सीसामऊ में ट्यूटर को गोलियों से भूना

Kanpur Updated Thu, 20 Dec 2012 05:30 AM IST
कानपुर। कोचिंग संचालक मोहम्मद हारून की हत्या की तर्ज पर सीसामऊ थाना क्षेत्र में बुधवार सुबह एक ट्यूटर नरेश सक्सेना की गोली मारकर हत्या कर दी गई। मौका-ए-वारदात से 7.65 एमएम (.32 बोर) का एक खोखा व दो जिंदा कारतूस मिले हैं। हत्या की वजह अब तक साफ नहीं हो सकी है। कातिलों के बारे में भी कोई सुराग नहीं दे सका। हत्या जिस तरह से हुई, उससे वारदात में पेशेवर हत्यारों के शामिल होने का अनुमान है। एसएसपी यशस्वी यादव और एसपी पश्चिम भरत सिंह ने भी मौका मुआयना किया, मगर किसी उल्लेखनीय नतीजे पर नहीं पहुंच सके।
पुलिस के मुताबिक नरेश सक्सेना (52) सीसामऊ की अनुराग मार्केट के फर्स्ट फ्लोर स्थित फ्लैट में रहते थे। पेश से ट्यूटर सक्सेना बुधवार को कहीं गए थे, सुबह करीब साढ़े आठ बजे वापस लौटे और फ्लैट का दरवाजा खोल ही रहे थे कि अज्ञात बदमाशों ने उन्हें गोलियों का निशाना बना लिया। घटनास्थल पर जैसे संकेत मिले हैं, सक्सेना गोलियां लगने के बावजूद शायद हमलावरों का पीछा करते हुए मार्केट के मेन गेट तक पहुंचे और वहीं गिर पड़े। आसपास के लोगों से सूचना पाकर आई पुलिस नरेश को हैलट ले गई जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। पुलिस के अनुसार नरेश बच्चों को ट्यूशन पढ़ाते थे और छह साल से अनुराग मार्केट में रह रहे थे। इससे पहले वह प्रेमनगर में रहते थे। पत्नी अनीता नैनीताल के एक इंटर कालेज में पढ़ाती हैं और दस वर्षीय बेटी गौरी के साथ वहीं रहती हैं। पड़ोस के फ्लैट में रहने वाले अनिल ने बताया बहन श्वेता ने सुबह करीब साढ़े आठ बजे गोलियों की आवाज सुनी और उन्हें बताया। वह बाहर पहुंचे तो नरेश सक्सेना के फ्लैट के बाहर खून बिखरा हुआ था। सीढ़ियों से नीचे उतरे तो मेन गेट पर नरेश लहूलुहान हालत में पड़े मिले। तब तक सेकेंड फ्लोर पर रहने वाले धर्मेंद्र सहित अन्य लोग आ गए और पुलिस को सूचना दी। उन्हें हैलट ले जाया गया जहां उनकी मौत हो गई। चौकीदार अनिल ने बताया नरेश सुबह करीब सात बजे फ्लैट पर ताला लगाकर किसी काम से गए थे। लौटने पर वह फ्लैट का ताला खोल रहे थे तभी बदमाशों ने उन पर गोलियों की बौछार कर दी। माना जा रहा है ताला खोलते वक्त पीछे से पहली गोली मारी गई जो संभवत: नरेश के आर-पार हो गई। दूसरी गोली उनकी ठोड़ी पर लगी। अनिल के मुताबिक तीन-चार गोलियां चलीं। नरेश को कितनी गोलियां लगीं, यह पोस्टमार्टम के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। मार्केट के चौकीदार अनिल ने बताया नरेश बिल्डिंग के लोगों से कम संपर्क रखते थे। आसपास के लोगों के साथ भी कम उठते-बैठते थे। उनकी पत्नी व बेटी कभी-कभार आती थीं। अबकी जाड़े की छुट्टियों में दोनों आने वाले थे।

कहीं हारून के हत्यारे तो नहीं!
हारून और सक्सेना की हत्या की घटना में कई समानताएं हैं। हारून और सक्सेना दोनों ही पढ़ाई के धंधे से जुड़े थे। हारून को उस वक्त गोली मारी गई, जब वे फर्स्ट फ्लोर पर ताला खोलकर आफिस में घुसने वाले थे। इस वारदात में कुछ ऐसा ही हुआ है। अभी तक मिली सूचना के मुताबिक वारदात में इस्तेमाल हथियारों का बोर भी कमोबेश एक ही लग रहा है। हारून केस में भी हमलावर वारदात अंजाम देकर बड़ी सफाई से निकल गए थे। हारून केस में तो लोगों ने हमलावरों को देखा भी था, इस मामले में तो किसी ने उन्हें देखने की अब तक पुष्टि नहीं की।

हत्या की वजह स्पष्ट नहीं है। कितने बदमाश थे, कैसे आए थे, यह कोई नहीं बता पा रहा है। नरेश के मोबाइल फोन की कॉल डिटेल निकलवाई जा रही है।
यशस्वी यादव, एसएसपी

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