फर्जीवाड़े का खेल, जेल में होगा फेल

Kanpur Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
कानपुर। अब फर्जी नाम से बदमाश जेल नहीं जा सकेंगे और पुलिस भी ‘खेल’ कर दूसरों को फर्जी नाम से जेल नहीं भेज सकेगी। यही नहीं जेल से रिहाई के समय चूक से दूसरे अभियुक्त के छूटने की घटनाओं पर भी अंकुश लगेगा। हाईकोर्ट की मानीटरिंग कमेटी के फैसले के बाद नई व्यवस्था लागू करने की कवायद शुरू हो गई है। इस व्यवस्था के तहत वारंट और रिमांड पर अभियुक्तों के फोटो चस्पा किए जाएंगे। पहले चरण में कानपुर समेत सात जनपदों में यह व्यवस्था लागू की जा रही है। इसके लिए बजट भी आवंटित हो गया है।
न्यायमूर्ति डीपी सिंह की अध्यक्षता में गठित मानीटरिंग कमेटी ने यह फैसला लिया है। इसलिए बंदियों की रिमांड फाइल और वारंट पर फोटो चस्पा रहेगी। इस तरह हर अभियुक्त की फोटो अदालत और जेल में रिकार्ड के रूप में रखी जाएगी। शोध अधिकारी मुख्यालय कारागार और सुधार सेवाएं केवी जोशी का जिला कारागार में 26 मई को आए पत्र में इस नई व्यवस्था की जानकारी दी गई है। इसमें कहा गया है कि एक डिजिटल कैमरा 14.1 मेगा पिक्सल 5 एक्स आप्टिकल जूम कीमत 8500 और फोटो स्मार्ट प्रिंटर कीमत 9 हजार कुल 17500 रुपये का बजट इसके लिए मंजूर किया गया है। हाल-फिलहाल यह व्यवस्था कानपुर, नैनी, मेरठ, लखनऊ, मिर्जापुर, वाराणसी और गाजियाबाद में चालू की जाएगी। इन जिला कारागारों में पहले से ही वीडियो कांफ्रेंसिंग की सुविधा है। जेल अधीक्षक आरएन पांडेय ने बताया कि वीडियो कांफ्रेंसिंग का प्रयोग भी सबसे पहले कानपुर में हुआ था, जो सफल भी रहा। वीडियो कांफ्रेंसिंग से पेशी के समय रिमांड फाइल कोर्ट में मुहैया रहेगी। इसलिए कोर्ट पेशी वाले अभियुक्त का मिलान भी कर सकेगी। जेल अधीक्षक का कहना है कि अगर कोई फर्जी नाम और पते से जेल गया तो उसे फोटो के आधार पर तुरंत ट्रेस किया जा सकेगा। इसलिए फर्जीवाड़े पर अंकुश लगेगा। यह नई व्यवस्था करीब एक माह में चालू होने की उम्मीद है।

फर्जी नाम से इस तरह हुए खेल
1-पुलिस ने भाई की जगह भेजा था जेल
कर्नलगंज पुलिस ने 16 नवंबर 2010 को इसहाक को उसके भाई याकूब के वांरट पर जेल भेज दिया था। वह गिड़गिड़ता रहा था पर पुलिस ने एक नहीं सुनी। जेल में उसने साथियों को बताया। ‘अमर उजाला’ ने इसका खुलासा किया तो थानाध्यक्ष की रिपोर्ट पर उसे 22 नवंबर 2010 को रिहा कर दिया गया था। दारोगा को सस्पेंड कर दिया गया था। अदालत ने बेकसूर को जेल भेजने में दारोगा के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।

2-दूसरा नाम बताकर पुलिस को चकमा
पिछले साल गोविंद नगर पुलिस ने अपराधी नीतू नाई को पकड़ा तो खुलासा हुआ कि वह पहले सात नवंबर 2010 को फर्जी नाम से जेल गया और फर्जी जमानतगीरों के सहारे जेल से बाहर आ गया। यह खुलासा उसने दुबारा पकड़े जाने पर किया था। उसके ऊपर कई मुकदमे थे। पुलिस कहीं उस पर गैंगेस्टर की कार्रवाई न कर दे। इसलिए वह फर्जी नाम और पते से जेल गया था। ‘अमर उजाला’ ने इस मामले का खुलासा किया था।

3-गलत नाम बताने पर मुआवजा राशि लौटी
हाल पता 9/ एम/75 दबौली मूल निवासी ग्राम अकबरपुर मडैया उरई निवासी राजू वाजपेयी को गोविंद नगर पुलिस ने अनैतिक देह व्यापार के जुर्म में जेल भेजा था। जेल में वह बीमार हुआ तो उर्सला अस्पताल भेजा गया। वहां पर 25 जून 2010 को उसकी मौत हो गई। मानवाधिकार आयोग ने जांच की और उसके परिजनों को एक लाख मुआवजा देने का आदेश दिया। जेल से पड़ताल शुरू की गई तो उसका दबौली का पता फर्जी निकला। उरई डीएम से जानकारी मांगी गई तो रिपोर्ट आई गांव में इस नाम का कोई नहीं और न ही उसके परिजन। इसलिए मुआवजा वापस किया जा रहा है।

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