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लंदन-पेरिस बाद में बनाओ पहले बत्ती-पानी दो

Kanpur Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
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विवेक त्रिपाठी
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कानपुर। आम आदमी को जब बिजली, पानी, सड़क, सफाई नहीं मिलेगी तो उसकी सोच कैसे अच्छी होगी? वह विकास की बात कैसे करेगा जो मूलभूत सुविधाओं के लिए ही तरस रहा हो? पहले मूलभूत सुविधाएं दी जाएं, तब शहर को लंदन, पेरिस बनाने की सोचें। शहर के विकास के लिए चर्चा करने जुटे जनप्रतिनिधियों, डाक्टरों, समाजसेवकों की बातों का यही लब्बो-लुआब था। नगर निगम गेस्टहाउस में तीन घंटे तक चली बैठक में आईजी, डीएम, नगर आयुक्त के सामने सबने जमकर भड़ास निकाली। अंत में सार्थक निष्कर्ष पर चर्चा के बजाए महापौर अपनी तारीफों के पुल बांधते रहे। बैठक में विधायक सतीश महाना, रघुनंदन भदौरिया भी आमंत्रित थे लेकिन वह नहीं आए। परिवर्तन संस्था ने शहर के लिए किए गए कार्य और जागृति संस्था ने समस्याओं से संबंधित प्रस्तुतिकरण दिया।


आमने-सामने

विधायक बोले

पांच साल खाया-कमाया, अब पुण्य कमा लो

पांच साल अफसरों ने खूब खाया-कमाया। अब पुण्य कमा लो। कानपुर को कानपुर ही बना रहने दो। लंदन-सिंगापुर मत बनाओ। सीवर लाइन पर बस्तियां बसी हैं। अतिक्रमण दोपहर में हटता है, शाम को फिर सज जाता है। हटाए गए लोगों के लिए वैकल्पिक व्यवस्था नहीं है। आईआईटी और रूमा के आसपास सीवर लाइन है ही नहीं। कोई सुविधा मिलती नहीं। जनता का नगर निगम, केडीए से भरोसा उठ चुका है इसीलिए टैक्स नहीं देते। 10,000 हैंडपंप ठूंठ हैं। इन्हें बेचकर जो रकम मिले उससे खराब हैंडपंप की मरम्मत हो सकती है।
सलिल विश्नोई भाजपा विधायक


सपने नहीं काम दिखाइये
विकास के सपने खूब दिखाए जाते हैं लेकिन निचले स्तर पर काम नहीं होता। बताइए दिल्ली-मुंबई में जो पुल छह महीने में बन जाता है, कानपुर में उसे बनने में पंद्रह साल क्यों लगते हैं? यहां ठेकेदार कमिश्नर से ज्यादा पावरफुल होता है। जिस सरकार में ऐसे काम हो, वहां विकास की उम्मीद कैसे की जा सकती है? बिजली, पानी, सड़क, सफाई नहीं है। सीवर भरे हुए हैं। ऐसे में कोई अच्छा कैसे सोचेगा। हम यहां सपने देखने नहीं आए हैं। जो अव्यवस्थाएं हैं, उन्हें नगर निगम और अन्य विभाग देखें।
अजय कपूर कांग्रेस विधायक


ये कैसा खिलवाड़ हो रहा है?
विभागों में तालमेल न होने के कारण शहर का विकास फंसा है। अजीब स्थिति है। अतिक्रमण अभियान चलता है, अवैध कब्जे ढहाए जाते हैं। दस्ते के मुड़ते ही दुकानें फिर से सज जाती हैं। सड़क बनती है और कुछ ही दिन बाद फिर से खोद दी जाती है। जनता के साथ ये कैसा खिलवाड़ हो रहा है? जनता परेशान हो रही है। जो होना है, सभी अफसर मिल बैठकर तय कर लें। एक बार में ही हो जाए। बार-बार जनता को परेशान करना ठीक नहीं है।
सत्यदेव पचौरी भाजपा विधायक


(अफसरों का पक्ष)

दोबारा कब्जे पर थानेदार जिम्मेदार
अतिक्रमण हटने के बाद अगर दोबारा दुकानें सजीं तो लिए थानेदार जिम्मेदार होगा। अभियान के लिए पुलिस फोर्स हमेशा उपलब्ध है। सिर्फ पांच-छह दिन पहले से टाईअप कर लिया जाए। बेहतर ये होगा कि दुकानदार और मकान मालिक खुद अपनी सीमाओं में रहें। अतिक्र मण न करें।
पियूष आनंद, आईजी जोन


जादू की छड़ी नहीं पर कोशिश में कमी नहीं
समस्याएं बहुत हैं। हमारे पास जादू की छड़ी नहीं है फिर भी इन्हें हल करने की ईमानदार कोशिश की जा रही है। आप लोग समस्याएं बताते रहें। हो सकता है एक बार में समाधान न हो। बार-बार बताएं। आप रुक जाएंगे तो हमारे कदम भी थम जाएंगे। अगर आप समस्याएं नहीं बताएंगे तो हम समझेंगे सब ठीक चल रहा है।
एमपी अग्रवाल, डीएम

नेता-जनता के सहयोग से रिजल्ट देंगे
अफसर रिजल्ट देने की क्षमता रखते हैं। मैं खुद रोज सड़क पर निकल रहा हूं। समस्याओं का निस्तारण किया जा रहा है। सीवर जाम इसलिए होते हैं क्योंकि लोगों ने नालियां घेरकर रैंप बना रखे हैं। मकान चाहे छोटा हो गया बड़ा, जनप्रतिनिधियों और जनता के सहयोग से हम तोड़ देंगे। हैंडपंप रिबोर करने के बजाए नए लगाए जाएंगे। युद्धस्तर पर सफाई कराने की रणनीति बना ली गई है। जल्द परिणाम सामने आएंगे।
एनकेएस चौहान, नगर आयुक्त


(इनका गुस्सा फूटा)
हमने 1973 में चमचमाती हुई सड़कों वाला दादानगर इंडस्ट्रियल एरिया नगर निगम को दिया था। अब बरसों से यहां काम ही नहीं हुआ। हमें दादानगर का वैसा ही स्वरूप लौटा दो।
विजय कपूर उद्योगपति

सपा नेता क्यों नहीं आए? मुलायम सिंह यादव कहते थे कानपुर ने हमें दिया ही क्या जो हम इस शहर के लिए सोचें। अब तो पांच-पांच विधायक दे दिए हैं। इसके बाद भी बिजली-पानी जैसी मूलभूत जरूरतों के लिए शहरवासी परेशान हैं।
विश्वनाथ गुप्ता, बिल्डर

बाजारों में पार्किंग की व्यवस्था कर दें तो अतिक्रमण की समस्या काफी हद तक खत्म हो जाएगी। सबसे ज्यादा अतिक्रमण तो पार्किंग की वजह से होता है।
महेश मेघानी, व्यापारी नेता


(ये आए सुझाव) फोटो

नगर निगम की बंद पड़ी डिस्पेंसरियां चलाने के लिए डॉक्टरों का सहयोग लिया जाए। शैक्षिक संस्थाओं की मदद से मलिन बस्तियों में शिक्षा शिविर लगाए जाएं।
डॉ. अवध दुबे

निगम का विकेंद्रीकरण करते हुए 110 वार्ड को 11 जोनों में बांटा जाए। शिकायतों का वर्गीकरण हो। स्वास्थ्य व संवेदनशील शिकायतें चौबीस घंटे में निस्तारित हों और गंगा नदी पर रिवर फ्रंट विकसित किया जाए।
डॉ. एएस प्रसाद

गंदगी फैलाने वालों पर जुर्माना लगाया जाए। सभी विभागों में एंटी करप्शन सेल बनाई जाए जिससे भ्रष्ट लोगों की शिकायत की जा सके।
डॉ. आरती लालचंदानी


ये हुए फैसले
-एक दिन में तीन-तीन वार्डों में चार से पांच हजार सफाईकर्मी लगाकर सफाई कराएंगे।
-फूलबाग और परेड रामलीला मैदान में अंडरग्राउंड पार्किंग के लिए प्रस्ताव बनाएंगे।
-रिबोर के बजाए नए हैंडपंप लगाने के लिए शासन से बजट मांगेंगे।
-अतिक्रमण अभियान में हटाए गए ठेलेवालों के लिए जोन व वार्ड में वैकल्पिक व्यवस्था होगी।
-हैंडपंप की नंबरिंग 11,000 तक पहुंच चुकी है। बाकी की एक सप्ताह में होगी।
-गंदगी फैलाने वालों से सख्ती से जुर्माना वसूलने की व्यवस्था की जाएगी।

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