21 अरब के रियल एस्टेट कारोबार पर ताला

Kanpur Updated Mon, 28 Jan 2013 05:30 AM IST
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विवेक त्रिपाठी
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कानपुर। अवैध निर्माण के खिलाफ केडीए के अभियान का रियल एस्टेट कारोबार पर तगड़ा असर हुआ है। अवैध इमारतें तानने वाले कई नए बिल्डर कर्ज में डूब गए हैं तो भवन निर्माण सामग्री और ठेकेदारों के अलावा प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष रूप से इस कारोबार से जुड़े कई लोगों की दुकानों पर ताले लटक गए है। आर्किटेक्ट और बिल्डरों ने माना है केडीए के अभियान से 21 अरब रुपए का कारोबार प्रभावित हुआ है।
शहर में 200 से 800 वर्ग मीटर भूखंडों पर 700 से अधिक मिनी अपार्टमेंट निर्माणाधीन हैं। केडीए अफसरों के गठजोड़ से बिल्डर मनमाने तरीके से निर्माण कार्य करा रहे थे। ‘अमर उजाला’ ने अवैध निर्माण के खिलाफ अभियान चलाया जिसके बाद केडीए ने करीब 21 अरब रुपए के इस धंधे पर ताला लगा दिया। आर्किटेक्ट राजीव अग्रवाल बताते हैं 200 से लेकर 356, 500 और 800 वर्ग गज भूखंड पर सबसे ज्यादा अपार्टमेंट बन रहे हैं। फर्क सिर्फ जमीन का होता है। अगर एक अपार्टमेंट स्वरूपनगर में बन रहा है और दूसरा चकेरी में तो इसकी कीमत में जमीन-आसमान का अंतर होता है। कांस्ट्रक्शन कॉस्ट लगभग समान होती है। एक बिल्डर बताते हैं 200 वर्ग मीटर भूखंड पर तीन से चार मंजिल का एक अपार्टमेंट एक से डेढ़ करोड़ रुपए में और 500 वर्ग मीटर भूखंड में ढाई से तीन करोड़ रुपए में तैयार होता है। इससे ऊपर के भूखंड में अपार्टमेंट बनाने का बजट चार से पांच करोड़ रुपए है। बिल्डर के मुताबिक बीते दो माह में 300 के आसपास अवैध निर्माण सील किए जा चुके हैं। अगर एक अपार्टमेंट की औसत लागत तीन करोड़ रुपए मान लें तो करीब नौ अरब रुपए की लागत से तैयार हो रहे अपार्टमेंट सील हो चुके हैं और 12 अरब रुपए से अधिक का काम बंद हो गया है। सिटी बिल्डर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष वीरपाल सिंह कहते हैं सीलिंग व काम बंद होने से भवन निर्माण सामग्री विक्रेता, ठेकेदार और मजदूरों सहित तमाम लोग प्रभावित हुए हैं। गिट्टी-मौरंग-बालू-सीमेंट विक्रेताओं का धंधा ठप हो गया है। सरिया, टाइल्स, इलेक्ट्रिक फिटिंग, बाथरूम फिटिंग्स सहित फर्नीचर, इलेक्ट्रानिक्स और रोजमर्रा के अन्य घरेलू उत्पादों के बाजार पर असर पड़ा है। वीरपाल ने कहा बिल्डरों ने बैंक से लोन ले रखे हैं जिनकी किस्तें नहीं चुका पा रहे हैं। मजदूरों की स्थिति भी बद्तर हो गई है। केडीए सचिव राकेश कुमार ने कहा अवैध निर्माण शुरू करने से पहले बिल्डरों को सोचना चाहिए था। बिल्डरों ने इमारतें तानकर बेच डालीं। उन्होंने अपना पैसा सीधा कर लिया जबकि जिन्होंने फ्लैट खरीदे हैं उनके लिए मुसीबत हो गई है। सचिव ने कहा अवैध निर्माण अवैध ही रहेंगे। उन्हें किसी भी सूरत में लीगल नहीं किया जा सकता।

इनसेट
मौरंग हुई सस्ती
रियल एस्टेट कारोबार पर ताला लगने के साथ ही मौरंग के दामों में भारी कमी आ गई है। दो हफ्ते पहले तक मौरंग 42 से 45 रुपए प्रति वर्ग फुट तक बिक रही थी जो अब 22 से 23 रुपए हो गई है।

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