लंगर छक बोले, सतनाम श्री वाहे गुरु

Kanpur Updated Thu, 29 Nov 2012 12:00 PM IST
कानपुर। श्री गुरु नानक देवजी महाराज के 544वें प्रकाशोत्सव के तीसरे दिन बुधवार को मोतीझील में आस्था का सैलाब उमड़ा। कोकाकोला क्रासिंग से मोतीझील तक भक्तों का जमावड़ा लगा था। हर कोई मोतीझील में चल रहे लंगर कार्यक्रम में प्रसाद छकने को आतुर था। कोई अपने बच्चे को गोद में लिए हुए था तो कोई अपनी वृद्ध मां का हाथ पकड़े हुए आगे बढ़ रहा था। खास बात यह थी कि हर कोई कतार में पूरे अनुशासन से खड़ा था, जिस कारण सुरक्षाकर्मियों तक की जरूरत महसूस ही नहीं हो रही थी। करीब 11.30 बजे शुरू हुआ लंगर शाम के 4 बजे तक चला। करीब 2.5 लाख भक्तों ने गुरु का प्रसाद छककर सतनाम श्री वाहे गुरु का उद्घोष किया।
गुरु पर्व पर लंगर छकने का महत्व होता है। संगत एक साथ पंगत में बैठकर लंगर छकती है। लंगर के दौरान न कोई छोटा और न ही कोई बड़ा होता है। लंगर में सेवा का भी बड़ा महत्व होता है। हर कोई अपनी-अपनी सेवा में तल्लीन था। कोई रोटी बांट रहा था तो कोई सब्जी और दाल। वहीं, बच्चे आचार बांटने का काम कर रहे थे। संगत को मिक्स दाल, आलू-गोभी की सब्जी, सलाद, आचार, कड़ा प्रसाद व रोटी वितरित की गई। लंगर की कमान मंजीत सिंह सागरी ने 500 लोगाें के साथ संभाली, जो जो पंगत लगाने से लेकर लंगर छकाने की व्यवस्था को संभाले थे। वहीं, महेंदर सिंह बिंदा ने बताया कि लंगर में महिलाएं एक-एक किलो आटे की बनीं रोटियां लेकर आई थीं। कई समितियों ने प्याऊ, मुफ्त चिकित्सा शिविर आदि के स्टाल लगाए थे।

कोयला मंत्री समेत अन्य नेताओं ने छका प्रसाद
मोतीझील में कोयला मंत्री श्रीप्रकाश जायसवाल, सांसद राजाराम पाल, शैलेंद्र दीक्षित, सलीम अहमद, अनिल शुक्ला वारसी, मोहकम सिंह, गुरुदेव सिंह समेत कई नेताओं ने भी प्रसाद छका। इन सभी को रिक्की खनूजा ने लंगर छकवाया।

भक्त बोले

पिछले 10 साल से लंगर में सेवा कर रहा हूं। यहां आकर लगता है कि कोई अच्छा काम कर रहा हूं। गुरु सेवा ही सबसे बड़ी पूजा है।
सतनाम सिंह सूलजा, अशोक नगर

लंगर में सेवा करने का मौका गुरु कृपा से ही मिलता है। मैं अपने पिताजी के साथ बचपन से लंगर में सेवा के लिए आ रहा हूं।
टीटू सागरी, अशोक नगर

हमारे फतेहपुर में काफी छोटा आयोजन होता है पर यहां तो गजब की भीड़ होती है। अब मैं हर बार गुरु पर्व पर कानपुर ही आया करूंगी।
हरप्रीत कौर, फतेहपुर

मैं पिछले 35 साल से इस आयोजन में आ रही हूं। गुरु पर्व पर लंगर छकने का कुछ अलग ही महत्व होता है। अपने बच्चों को भी साथ लाती हूं।
मेनका कौर, धनकुट्टी

इंतजार के बाद पंगत में बैठकर लंगर छकने का मजा ही कुछ और होता है। इसमें इंतजार और स्वाद का अपना अलग ही मजा होता है।
दमनजीत कौर, कबाड़ी मार्केट

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