आग लगे तो गाना गा

Kanpur Updated Tue, 27 Nov 2012 12:00 PM IST
केस1:
स्थान : प्राथमिक स्कूल शिवाजी नगर
2008 में स्कूल को एक अग्निशमन यंत्र तो दे दिया गया लेकिन प्रधान शिक्षक मुकेश कुमार को छोड़कर इसकी ट्रेनिंग किसी को भी नहीं दी गई। यंत्र चलता है या नहीं इसके बारे में भी किसी को कोई जानकारी नहीं है। रीफिलिंग का बजट भी अभी तक नहीं आया है। ऐसे में यदि स्कूल में कोई हादसा हो गया तो ऊपर वाला ही मालिक है।

‘2008 में वार्ड शिक्षा समिति में अग्निशमन यंत्र खरीदने के लिए 3500 रुपये का बजट आया था। यंत्र के साथ बाल्टी और स्टैंड भी था। आज तक न तो यंत्र की रीफिलिंग हुई ओर न ही बजट पास हुआ।’
- मुकेश कुमार, प्रधानाध्यापक प्राथमिक स्कूल शिवाजी नगर

-
केस2:
स्थान उच्च प्राथमिक स्कूल दादा नगर
2007 में स्कूल को अग्निशमन यंत्र दिया गया। तब से एक ही दीवार पर टंगा अग्निशमन यंत्र एक्सपायर हो चुका है। आज तक इनकी न तो रीफिलिंग हुई और न ही बजट पास हुआ। यंत्र चलता है या नहीं इसके बारे में भी किसी को कोई जानकारी नहीं है।

‘निर्देश दिए गए थे कि स्कूल में अग्निशमन यंत्र लगाए जाएं तो लगा दिए गए। कई साल पहले ट्रेनिंग दी गई थी, अब तो याद भी नहीं है कि कैसे चलाया जाता है। रीफिलिंग के लिए पैसा ही नहीं आया।’
उमा कांती, -उच्च प्राथमिक स्कूल दादा नगर,

केस3:
स्थान : प्राथमिक स्कूल परमपुरवा
2008 में 3500 रुपये से अग्निशमन यंत्र लगाए गए थ। 111 छात्र पंजीकृत है। अगर कभी स्कूल में आग लग गई तो बाहर से ही पानी का इंतजाम करना पड़ेगा। ये स्कूल तो बीएसए कार्यालय परिसर में ही है। इसके बावजूद किसी अधिकारी ने इसकी जांच करने की जरूरत नहीं समझी।

‘ स्कूल में अग्निशमन यंत्र लगवाने का काफी दबाव था लेकिन उसके बाद किसी ने सुध नहीं ली। इनमें पानी है या पाउडर या कुछ और पता नहीं। ये कैसे चलता इसके बारे में भी कोई जानकारी नहीं है।’
मीना शुक्ला, प्रधानाध्यापिका

शैली भल्ला
कानपुर। ये 3 केस तो बानगी भर हैं। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि सर्व शिक्षा अभियान में स्कूलों को अपडेट करने के नाम पर किस तरह पैसा बहाया जा रहा है। स्कूलों में हादसे रोकने के लिए जिले में 70 लाख रुपये का बजट केवल अग्निशमन यंत्रों की खरीद के लिए दिया गया था। पर उसके बाद विभाग ने इसके रखरखाव और इनकी रीफिलिंग की जरूरत नहीं समझी।
2008 में सर्व शिक्षा अभियान के तहत जिले के 2000 स्कूलों के लिए 3500 रुपये प्रति स्कूल के हिसाब से 70 लाख रुपये का बजट आवंटित किया गया था। ब्लॉक में ग्रामीण शिक्षा समिति, नगर में वार्ड शिक्षा समिति के खाते में बजट आया। अग्निशमन यंत्र खरीदे गए और इसे स्कूलों में लगवा भी दिया गया। पर इसके उपयोग की जानकारी देना किसी ने जरूरी नहीं समझा।

कोट

‘खंड शिक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया जाएगा कि वे अपने स्तर से रीफिलिंग करवाएं। साथ ही जिन शिक्षकों को यंत्र चलाना नहीं आता, उनको स्पेशल ट्रेनिंग दी जाएगी।’
डा राम स्वरूप विश्वकर्मा, उप बेसिक शिक्षा अधिकारी

वाटर अग्निशमन यंत्र की एक्सपाइरी डेट एक साल और पाउडर वाले की दो साल होती है। अगर 4 साल से रीफिलिंग नहीं कराई गई है तो ये खाली डिब्बे के सिवाए कुछ नहीं हैं।
एसके सिंह कुशवाहा, सीएफओ

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