‘एके 47 को दुबारा सील कराया जाए’

Kanpur Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
कानपुर। कांग्रेस विधायक विलायती राम कत्याल हत्याकांड में प्रयोग किए गए असलहों की सही स्थिति पता करने के लिए एक और अर्जी कोर्ट में दी गई है। सोमवार को वकील शिवाकांत दीक्षित ने एडीजे 1 आरके त्रिपाठी की कोर्ट में अर्जी देकर मुकदमे के साक्ष्य असलहों का दुबारा संरक्षण और सील मोहर करने की मांग की है।
पिछले दिनों शासन ने अभियोजन दफ्तर से आर्म्स एक्ट के मुकदमे के बारे में जानकारी मांगी थी। सभी मुकदमों का हाल जुटाते समय खुलासा हुआ था कि कत्याल कांड वाली एके 47 और अन्य असलहे संबंधित थाने में नहीं है। ‘अमर उजाला’ ने इस मामले की पड़ताल की तो डीआईजी नगर अमिताभ यश ने दावा किया कि सभी असलहे पुलिस लाइन में सुरक्षित रखे हैं। अब सोमवार को अधिवक्ता शिवाकांत दीक्षित ने राज्य सरकार बनाम राजविंदर सिंह के मुकदमे का हवाला देते हुए एडीजे 1 की कोर्ट में अर्जी दी है। इसमें कहा गया है कि पिछले 1 पखवारे से समाचार पत्र में इस मुकदमे के साक्ष्य गायब होने के समाचार छप रहे हैं। ये भी जानकारी हुई है कि मुकदमे की जीडी नष्ट कर दी गई है। पुलिस आफिस के रिकार्ड कीपर ने कहा था कि संबंधित थाने से नहीं बताया गया था कि इससे संबंधित मुकदमा न्यायालय में विचारणीय है। हत्याकांड में प्रयुक्त एके 47 और अन्य हथियार कहां है, इस बाबत कोई विश्वसनीय सूचना नहीं है। प्रतिसार निरीक्षक हथियारों के बारे में अनभिज्ञता जता रहे हैं और डीआईजी कह रहे हैं कि हथियार सुरक्षित हैं। यह घटना शहर के एक जनप्रतिनिधि की हत्या से संबंधित है। समाज में मुकदमे के साक्ष्यों के बावत भ्रम की स्थिति है। इसलिए असलहों की वर्तमान स्थिति की जानकारी करना और दुबारा सील मोहर कराकर संरक्षित करना न्याय हित में आवश्यक है। ऐसा करने का आदेश पारित किया जाए। अदालत में अब इस मामले की सुनवाई 5 दिसंबर को होगी। उसी दिन कत्याल हत्याकांड की भी सुनवाई है।

इनसेट--

इतने असलहों की बरामदगी हुई थी
1 एके 47, 4 मैगजीन, 1 ओजेडवाई अमेरिकन कमांडो गन नंबर 0880198 नाइलोन की सीलींग बंधी (इस शस्त्र के चेंबर में 1 जीवित कारतूस फंसा था), 9 एमएम पिस्टल, 455 बोर रिवाल्वर बेव्ले स्कॉट मार्क 6, एके 47 के 187 जीवित कारतूस, अमेरिकन कमांडो गन के 48 जीवित कारतूस, 9 एमएम पिस्टल के 163 जीवित कारतूस और 455 बोर रिवाल्वर के 61 कारतूस
(अभियोजन रिकार्ड के अनुसार)

कहीं लखनऊ में तो नहीं असलहे?
25 अप्रैल 1988 को तत्कालीन एसएसपी ने ये सभी असलहे निदेशक विधि विज्ञान प्रयोगशाला लखनऊ भेजे थे। उन्होंने अपने पत्र में लिखा था कि यह अत्यंत महत्वपूर्ण मामला है। असलहों की फोरेंसिक जांच जल्द कर ली जाए। यह माल डीएम कानपुर की मुहर से सील हुआ था। इसलिए नमूना मुहर भी संलग्न की गई थी। बाद में रिवाल्वर और पिस्टल की फोरेंसिक जांच रिपोर्ट भी आ गई थी। इसमें कहा गया था कि इन दोनों हथियारों को हत्या में प्रयोग नहीं किया गया था। उस समय इस मुकदमे में विशेष अभियोजक कुंवर मृदुल राकेश को बनाया गया था।

Spotlight

Most Read

Shimla

कांग्रेस के ये तीन नेता अब नहीं लड़ेंगे चुनाव, चुनावी राजनीति से लिया संन्यास

पूर्व मंत्री एवं सांसद चंद्र कुमार, पूर्व विधायक हरभजन सिंह भज्जी और धर्मवीर धामी ने चुनाव लड़ने की सियासत को बाय-बाय कर दिया है।

17 जनवरी 2018

Related Videos

कानपुर में इतने ज्यादा मिले पुराने नोट, गिनते गिनते हो गया सवेरा

कानपुर में 80 करोड़ रुपये की पुरानी करेंसी बरामद हुई है। एक पुलिस अधिकारी ने जानकारी दी कि कानपुर पुलिस को एक बंद घर में बड़ी मात्रा में पुराने नोटों के होने के बारे में जानकारी मिली थी।

17 जनवरी 2018

आज का मुद्दा
View more polls
  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper