बहते शव, सड़ते फूल और रोतीं गंगा मां

Kanpur Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
कानपुर। गोमुख से हरिद्वार तक तो गंगा का पानी साफ है लेकिन इसके बाद हर कदम पर गंदगी है। कहीं फैक्ट्रियों की, कहीं श्मशान की तो कहीं सीवेज की। फर्रुखाबाद से कानपुर के बीच तो जगह-जगह पानी काला है। कन्नौज से कानपुर तक 50 अधजले शव पानी में उतराते मिले। सड़े फूल, पालीथिन तैर रहे थे। भारत-तिब्बत सीमा पुलिस बल (आईटीबीपी) के रिवर राफ्टिंग अभियान दल ने रविवार को यहां गंगा की दुर्दशा बताई। दल के लीडर आईटीबीपी के डीआईजी एसएस मिश्रा ने ‘अमर उजाला’ को बताया कि श्मशान घाटों को दूर करना, सीवेज और इंड्रस्ट्री वेस्ट को गिरने से रोके बिना गंगा को निर्मल करना असंभव है।
आईटीबीपी की स्थापना के 50 वर्ष पूरे होने पर डीआईजी समेत 40 जवानों का रिवर राफ्टिंग अभियान दल 23 अप्रैल से गंगा नदी का भ्रमण कर रहा है। गोमुख से गंगासागर तक 2525 किलोमीटर की यात्रा पर निकला यह दल नदी एवं सड़क मार्ग से हरिद्वार, फर्रुखाबाद, कन्नौज होता हुआ रविवार दोपहर बाद गंगा बैराज आया। 850 किलोमीटर की दूरी तय कर यहां आए इस दल का स्वागत 32 वीं वाहिनी के कुंदन प्रसाद, उपसेनानी प्रदीप नेगी, सुनील आदि ने स्वागत किया।
टीम के लीडर डीआईजी एसएस मिश्रा ने बताया कि गोमुख से हरिद्वार तक तो पानी साफ था पर इसके आगे गंदगी शुरू हो गई। बिजनौर में फैक्ट्रियों के डिस्चार्ज के कारण पानी गंदा होना शुरू हो गया था। फर्रुखाबाद के पास रामगंगा के काले पानी और काली नदी की वजह से पानी काला-भूरा नजर आने लगा। फर्रुखाबाद से कन्नौज तक गंदगी के साथ ही 25 - 26 अधजले शव गंगा में उतराते नजर आए जबकि कन्नौज से कानपुर के बीच 50 से ज्यादा शव नजर आए। इस दल में डिप्टी लीडर कमांडेंट तरुण कुमार, सुभाष घोष, निखिल कुमार, निशांत सिंह, रोशन अशवाल, मोहम्मद अली, सतीश कुमार, संतोष सिंह, अमलेश ब्रम्हा, अशोक कुमार, केवल सिंह, देवमन, चिनमन, अशीष सिंह, शिवराम मंडल, शिवा, विशाल, विक्रम सिंह, शंकर लाल आदि शामिल हैं।


सबसे ज्यादा प्रदूषण श्मशान घाटों से
सबसे ज्यादा प्रदूषण श्मशान घाटों का है। लोग शवों को अधजला ही गंगा में बहा देते हैं। इससे गंगा और प्रदूषित हो रही हैं। श्मशान घाट गंगा से दूर होने चाहिए। फैक्ट्रियों का केमिकल व शहरों की गंदगी गंगा में बहाने से रोकनी चाहिए। सरकारी व निजी स्तर पर सभी चाहते हैं कि गंगा साफ-सुथरी रहें। सरकार इन शहरों में ट्रीटमेंट प्लांट लगाए, ताकि साफ पानी ही गंगा नदी तक पहुंचे।

दल का उद्देश्य
गंगा में बढ़ते प्रदूषण के बारे में जनचेतना बढ़ाना और इस नदी को निर्मल-अविरल बनाना है।

बैराज में लिए पानी के नमूने
कानपुर। आईटीबीपी के दल ने गंगा बैराज पर गंगा जल केनमूने लिए। दल के लीडर ने बताया कि
प्रत्येक 50 किलोमीटर पर गंगा जल के नमूने लिए जा रहे हैं। इसके साथ ही बीच में पड़ने वाले शहरों की शुरुआत और एंडप्वाइंट पर भी नमूने लिए जा रहे हैं। इन नमूनों की जांच से असलियत पता चलेगी।

नहीं पहुंचे स्थानीय अफसर
कानपुर। निर्मल एवं अविरल गंगा का ढिंढोरा पीटने वाले जिला प्रशासन और नगर निगम के अफसर आटीबीपी के दल का स्वागत करने तक नहीं पहुंचे। दल के लीडर स्थानीय गाइड के लिए परेशान रहे, पर उन्हें इस संबंध में सहयोग करने वाला कोई नहीं था।

बैराज पर समारोह आज
कानपुर। सोमवार शाम गंगा बैराज पर इस दल का स्वागत समारोह होगा। इसमें गंगा को प्रदूषण रहित बनाने के लिए हुई निबंध प्रतियोगिता के विजेता बच्चों को भी पुरस्कृत किया जाएगा।

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