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अस्पताल से मरीज को भगाया

Kanpur Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। हैलट इमरजेंसी और ओपीडी के रवैये ने फिर डॉक्टरी के पेशे को शर्मसार कर दिया है। दरअसल बांगरमऊ से इलाज के लिए आई एक लड़की को इमरजेंसी स्टाफ ने यह कह कर भगा दिया कि लड़की नखरे कर रही है, उसे कोई बीमारी नहीं है। यह सुनकर उसके पिता की आंखें नम हो गई। वहीं, ओपीडी मरीजों को हर दर्द और हर मर्ज की दवा के रूप में ब्रूफेन थमा दी गई। शेष दवाएं मरीज बाहर से खरीदने को मजबूर हो रहे हैं। उधर एक्सरे, अल्ट्रासाउंड आदि जांच के लिए शुल्क जमा करने वाले चिलचिलाती धूप में लंबी कतार लगाए थे।
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बांगरमऊ निवासी 16 वर्षीय महरोज बानो के पिता जावेद अली ने बताया कि शुक्रवार से उसे दौरे पड़ने लगे। यह देख परिवार वाले उसे लेकर हैलट लेकर भागे। इमरजेंसी में दिखाया तो डॉक्टर और स्टाफ ने सार्वजनिक रूप से मखौल बनाया। कहा, यह नखरे दिखाती है इसे गुस्सा बहुत आता है। बीमारी कोई नहीं है घर ले जाओ। बहुत अनुरोध पर इमरजेंसी स्टाफ ने साइकेट्री (मनोचिकित्सा) विभाग रेफर कर दिया। खिसियाए परिजन उसे लेकर ओपीडी आए। ओपीडी में फिर महरोज को दौरा पड़ा वो तड़फती रही, शरीर अकड़ गया। परिजन मदद को देखते रहे पर कोई नहीं आया। अमर उजाला टीम को देखते ही ओपीडी स्टाफ की नींद टूटी। कैमरे की फ्लैश से बचने को मरीज की ओर कदम बढ़ाए और बताने लगे साइकेट्री विभाग कहां है।
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जांच से पहले धूप में खड़े होना पड़ा
कानपुर। ओपीडी में मरीजों की तादाद बढ़ती जा रही है। डायरिया, तेज बुखार, उल्टी, लू आदि के मरीजों की संख्या अधिक है। रोजाना करीब 1500 नए मरीज आ रहे हैं। एक्सरे, खून जांच, अल्ट्रासाउंड आदि के लिए भी खासा दबाव है। शुल्क जमा करने को लोग चिलचिलाती धूप में लंबी कतार लगाने को मजबूर हैं।
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कमीशन के चक्कर में बाहर की दवाएं
मेडिकल कालेज के प्राचार्य प्रोफेसर आनंद स्वरूप के स्टैंडिंग आर्डर के बावजूद ओपीडी में डाक्टर ऐसी दवाएं लिख रहे हैं जो अस्पताल में उपलब्ध न हों। ऐसा कमीशन के चक्कर में किया जा रहा है। जब रोगी परचा लेकर दवा काउंटर पर जाता है तो उसे ब्रूफेन के अलावा कुछ नहीं मिलता। बाहर निकलने पर दलाल मेडिकल स्टोरों के कार्ड थमा देते हैं। बिल्हौर निवासी रवींद्र को बवासीर, किदवई नगर निवासी महेश के दांत में दर्द था। अवधपुरी निवासी रामदयाल को पेट की समस्या थी। इन सभी को ब्रूफेन थमाकर बाकी दवाएं बाहर से लाने को कहा गया।
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बोले, जिम्मेदार
‘अगर स्टाफ ने दुर्व्यवहार किया तो यह गलत है। लेकिन उन्हें खुद उसे साइकेट्री विभाग ले जाना चाहिए था। रही बात दवाओं की तो हमें जो दवाएं मिलती हैं वो उपलब्ध कराई जाती हैं। स्टोर में दवा होती है और डॉक्टर ने उसे लिखा है तो अवश्य दी जाती हैं। स्टोर में दवा क्यों नहीं है या स्टोर में मौजूद दवा डॉक्टर क्यों नहीं लिखते इसका जवाब मैं नहीं दे सकता। बेहतर होगा आप प्रधानाचार्य या अन्य शीर्ष अधिकारियों से पूछें।’
डॉ. सीएस सिंह, सीएमएस हैलट

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