केंद्रीय सरकारी विभागों में हड़ताल से सब ठप

Kanpur Updated Thu, 13 Dec 2012 05:30 AM IST
कानपुर। 15 सूत्रीय मांगों को लेकर कन्फेडरेशन ऑफ सेंट्रल गर्वमेंट इम्प्लाइज एंड वर्कर्स के आह्वान पर बुधवार को आयोजित हड़ताल का केंद्रीय सरकारी विभागों में व्यापक असर देखने को मिला। कर्मचारी कार्य से विरत रहे, जिसके चलते अधिकारी भी फुर्सत में बैठे रहे। हड़ताल को सुनिश्चित करने के लिए एक सचल दस्ता भी बनाया गया था, जो कार्यालयों में हड़ताल का जायजा लेता रहा।
हड़ताल में प्रमुख रूप से शामिल आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ के महामंत्री अरविंद त्रिवेदी ने इस मौके पर हुई सभा में कहा कि अरसे से मांगों को लेकर आंदोलन किया जा रहा है। मगर अनसुनी के चलते हड़ताल की नौबत आई। कन्फेडरेशन के महासचिव शरद प्रकाश अग्रवाल के नेतृत्व में एक सचल दस्ता बनाया गया, जो हड़ताल में शामिल विभागों के कार्यालय में घूम-घूमकर जायजा लेता रहा। शरद प्रकाश अग्रवाल ने दावा किया कि देश केकुल 91 संगठन के सदस्यों ने इसमें हिस्सा लिया। सभी विभागों के दफ्तर नहीं खुले, जबकि सीजीएचएस में 50 फीसदी हड़ताल रही। इसमें प्रमुख रूप से विनोद बिहारी श्रीवास्तव, सुभाष मिश्रा, आरके गुप्ता, शैलेंद्र दीक्षित, डीएस सिंह, महेंद्र तिवारी, एसके सिंह, डीसी मिश्रा, केके त्रिवेदी, राघवेंद्र सिंह, सुरेश चंद्र गैरोला, शिवेंद्र श्रीवास्तव, हरी राम मौर्या, अजय तिवारी, राम औतार आदि प्रमुख रूप से शामिल रहे। उधर सेंटर ऑफ इंडियन ट्रेड यूनियन्स ने हड़ताल को सफल बताया। सीटू नेता अरविंद कुमार और भगवान मिश्र ने कहा कि यह हड़ताल जायज मुद्दों पर की गई है। केंद्र सरकार को तत्काल इन मांगों को पूरा करने की दिशा में कदम बढ़ाना चाहिए। उत्तर प्रदेशीय चतुर्थ श्रेणी राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी हड़ताल का समर्थन किया। महासंघ के प्रांतीय मंत्री बीएल गुलाबिया ने कहा कि सिंचाई विभाग में हड़ताल के समर्थन में बैठक की गई। इसमें शिव नारायण साहू, शफीकुल हसन, शिव कुमार, राम हरख, अनिल त्रिवेदी, शिवशंकर शुक्ला, प्रेम कुमार आदि प्रमुख रूप से मौजूद रहे।

ये हैं प्रमुख मांगें :-
- सातवां वेतन आयोग गठित करके केंद्रीय कर्मचारियों का वेतन एक जनवरी 2011 से संशोधित किया जाए। उसके बाद प्रत्येक पांच वर्ष में संशोधन किया जाए।
- पेंशन समेत सभी उद्देश्यों के लिए डीए को मूल वेतन में एक जनवरी 2011 से विलय किया जाए। सभी खाली पदों को भरें और नए पदों का सृजन किया जाए।
- अनुकंपा के आधार पर पांच प्रतिशत की भर्ती पर लगी रोक हटाकर रेलवे कर्मचारियों तथा दूसरे केंद्रीय कर्मचारियों के बीच अनुकंपा नियुक्ति में भेदभाव दूर किया जाए।
- सरकारी प्रतिष्ठानों में आउटसोर्सिंग, ठेकेदारी प्रथा और निजीकरण को बंद किया जाए। मूल्य वृद्धि पर रोक लगाई जाए और जन वितरण प्रणाली को मजबूत किया जाए।
- ज्वाइंट कंसलटेंटिव मशीनरी को पुन: स्थापित किया जाए। सभी मंत्रालयों और विभागों में डिपार्टमेंटल काउंसिल की बैठको को तत्काल आरंभ किया जाए।

ये यूनियनें रहीं साथ
- आयकर राजपत्रित अधिकारी संघ
- नेशनल फेडरेशन ऑफ पोस्टल इम्प्लाईज
- इनकम टैक्स इम्प्लाईज फेडरेशन
- ऑल इंडिया ऑडिट एकाउंट्स एसोसिएशन
- नेशनल फेडरेशन ऑफ एटॉमिक एनर्जी इम्प्लाईज
- ऑल इंडिया सीजीएचएस इम्प्लाईज एसोसिएशन
- ऑल इंडिया कस्टम एंड एक्साइज इम्प्लाईज एसोसिएएन (ग्रुप-डी)
- सिविल एकाउंट इम्प्लाईज एसोसिएशन
- ऑल इंडिया कैंटीन इम्प्लाईज एसोसिएशन

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