शादी कर रहे जजमान तो रखें बहुत ध्यान

Kanpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
कानपुर। ‘आजकल के भागम-भाग के युग में कंप्यूटर से कुंडली बनवाकर शादी कराने से संबंध ज्यादा नहीं चल पा रहे। वास्तव में कंप्यूटर की कुंडली ज्योतिष शास्त्र का खिलवाड़ और अपमान है। ये कुंडली कभी सत्य नहीं हो सकती क्योंकि भारतीय ज्योतिष शास्त्र में जो प्राचीन करोड़ों सूत्र निहित हैं वो कभी किसी साफ्टवेयर में समाहित ही नहीं हो पाते। कंप्यूटर की कुंडली आधी-अधूरी जानकारी और गणना से बनती है जो जातक के सफल वैवाहिक संबंध में संदेह पैदा करती है’। उक्त बातें काशी-उज्जैन के प्रमुख पंचागों के संपादक और भारतीय ज्योतिष विद्यापीठ के अध्यक्ष डा.अतुल टंडन ने ‘विवाह संबंधों में बाधाएं एवं उनका निवारण’ विषय पर आयोजित गोष्ठी में कही।
दिव्य ज्योतिष शोध संस्थान के तत्वावधान में मर्चेंट चैंबर हाल में आयोजित गोष्ठी में उन्होंने बताया कि कि वर-कन्या की जन्मपत्रिकाओं के सूक्ष्म और सही मिलान से यह जाना जा सकता है कि उनमें रिश्ता निभेगा या नहीं। कंप्यूटर कुंडली से हुए विवाह के मामलों में यदि पति-पत्नी को कोई समस्या आ रही हो तो उसका निदान भी ज्योतिष में सभव है। आज-कल के अधकचरा ज्ञान रखने वाले ज्योतिषि जन्मकुंडली में सिर्फ गुण-मिलान से ही संबंध तय करा देते हैं जो गलत है। वास्तव में जन्मकुंडली मिलान में गुण-मिलान के अलावा कई और पक्षों जैसे कुंडली की प्रवत्ति, द्विभार्या योग, वैधव्य योग, बहुविवाह योग आदि की भी गणना करना चाहिए तभी विवाह संबंध की सही भविष्यवाणी की जा सकती है। डा. टंडन ने बताया कि विवाह के शुभ मुहूर्त का पल-पल का पालन होना चाहिए। ऐसा न होने से सेकेंडों के अंतर से भी वैवाहिक संबंधों में भिन्नता आ सकती है। आमतौर पर लोग शुभ मुहूर्त निकलवा तो लेते हैं लेकिन बैंड-बाजा, नाच-गाना, खाना-पीना और अन्य रस्मो-रिवाज में मुहूर्त का समय अक्सर निकल जाता है और इसका प्रभाव नए जोड़े की जिंदगी पर पड़ता है। इसका लोगों को बहुत ख्याल रखना चाहिए। साथ ही आजकल तमाम पंचाग अपनी बिक्री बढ़ाने के लिए कई अशुद्ध मुहूर्त भी निकाल देते हैं जिससे लगन की संख्या बड़ जाती है। इसलिए पूर्ण शुद्ध पंचाग से ही विवाह मुहूत आदि विचरवाना चाहिए।
गोष्ठी में ज्योतिषियों ने बताया कि मंगली दोष 21 साल तक प्रंचड प्रभावकारी, 27 वर्ष तक मध्यम तथा इसके बाद अल्प कष्टकारी रह जाता है। मंगली दोष से घबराने की आवश्यकता नहीं है। यदि जन्मपत्रिका में द्विभार्या अथवा दो विवाह योग हो तो वर-कन्या को दो बार फेरे दिला देने से इस दुर्योग का शमन किया जा सकता है। ज्योतिष रामबाबू मिश्रा ने कहा कि पुरुष की कुंडली में विवाह संबंध बनाने एवं चलाने के लिए शुक्र ग्रह की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। यदि शुक्र ग्रह छठे, अष्टम एवं द्वादश भाव में हो तो विवाह में बाधाएं उत्पन्न होती हैं। स्त्रियों के लिए बृहस्पति ग्रह की पूजा और उससे संबंधित वस्तुओं का दान करने से ही कल्याण है। गोष्ठी में गीता मरोलिया, पं. रामप्रकाश, अनिल मेहरोत्रा, रवि प्रकाश, दीपक पांडेय आदि ज्योतिष मौजूद थे।

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