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पनीर हरा-हरा, पौष्टिकता से भरा

Kanpur Updated Fri, 04 May 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। गरीबों के लिए अब सस्ता हरा पनीर तैयार है। चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय (सीएसए) के बायो केमिस्ट्री विभाग के हेड व एसोसिएट प्रोफेसर डा. मुकेश मोहन ने इसे बथुआ से बनाया है। इसे बनाने की विधि बहुत आसान है। डा. मुकेश का कहना है कि प्रोटीन, आयरन और विटामिन ए से भरपूर यह हरा पनीर गरीबों, किसानों और प्रोटीन, आयरन की कमी से जूझ रहे शहरियों के लिए उपयोगी है। डा. मुकेश बथुआ के लाभ और हानि पर और शोध कर रहे हैं।
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ऐसे बनता है हरा पनीर
बथुआ को पानी से अच्छी तरह धोकर मिट्टी आदि साफ कर लें। फिर इसे सिल पर पीस कर लुगदी बना लें। पीसने के समय थोड़ा पानी मिला सकते हैं। अब इस लुगदी को एक पतले कपड़े में बांध कर इसका रस निचोड़ लें। इस रस को किसी भगौने या कढ़ाई में भरकर उबाल लें। उबलने के बाद इस रस से पानी और बथुआ का थक्केनुमा पदार्थ अलग-अलग हो जाएगा। इस थक्के को किसी कपड़े या बर्तन में रखें और ठंडा होने के बाद प्रयोग करें। इसे सख्त करने के लिए फ्रिज में भी रख सकते हैं। डा. मुकेश मोहन के अनुसार 1 किलो बथुआ से 100 ग्राम तक हरा पनीर तैयार हो सकता है।



दूसरे पनीर से अच्छा है बथुआ पनीर
डा. मुकेश के अनुसार हरे पनीर को लैब में टेस्ट किया गया है। इसमें गाय व भैंस के दूध से बने पनीर के मुकाबले अधिक पौष्टिक तत्व हैं और यह स्वास्थ्य के लिए भी अपेक्षाकृत अधिक फायदेमंद है। उन्होंने बताया कि गाय व भैंस के दूध से बने पनीर में हृदय को नुकसान पहुंचाने वाली वसा पायी जाती है जबकि हरे पनीर में पाया जाने वाला वसा नुकसानदेह नहीं होता। इसके अलावा इसमें आंखों के लिए फायदेमंद विटामिन ए भी प्रचुर मात्रा में है।


हरा पनीर
प्रोटीन- 45-50 फीसदी
विटामिन ए, कैल्शियम, आयरन
अनसेचुरेटेड फैट (हृदय के लिए अच्छा)


सफेद पनीर-
प्रोटीन-40-42 फीसदी
दूध की गुणवत्ता के अनुसार कैल्शियम और विटामिन्स
सेचुरेटेड फैट (हृदय के लिए नुकसानदेह)


बथुआ प्लांट रूप में है और पनीर एनीमल उत्पाद रूप में, दोनों की तुलना ठीक नहीं है पर बथुआ प्रोटीन और आयरन का बड़ा स्रोत है। हरे पनीर से उन लोगों को भी फायदा मिलेगा जो हृदय रोग व अन्य बीमारियों के कारण दूध से बना पनीर नहीं खा सकते हैं। बथुआ पनीर से उनके शरीर में प्रोटीन की कमी पूरी हो सकती है। पानी के तत्व से भरपूर सब्जी होने के कारण इसके वसा तत्व शरीर को नुकसान नहीं करते हैं।
डा. संजीव कुमार सचान-शाकभाजी वैज्ञानिक, सीएसए

बथुआ मिनरल्स और आयरन की कमी पूरी करने वाला भी अच्छा और सस्ता स्रोत है। बच्चे आम तौर पर बथुआ नहीं खाते हैं। इसलिए इसकी महक दूर करने के लिए इसके पनीर में उबले आलू के चिप्स, फ्रूट और दूसरी चीजें मिला कर बच्चों को स्नैक्स रूप में खिलाया जा सकता है। इससे बच्चों में इन तत्वों की कमी आसानी से पूरी की जा सकती है। गर्भवती महिलाएं भी इसे खा सकती हैं।
डा. शुचि श्रीवास्तव-डाइटीशियन

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