ट्रेन में ‘डंडा-रोटी’ गैंग की गुंडागर्दी

Kanpur Updated Fri, 18 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। डबल रोटी तो आपने खूब सुनी होगी। आज आपको बता रहे हैं ‘डंडा-रोटी’ के बारे में। यह कोई विशेष तरीके की रोटी नहीं है बल्कि खिलाने की एक विधि है। यानी या तो रोटी खाओ या डंडा। ट्रेन में ‘डंडा-रोटी’ खिलाने वाले दबंगों का यह अनोखा मामला सामने आया है। मामला यह है कि जनरल कोच में लाठी-डंडे के बल पर यह गैंग यात्रियों को जबरन भोजन देता है। 100 रुपया थाली लो नहीं तो डंडा मुफ्त। जीआरपी, आरपीएफ और रेलवे स्टाफ से सेटिंग के कारण यह खुल्लमखुल्ला गुंडई तीन महीने से चल रही थी। बुधवार रात दिल्ली से बिहार जाने वाली 12566 बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस के सेंट्रल पहुंचने पर यात्रियों से मारपीट कर रहे इस गैंग के 4 बदमाशों को पकड़ा गया तो इसका खुलासा हुआ। चारों बदमाशों को जेल भेज दिया गया है।
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बुधवार रात टूंडला के पास 12566 बिहार संपर्क क्रांति एक्सप्रेस में गार्ड कोच से जुड़े जनरल कोच में यह गैंग गुंडई कर रहा था। सीवान बिहार की सावित्री देवी और उनके बेटे लवानिया बाबू ने 100 रुपये प्रति थाली लेने से मना कर दिया तो लठैतों ने उन्हें पीट दिया। इससे लवानिया बाबू बेहोश हो गया तो कोच में भगदड़ मच गई। बवाल होने पर टूंडला कंट्रोल से जीआरपी को मैसेज दिया गया। आधी रात के बाद ट्रेन सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफार्म नंबर-8 पर पहुंची तो जीआरपी प्रभारी सीपी सिंह, आरपीएफ के कंपनी कमांडर संजय पांडे, सभाशंकर द्विवेदी के नेतृत्व में फोर्स ने ट्रेन की घेराबंदी कर ली। गैंग के सदस्यों छपरा निवासी बिट्टू, दानापुर निवासी धीरज, छपरा निवासी सलीम और सद्दाम को दबोच लिया गया। सद्दाम ने कबूला कि आरपीएफ, जीआरपी और रेलवे स्टाफ की जेब गर्म करके जनरल कोच के यात्रियों को जबरन भोजन देते थे। आरपीएफ ने चारों को रेलवे मजिस्ट्रट के सामने पेश किया। वहां से चारों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया। कंपनी कमांडर ने मामले की जांच दारोगा अनीता को सौंपी है।
दिल्ली और दरभंगा स्टेशन पर सेटिंग
कानपुर। बिहार संपर्क क्रांति में दबोचे गए गैंग के सरगना सद्दाम ने कबूला कि दिल्ली और ट्रेन के आखिरी स्टेशन दरभंगा स्टेशनों के आरपीएफ, जीआरपी स्टाफ को चौथ देकर खाना लेकर चढ़ते थे। दिल्ली जाने में कानपुर के पहले और दिल्ली से आने में कानपुर तक भोजन के नाम पर 100-100 रुपए वसूलते थे। जनरल कोच में पेंट्रीकार की कनेक्विटी नहीं होती है इसलिए कभी-कभार 250-300 तक थाली बेचते थे।


2 लाख महीना कारोबार
कानपुर। डंडा रोटी गैंग का कारोबार 2 से 2.5 लाख रुपए महीने का था। इसमें 40 हजार रुपए चौथ थी। बचे पैसे में सरगना 50 हजार रुपए निकाल कर बाकी धन सदस्यों में बराबर बांटता था। इसका खुलासा पूछताछ में हुआ है।
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