मंत्री जी के आदेश कैसे होंगे पूरे

Kanpur Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
कानपुर। नई सरकार है, नए मंत्री हैं, नए अफसर हैं लेकिन आदेश वही पुराने। रेशम एवं वस्त्र उद्योग मंत्री शिव कुमार बेरिया ने सरकारी अस्पतालों से नदारद रहने वाले डॉक्टरों को जेल भेजने को कहा है। निजी प्रैक्टिस करने वाले सरकारी डॉक्टरों के खिलाफ अभियान चलाने के निर्देश दिए हैं। टेंपो अराजकता भी रोकने को कहा है पर ये होगा कैसे? पहले दर्जनों बार ऐसे आदेश दिए जा चुके हैं पर हुआ कुछ नहीं। मंत्री जी ने अल्टीमेटम दिया है, इसका असर देखने के लिए सभी बेताब हैं।
गुरुवार को सर्किट हाउस में जिले के विकास कार्यों की समीक्षा के दौरान शिव कुमार बेरिया ने कहा कि जिले के अस्पताल कंपाउंडरों के भरोसे नहीं छोड़े जा सकते हैं। कमिश्नर, डीएम, अपर निदेशक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण छापेमारी करें। जो डाक्टर नदारद मिले, उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई कराकर जेल भेजने की व्यवस्था करें। सपा सरकार में चिकित्सा व्यवस्था, सुविधा में हीलाहवाली बर्दाश्त नहीं की जाएगी। समीक्षा बैठक में कमिश्नर मुकुल सिंघल, डीएम एमपी अग्रवाल, आईजी पीयूष आनंद, डीआईजी अमिताभ यश की मौजूदगी में टेंपो अराजकता का मामला भी उठा। मंत्री ने कहा कि घनी आबादी वाले क्षेत्रों से टेंपो हटवाने की व्यवस्था सुनिश्चित कराई जानी चाहिए। छोटी बसें चलवाई जाएं, जिससे यात्रियों को सुविधा मिले और अराजकता न पैदा हो सके। कहा कि बारिश से पहले 31 मई तक सभी सड़कें बनाई जाएं। जहां खुदाई हुई है, वहां की सड़कें जल्द बनवाएं। कानून-व्यवस्था की समीक्षा करते हुए कहा कि चेन स्नेचिंग की घटनाएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। ज्यादातर चेन स्नेचर युवा हैं, जो अपनी जरूरत पूरी करने को लूटपाट करने लगते हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई जरूरी है। यदि स्कूल, कालेज टाइम में होटल, रेस्टोरेंट पर छापेमारी की जाए तो ऐसी घटनाओं पर लगाम लगाई जा सकती है। कैबिनेट मंत्री ने कहा कि होटल, रेस्टोरेंट से पकड़े जाने वाले युवाओं को उनके माता-पिता या अभिभावक के सामने चेतावनी देकर छोड़ा जाए। इससे स्नेचिंग की घटनाएं रुकेंगी। अपराध कम हो जाएंगे।



अस्पतालों का हाल भी देख लीजिए मंत्री जी

(फोटो वेद पैथोलॉजी वाला पर्चा)

भरती हैलट में, जांचें बाहर से
कानपुर। हैलट में डाक्टर मरीजों को दवाईयों और जांचों के नाम पर लूट रहे हैं। वैसे तो पैथोलोजिकल जांचों के लिए मेडिकल कालेज के पास करोड़ों रुपये के उपकरणों से सुसज्जित अपनी तीन पैथोलॉजी हैं। इसके बाद भी भरती मरीजों की जांचें बाहर की पैथोलोजियों से कराई जा रही है। माइक्रोबायलोजी, पैथोलॉजी विभाग-ब्लड बैंक और हैलट ओपीडी की पैथोलॉजी के गेट पर 24 घंटे जांचों की सुविधा का बोर्ड लगा है। पर कमीशन के चक्कर में डाक्टर निजी पैथोलोजियों के एजेंटों को वार्डों में बुलाकर रोगियों का ब्लड सैंपल दिलाते है। सादे परचे पर इनका नाम लिख दिया जाता है। निजी पैथोलॉजी में जांच के लिए दोगुना पैसा खर्च करना पड़ता है। पिछले दिनों हैलट के महिला वार्ड में भर्ती सुमन देवी के बेटे आमोद कुमार ने बताया कि जांचें डाक्टर ने वेद पैथोलॉजी से करवायी। डाक्टर ने एक पर्चे पर बाकायदा दस्तखत करके दिया था।


(सिंगल फोटोगेट पर दलाल)
गेट से कमरों तक दलाल राज
हैलट ओपीडी में सरेआम रोगियों के साथ ठगी हो रही है। गेट से ही दलाल रोगियों के पीछे लग रहे हैं। कमीशन के चक्कर में डॉक्टर रोगी को परचे के साथ सादी परची देकर मेडिकल स्टोरों पर भेजते हैं। अस्पताल गेट के पास ही मेडिकल स्टोरों और पैथालाजी वालों के कर्मचारी मरीजों को सस्ते का लालच देकर फांसने में लगे रहते हैं। डाक्टरों से इनकी सेटिंग रहती है और डाक्टरों को कमीशन देते हैं। डाक्टर जांच आदि के लिए बाकायदा पैथोलोजियों के नाम बताकर मरीजों को बाहर भेजते हैं।


फोटो
जच्चा- बच्चा अस्पताल में पंखे नहीं
कानपुर। जीटी रोड स्थित अपर इंडिया शुगर एक्सचेंज (जच्चा-बच्चा) अस्पताल में पंखें तक नहीं है। मुख्य चिकित्सा अधीक्षक कार्यालय के सामने वाले 26 बेडों के वार्ड में केवल तीन पंखे लगे हैं। उमस से जच्चा- बच्चा दोनों बेहाल हैं। कई मरीज घर से पंखा लाकर यहां लगाए हैं। ऐसी गर्मी में नवजात शिशु और प्रसव पीड़ा से कराहती जच्चा की हालत क्या होती होगी, अंदाजा लगाया जा सकता है।


अस्पताल से भगाया, सड़क पर प्रसव
भीतरगांव (घाटमपुर)। प्रसव पीड़ा से तड़प रही ग्राम जसरा निवासी रमेश कुरील की पुत्री पिंकी को बरईगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में भर्ती नहीं किया गया। डाक्टर न होने की बात कहकर कर्मचारियों ने उसे लौटा दिया। गरीब पिता गिड़गिड़ाता रहा, बेटी की जान की दुहाई देता रहा लेकिन किसी को तरस नहीं आया। मजबूरन पिता बैलगाड़ी से गर्भवती बेटी को लेकर गांव लौटने लगा तो रास्ते में ही प्रसव हो गया। बाद में भीतरगांव सीएचसी की एंबुलेंस से उसे अस्पताल लाया गया। पता चला कि चार महीने से बरईगढ़ स्वास्थ्य केंद्र में डाक्टर की तैनाती ही नहीं है।




निजी प्रैक्टिस न करनेे सबूत दें डाक्टर: सीएमओ
कानपुर। प्रांतीय चिकित्सा संवर्ग के जिले में तैनात चिकित्सकों को यह सबूत देना होगा कि वे प्राइवेट प्रैक्टिस नहीं करते हैं। इसके बाद जोन प्रभारी सर्टिफिकेट जारी करेंगे। मुख्य चिकित्साधिकारी डॉ रामायण प्रसाद यादव ने जिले के 10 ब्लाक के प्रभारी अधिकारियों को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। प्रभारी अपने ब्लाक में तैनात डाक्टरों के संबंध में जांच करेंगे। इसके बाद हर चिकित्सक की अलग-अलग रिपोर्ट बनाएंगे। डॉ यादव ने बताया कि इसी रिपोर्ट के आधार पर प्रभारयिों से डाक्टरों के संबंध में सर्टिफिकेट जारी करने के लिए कहा जाएगा। उन्होंने बताया कि जिन पर निजी प्रैक्टिस करने का आरोप लगाया गया है, उनकी जांच कराई जा रही है। सबूत पाए जाएंगे तो सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके साथ ही कॉल सेंटर के माध्यम से पीएचसी, सीएचसी तथा विभाग के अन्य अधिकारी अपनी दिक्कतें महानिदेशालय को बता सकेंगे।

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