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सातवें दिन हुआ ब्रिटिश नागरिक का पोस्टमार्टम

Kanpur Updated Wed, 05 Nov 2014 05:30 AM IST
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कानपुर। बेटे की ओर से मित्र गेरार्ड रफेल को अधिकृत करने और दूतावास से एनओसी मिलने पर तीन डॉक्टरों की टीम ने मंगलवार को ब्रिटिश नागरिक इवेन मेनवार्रिंग (56) के शव का पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई गई। पोस्टमार्टम के बाद शव का अंतिम संस्कार भैरोघाट के विद्युत शवदाह गृह में कराया गया।
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हादसे में मौत का शिकार हुए इवेन मेनवार्रिंग के मित्र गेरार्ड रफेल सोमवार रात ब्रिटिश दूतावास से एनओसी लेकर जीआरपी थाने पहुंचे। मंगलवार सुबह जीआरपी प्रभारी त्रिपुरारी पांडेय गेरार्ड के साथ डीएम डॉ. रोशन जैकब के पास पहुंचे। वहां से डॉक्टरों के पैनल से पोस्टमार्टम कराए जाने का आदेश लेकर सीएमओ से मिले। पोस्टमार्टम हाउस में डिप्टी सीएमओ डॉ. आरपी तिवारी, डॉ. आरएन अधौलिया और डॉ. एनसी त्रिपाठी के पैनल ने इवेन के शव का पोस्टमार्टम किया। ब्रिटिश नागरिक के सिर में पांच चोट सहित शरीर में कुल 12 चोटें पाई गईं। बायां पैर घुटने से नीचे कट गया था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर में गंभीर चोटों और अधिक रक्तस्राव को मौत की वजह माना गया।
ब्रिटिश नागरिक का शव 29 अक्तूबर को संदिग्ध हालात में चंदारी रेलवे स्टेशन के पास ट्रैक पर मिला था। मित्र गेरार्ड रफेल ने ट्रेन के दिल्ली पहुंचने पर जीआरपी को इवेन के गुम होने की सूचना दी थी। इससे उसकी शिनाख्त हो गई लेकिन परिजनों के इंतजार में पोस्टमार्टम नहीं कराया गया। शासन से मिले निर्देश के बाद शव को उर्सला के डीप फ्रीजर में रखवा दिया गया। जीआरपी के दो कांस्टेबल और कोतवाली पुलिस के एक कांस्टेबल और एक होमगार्ड शव की सुरक्षा में लगाए गए थे।






अस्थि विसर्जन में आए थे भारत
पोस्टमार्टम हाउस आए गेरार्ड रफेल ने बताया कि उनकी पत्नी चित्रा हिंदू थीं और बिहार से ताल्लुक रखती थीं। चित्रा और इवेन अच्छे दोस्त थे। चित्रा की मौत के बाद उसकी अस्थियां विसर्जन के लिए भारत ले आए थे। साथ में इवेन भी आए थे। अस्थि विसर्जन करके वे लोग ऋषिकेश के बाद गया, वाराणसी होते हुए ट्रेन से दिल्ली लौट रहे थे। इवेन मेनवार्रिंग, मित्र मिस्टर टिन और मिस्टर मेड भी थे। इवेन रात में बाथरूम जाने के लिए निकले। सुबह जब वे लोग दिल्ली पहुंचे तो इवेन नहीं दिखे। तब जीआरपी थाने में इवेन के गुम होने की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। वहां से पता चला कि कानपुर के पास ट्रेन से गिर जाने से इवेन की मौत हो गई। इवेन के बेटे और एंबेसी को सूचना दी। एनओसी मिलने में वक्त लग गया। गेरार्ड ने बताया कि इवेन का 32 वर्षीय बेटा कैमरून आस्ट्रेलिया में रहता है। कैमरून के कहने पर ही उन्होंने हिंदू रीति रिवाज से इवेन का कानपुर में अंतिम संस्कार करने का फैसला लिया। अंतिम संस्कार के बाद गेरार्ड दोस्त इवेन की अस्थियां लेकर चले गए।




पुलिस के दोहरे नजरिए पर पाठकों ने जताया एतराज
पब्लिक कॉल
हादसे में मौत का शिकार हुए इवेन मेनवार्रिंग के मित्र गेरार्ड रफेल ने पुलिस-प्रशासन के रवैए की तारीफ की, यह अच्छी बात है। हम सबको भी करनी चाहिए। मगर देशी-विदेशी शवों को लेकर अपनाए जा रहे दोहरे मापदंड को क्या उचित कहा जा सकता है? इवेन के शव के साथ जो बरताव हुआ, वही बरताव क्या हर भारतीय के शव के साथ नहीं किया जा सकता? अमर उजाला के चार नवंबर के अंक में लाशों की ‘विदेश’ नीति शीर्षक से खबर छपने के बाद पाठकों ने ऐसी ही प्रतिक्रियाएं दीं। सभी ने एक सुर में एक ही बात कही कि कम से कम शवों के साथ दोहरा रवैया नहीं अपना चाहिए। पेश हैं फोन पर मिलीं कुछ प्रतिक्रियाएं :


अमर उजाला ने अच्छा मुद्दा उठाया है। सरकार को इस ओर ध्यान देना चाहिए। कम से कम देशी-विदेशी के आधार पर शव के साथ तो कोई भेदभाव नहीं होना चाहिए।
- राजेंद्र वर्मा, किदवई नगर
-
पुलिस की यही कहानी है, वह स्तर देखकर काम करती है। विदेशी और देश के किसी आम नागरिक के शव के साथ बर्ताव भी इसी आधार पर होता है
- रोहित अवस्थी, गुजैनी

सभी शव के साथ एक जैसा बर्ताव होना चाहिए। बड़ा ही दुख होता है जब अपने देश में लाशों के साथ भी खराब बर्ताव होता है।
- अवधेश सिंह यादव, पीएसआईटी

कितनी बार सुनने में आता है चूहे, नेवले लाशों की दुर्गति कर देते हैं। यह बेहद अनुचित है। लाश चाहे जिसकी हो सम्मान तो होना ही चाहिए। पर्याप्त डीप फ्रीजर की व्यवस्था होनी चाहिए और इनमें लाशों को ढंग से रखा जाना चाहिए।
- अनुराग देव पाठक, पनकी गंगागंज

पुलिस को पता था कि विदेशी के शव के साथ लापरवाही पर उन पर कार्रवाई हो सकती है यही वजह है इवेन के शव को वीआईपी ट्रीटमेंट दिया गया।
- रामजी शुक्ल, नेता भाजयुमो, घाटमपुर

मुद्दा अच्छा है इस पर खुलकर बहस होनी चाहिए। शासन से हर लावारिस शव के अंतिम संस्कार के लिए रकम मिलती है लेकिन पुलिस उन्हें संस्था के हवाले कर देती है।
- आशुतोष त्रिपाठी, भीतरगांव बिरसिंहपुर

अतिथि देवो भव तो ठीक है, पर अपनों के साथ भी तो ऐसा ही बर्ताव किया जा सकता है, जैसा विदेशी शव के साथ हुआ।
- डॉ. ममता सिंह चौहान, प्रवक्ता

अभी तक हम गुलामी की मानसिकता से निकल नहीं पाए हैं। यहीं वजह है किसी विदेशी को देखकर हम उसे अतिरिक्त तवज्जो देते हैं।

- जेबी मेहता एडवोकेट निवासी सिविल लाइंस

बस एक सवाल और...
ब्रिटिश एंबेसी से एनओसी मिलने के बाद सब कुछ इतनी तेजी से हुआ कि लगा ही नहीं हम भारत में है। इस बारे में पूछे जाने पर जीआरपी प्रभारी त्रिपुरारी पांडेय ने कहा कि देश की छवि विदेशों में धूमिल न हो इसलिए इवेन के शव को सुरक्षित तरीके से रखवाने के साथ ही यह सारी व्यवस्था की गई थी। जब उनसे पूछा गया कि जीआरपी क्षेत्र में मिलने वाली अन्य लाशों के साथ यह रवैया क्यों नहीं अपनाया जाता है तो उन्होंने कुछ भी कहने से इनकार कर दिया। यहां एक सवाल तो बनता ही है कि विदेश में छवि धूमिल ना हो इसके नाम पर विदेशियों को वीआईपी ट्रीटमेंट और देश के लोगों के साथ दुर्व्यवहार यह रवैया आखिर कितना सही है?
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