निशाना कांग्रेस पर और निगाह दिल्ली की गद्दी पर

Kanpur Updated Tue, 22 Oct 2013 05:41 AM IST
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शैलेश अवस्थी
कानपुर। भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी का भाषण बिल्कुल संतुलित रहा। कभी हिंदुत्व का एजेंडा मंत्र की तरह जपने वाले मोदी के बोल विकास के मुद्दे पर केंद्रित रहे। हां, केंद्र सरकार, कांग्रेस, सपा और बसपा पर जहर बुझे तीर जरूर छोड़े। बोले-मेरा धर्म-राष्ट्र, मेरा धर्मग्रंथ-भारत का संविधान, मेरी शक्ति-सवा सौ करोड़ जनता और मेरा कार्य-सबका साथ-सबका विकास। मोदी ने अटल बिहारी वाजपेयी की खूब तारीफ की पर आडवाणी का जिक्र तक नहीं किया।
पूरी आस्तीन का सफेद कुर्ता पहने मोदी इंदिरा नगर बुद्धा पार्क के पास अपने सामने जनसमूह देख पूरे मूड में आ गए। कभी कानपुर को गुजरात से जोड़कर तो कभी बंद मिलों की चर्चा कर कनपुरियों के दिल को छूने की कोशिश की। बोले-गुजरात का कोई ऐसा जिला नहीं, जहां यूपी के लोग न हों। क्या करें? यूपी में काम मिलता नहीं तो वहां पहुंच गए। बताइये, किसी को अपना घर छोड़ कर जाना अच्छा लगता है क्या? यहां बच्चा गुजरात के लिए ट्रेन में बैठता है तो मां कहती है-बेटा सतर्क रहना। जब यूपी की सीमा खत्म हो जाती है तो कहती है अब मैं चैन से सोऊंगी, क्योंकि गुजरात में तो सब सुरक्षित हैं। कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल का नाम लिए बगैर मोदी ने चुटीले अंदाज में कह डाला कि दिल्ली में कोयला घोटाले की राख कानपुर तक आई है। आगे बोले-इस धरती से ही स्वतंत्रता संग्राम का बिगुल बजा और अंग्रेज भाग गए। आज फिर दूसरी आजादी की लड़ाई का बिगुल यहीं से बजा है, केंद्र सरकार का जाना तय है।
मोदी ने राहुल गांधी को शहजादे बताते हुए चुटकी ली-गरीबों के घर कैमरों के साथ जाते हैं। फोटो खिंचवाया और काम खत्म। उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए दंगों के लिए सपा सरकार को कटघरे में खड़ा किया। प्रधानमंत्री पर व्यंग्य बाण छोड़ते हुए कहा कि पड़ोसी देश हमारे सैनिकों के सिर काटता है और प्रधानमंत्री उन्हें चिकन-बिरियानी खिलाते हैं। कांग्रेस को संकट में सिर्फ वोट बैंक का मंत्र सूझता है। बंटवारा करवा कर वोट हथियाने की कोशिश करती है। साथ ही मोदी ने यह भी बताया कि उनका मंत्र है हिंदू-अच्छा हिंदू, मुसलमान-अच्छा मुसलमान, ईसाई-अच्छा ईसाई और सिख-अच्छा सिख बने।
दरअसल भाजपा समझ गई है कि केंद्र की सत्ता चाहिये तो सिर्फ हिंदुत्व के एजेंडे से काम नहीं चलेगा। मोदी को प्रधानमंत्री की गद्दी चाहिये तो पहले अटल बिहारी वाजपेयी वाजपेयी बनना पड़ेगा। शायद यही कारण है कि मोदी ने न तो मंदिर मुद्दे की बात की और न ही जय श्रीराम का उद्घोष किया। अलबत्ता भाजपाई लगातार जय श्रीराम का उद्घोष करते रहे। मोदी ने राजनाथ सिंह और कल्याण सिंह को प्रणाम किया पर भाषण में कहीं भी आडवाणी का जिक्र तक नहीं किया। यदि रैली में जुटी भीड़ को वोटों का पैमाना मान लिया जाए तो कम से कम कानपुर शहर और अकबरपुर लोकसभा सीट बरकरार लिए कांग्रेस को कोई नई रणनीति पर विचार करना होगा। यूपी में भी माहौल बनेगा। इससे भाजपा फिलहाल खुश हो सकती है।
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