बाइक के साथ फुंक गया डकैतों का सुराग

Kanpur Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
कानपुर। छोटी-मोटी घटनाओं को नजरअंदाज करने वाली पुलिस अब बैंक डकैती के मामले में लकीर की फकीर बनी भटक रही है। बाबूपुरवा सेंट्रल पार्क स्थित रामलीला मैदान के पास फूंकी गई बाइक की चोरी की पड़ताल न करना पुलिस को भारी पड़ गया है। बाइक फूंकने की घटना के बाद होश में आई काकादेव पुलिस ने अब चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर उसके तार डकैती से जोड़ने की कोशिश तो शुरू की लेकिन पूरी कवायद ने शुरुआत में ही दम तोड़ दिया। पुलिस टीम रेव मोती में जिस जगह से बाइक चोरी हुई थी, वहां लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज लेने पहुंची तो पता चला कि वहां 15 दिन बाद आटोमेटिक रिकार्डिंग डिलीट हो जाती है। अगर पुलिस एक महीने पहले हुई बाइक चोरी को गंभीरता से लेती तो शायद बैंक में डकैती डालने वाले आज शिकंजे में होते।
बैंक आफ बड़ौदा निराला नगर में 28 नवंबर को हेलमेट लगाए बदमाशों ने डाका डाला था। इसी दौरान बदमाशों ने काकादेव के रेव मोती के बेसमेंट में बनी पार्किंग से चुराई गई लाल रंग की अपाचे बाइक फूंक दी थी। यह बाइक काकादेव क्षेत्र में रहने वाले रवि तिवारी की थी। रवि रेव मोती के कर्मचारी बताए जाते हैं। पुलिस सूत्रों का कहना है कि रवि घटना के दिन ही रिपोर्ट लिखवाने काकादेव थाने गए थे। तब पुलिस ने यह कहकर मना कर दिया था कि मॉल में गार्ड तैनात रहते हैं। ऐसे में बाइक चोरी की रिपोर्ट में ड्यूटी पर तैनात गार्ड को नामजद किया जाएगा। इसी मुद्दे पर रवि थाने में हंगामा किया तो पुलिस ने उनसे तहरीर तो ले ली लेकिन मामला नहीं दर्ज किया। यह बाइक फूंके जाने के बाद काकादेव पुलिस हरकत में आई और आनन-फानन में रवि की ओर से बाइक चोरी की रिपोर्ट दर्ज कर ली। रेवमोती में लगे सीसीटीवी फुटेज पाने की कोशिश भी की गई लेकिन 15 दिन बाद इनकी रिकार्डिंग आटोमेटिक डिलीट हो जाने के कारण पुलिस खाली हाथ लौट आई।
इधर, डकैती की पड़ताल में जुटी पुलिस ने रूरा (कानपुर देहात) जय प्रकाश और अनुराग से पूछताछ की। यह दोनों पनकी क्षेत्र में हुई एक डकैती में शामिल रहे थे। उन्नाव के जितेंद्र की भी पुलिस तलाश है। पुलिस ने उसके घर में दबिश भी दी। पुलिस टीमों ने रविवार को कानपुर और आसपास के जिलों में रहने वाले कई बदमाशों की तलाश में छापेमारी की। कौन-कौन बदमाश हाथ लगे हैं, इस बारे में पुलिस ने कुछ भी बताने मना कर दिया है।

संदिग्धों पर है पुलिस की निगाह
बैंक डकैती के खुलासे के लिए पुलिस हर तरीका अपना रही है। सर्विलांस, मुखबिर और आम जनता की मदद तो ले ही रही है। साथ ही शक के दायरे में आए लोगों और उनके करीबियों पर भी निगाह रखी जा रही है। इनमें बैंक से जुड़े लोग भी शामिल हैं।

पब्लिक के सुझाव
पनकी में रहने वाली एक युवती ने ‘अमर उजाला’ को फोन कर बताया कि बैंक डकैती से एक दिन पहले वह पनकी बाजार गई थीं। वहां 4 लड़के आपस में बातचीत कर रहे थे बैंक रॉबरी करनी है। नशीली चीज मिल जाती तो काम आसान हो जाता। बस वह इतना ही सुन पायी और आगे बढ़ गई थी। पुलिस चाहे तो इस बिंदु पर भी जांच कर सकती है।

अशोक नगर के सतीश ने ‘अमर उजाला’ को फोन कर बताया कि बैंक से लूटे गए रुपयों की गड्डी में कैशियर के हस्ताक्षर होते हैं। हालांकि यह सबसे ऊपरी नोट में होता है। पुलिस को चाहिए की होटलों, शराब की दुकानों में नोटों की जांच कराए।

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