रेलवे ट्रैक पर दौड़ेगी बुलेट ट्रेन

Kanpur Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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कानपुर। दिल्ली से मथुरा और मथुरा से कोटा (राजस्थान)-मुंबई के बीच बुलेट ट्रेन दौड़ेंगी। इस रूट का रेलवे ट्रैक अपग्रेड किया जा रहा है। जल्द ही रूट का ट्रायल होगा। फिर 200-250 किलो मीटर प्रतिघंटा के हिसाब से ट्रेनें चलेंगी। ट्रैक अपग्रेडेशन के काम में जापान का सहयोग लिया जा रहा है। यह जानकारी आईआईटी कानपुर की एलमनाइ मीट में गुरुवार को हिस्सा लेने आए भारतीय रेलवे के सीनियर डिवीजनल इंजीनियर कोआर्डिनेशन आशुतोष ने दी। उन्होंने बताया कि पुणे-मुंबई और मुंबई-अहमदाबाद के रेलवे ट्रैक को हाईस्पीड कॉरिडोर बनाने का काम चल रहा है। यह प्रयोग सफल रहा तो चीन, जापान की तरह रेलवे ट्रैक पर तेज ट्रेने चल सकेंगी। दिल्ली से कानपुर-लखनऊ रेलवे ट्रैक को अपग्रेड करने, आटोमैटिक ब्लाक और सिग्नल सिस्टम को दुरुस्त करने का काम भी शुरू हो चुका है।
आईआईटी कानपुर की एलमनाइ मीट गुरुवार से शुरू हुई। 29 दिसंबर तक चलने वाली इस मीट का उद्घाटन निदेशक प्रो. इंद्रनील मन्ना ने किया। फिर 25 साल बाद परिवार के साथ कैंपस आने वाले आईआईटियन की मौज-मस्ती का सिलसिला शुरू हो गया। सिल्वर जुबली समारोह मनाने आए 87 आईआईटियन पुराने दोस्तों से मिलकर चहक उठे। सभी एक दूसरे से गले मिले और पुरानी यादों में खो गए। हास्टल, क्लास रूम को देखा और अपने कक्षा में बैठने का स्थान बच्चों को दिखाकर जमकर ठहाके लगाए। साथ ही कैंपस की हरियाली, लैब, लाइब्रेरी, हास्टल की बेहतरीन सुविधाओं की तारीफ की। कहा कि यह कैंपस विश्वस्तरीय है। कहा कि अब बीटेक की पढ़ाई के साथ ही एमटेक, एमएससी, पीएचडी प्रोग्राम की पढ़ाई, रिसर्च पर ज्यादा ध्यान देना होगा। तभी आईआईटी को दुनिया के टॉप के इंस्टीट्यूट की लिस्ट में शुमार हो सकेगा। आईआईटियन आलोक कुमार गुप्ता, संजय कुमार अवस्थी, प्रकाश मोहन और सचिन दानवे ने बताया कि कैंपस की खूबसूरती बढ़ गई है। 1988 बैच के पुरातन स्टूडेंट ने गुरुदक्षिणा देने का मन बनाया है। कहा है कि आईआईटी प्रशासन से चर्चा के बाद दक्षिणा तय की जाएगी। देर रात इंडियन आइडियल फेम अंकिता मिश्रा ने फिल्मी गीतों से आईआईटियन का मनोरंजन किया।

कोट::::::
1988 बैच के सिविल इंजीनियरिंग कोर्स में 6 लड़कियां पढ़ती थीं। जब वह साइकिल से क्लास अटेंड करने आती थीं तो सारे दोस्त मिलकर उनकी साइकिल चुरा लेते थे। साइकिल किसी बिल्डिंग की छत या कबाड़ रूम में रखी जाती थी, जिसके मिलने में कम से कम एक सप्ताह का समय लगता था। अब अपनी पत्नी मालिनी के साथ आया हूं, इसलिए बरबस ही पुराने दिन की शरारत याद आ गई।
पंकज गुप्ता, एक्स स्टूडेंट


25 साल बाद कैंपस में आया हूं। इसका क्षेत्रफल वही है, लेकिन सुंदरता बढ़ गई है। हास्टल अच्छे हैं। लैब, लाइब्रेरी, क्लास रूम की पढ़ाई की सुविधा इंटरनेशनल है। अब हाईटेक टेक्नोलॉजी पर काम चल रहा है, जिसपर काम करके आईआईटी के टीचर, स्टूडेंट को साख बढ़ानी चाहिए।
मंजू के. थरेजा, जीएम आरएंडडी बजाज पुणे

जेईई में बदलाव गलत
आईआईटियन ने आईआईटी जेईई में बदलाव को गलत ठहराया है। कहा है कि एंट्रेंस टेस्ट का पूरा पेपर सब्जेक्टिव कर देना चाहिए। यूएसए में सेटल मानस सक्सेना ने बताया कि उनकी कंपनी सेमी कंडक्टर बनाती है, जिसकी सप्लाई पूरी दुनिया में होती है।

कोहरे ने फंसाया
कानपुर। कोहरा, धुआं और धुंध ने आईआईटियन को बीच रास्ते में फंसा दिया। ट्रेनें लेट हुई तो कुछ आईआईटियन छह घंटे तो कुछ चार घंटे बाद कैंपस पहुंच सके। रेलवे स्टेशन से आईआईटी कैंपस तक की सड़क मार्ग की यात्रा ने भी सताया। जाम से जूझते हुए आईआईटी पहुंचना पड़ा है।

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