधित होती है। कटौती के अलावा घंटों फाल्ट ठीक करने में लग जाते हैं। इससे हंगामा और बवाल बढ़ते हैं। एमडी ने अधिशाषी अभियंताओं की बैठक में समय से फाल्ट ठीक न होने का कारण पूछा तो बताया गया कि शहर में बिछी कुल लाइन की 25 फीसदी लाइन 6.6 केवी की है। यह सबसे ज्यादा दिक्कत करती है। एमडी ने बताया कि सर्वे शुरू करा दिया गया है कि कहां और कितनी अंडर ग्राउंड लाइन 6.6 केवीए की है। इस आधार पर प्रस्ताव बनवाया जाएगा। इसके बाद बोर्ड भेजकर बजट मंजूर कराकर काम शुरू करा दिया जाएगा। हालांकि इस पूरी प्रक्रिया में कम से कम छह माह लगेंगे पर इसके परिणाम अच्छे साबित होंगे। अधिशाषी अभियंता तकनीकी एकेएस चौहान का कहना है कि प्रथम चरण के काम पूरे होने से ही करीब 2.50 लाख लोगों को राहत मिल जाएगी।
इनसेट-
1-क्या समस्या
-6.6 केवी की पिल्का केबिल छह मीटर तक जमीन के नीचे बिछी
-फाल्ट लोकेट, खुदाई और ठीक करने में 10-12 घंटे लगते
-कई सब स्टेशन अभी 6.6 केवी की लाइन के सहारे ही चलते
-35 साल पुराने ब्रेकर समस्या बने हैं। पार्ट भी नहीं मिलते
2-क्या होगा
-म्योर मिल चमनगंज, चीना पार्क, साइकिल मार्केट सब स्टेशन 11 केवी के होंगे
-म्योर मिल सब स्टेशन को आरपीएच से जोड़कर उच्चीकृत किया जाएगा
-प्रथम चरण के काम के बाद शहर की 6.6 की पूरी लाइन और ब्रेकर बदले जाएंगे
---
तो इसलिए पिछले साल दुरुस्त मिली बत्ती
इतने ही संसाधन में पिछले साल गर्मी में एमडी रितू माहेश्वरी के कार्यकाल में दुरुस्त बिजली मिलने के सवाल पर वर्तमान एमडी आरएस पांडेय ने कई जवाब दिए। उनका कहना है कि पिछले साल कानपुर में 24 घंटे आपूर्ति थी। इस तरह कम से कम 22 घंटे बिजली मिल रही थी। विधानसभा चुनाव प्रस्तावित होने के कारण अतिरिक्त बिजली खरीद कर प्रदेश में आपूर्ति हो रही थी। इस समय चार घंटे बिजली कटौती है। इस तरह करीब 17-18 घंटे ही आपूर्ति है। कटौती से सब स्टेशनों पर ब्रेकर शट डाउन करना पड़ता है। इस प्रक्रिया से फाल्ट बढ़ते हैं। कटौती के बाद आपूर्ति शुरू होने पर एकदम से लोड बढ़ने से ओवरलोडिंग से फाल्ट होते हैं। इस साल डिमांड भी बढ़ी है। हालत यह है कि करीब सौ मेगावाट लोड तो इनवर्टर का ही है।