जर्जर भवन में चला दी गईं 96 मशीनें!

Kanpur Updated Wed, 31 Oct 2012 12:00 PM IST
कानपुर। जेके जूट मिल में मंगलवार को बड़ा हादसा होते बचा। जिस बिनता सेक्शन में आग लगी थी, उसी से सटे सेक्शन में बिनाई की 90 मशीनों को चालू किया गया। भीषण तपिश के चलते इस भवन की कमजोर हुई इमारत को मेंटिनेंस करने के पूर्व ही चलाने के चलते छत से प्लास्टर की पपडि़यां झड़ने लगीं। उधर मिल में नुकसान का जायजा लेने आई टेक्निकल सर्वेयरों की टीम किसी निष्कर्ष पर नहीं पहुंच सकी।
वर्ष 1932 में बनी जेके जूट मिल में ज्यादातर निर्माण में जुड़ाई के लिए राखी-चूने का इस्तेमाल किया गया है। उसके बाद से मिल की इमारत की मेंटिनेंस के लिए कुछ खास नहीं किया गया है। मिल सूत्रों की मानें तो आग के ताप से मिल के तमाम भवन प्रभावित हुए हैं। आज यहां जेके फोर लूम से सटे बिनता विभाग (13 नंबर लाइन) की 96 मशीनें चालू की गईं। मशीनों की धड़धड़ाहट जब हॉल में गूंजी तो छत के प्लास्टर की पपडि़यां झड़ने लगीं। इससे मजदूर सहम गए। इसकी सूचना टेक्निकल एडवाइजर ओपी पारिख को दी गई। इसके बावजूद वहां काम चलता रहा। इस संबंध में मिल के प्रभारी अधिकारी दामोदर प्रसाद भट्टर ने कहा कि मिल के अफसरों द्वारा जायजा लेने के बाद ही मशीनें चलाई गई हैं। उन्होंने जहां आवश्यकता जताई है, वहां मेंटिनेंस कार्य जल्द आरंभ कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि 5 नवंबर को बोनस और 10 को वेतन देने की औपचारिक घोषणा कर दी गई है। कल इस संबंध में नोटिस चस्पा किया जाएगा। श्री भट्टर ने दावा किया कि मंगलवार को मिल में 1700 के करीब श्रमिकों की उपस्थिति दर्ज की गई। उधर टेक्निकल सर्वे करने आई टीम ने शाम को अपना काम आरंभ किया। सर्वे में बिनता की कुल 350 में से 235 मशीनें जली पाई गई हैं। टीम अभी यह अनुमान नहीं लगा पाई है कि नुकसान कितना हुआ है। उधर बोनस और वेतन को लेकर अभी भी संशय बरकरार है। मिल शुरू करने के दौरान श्रमिकों से हुए समझौते में 31 अक्टूबर को बोनस बांटा जाना था। मगर इस संबंध में मंगलवार को कोई नोटिस गेट पर नहीं चपकाया गया।
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हादसे पर कौन देगा मुआवजा?
कानपुर। जेके जूट मिल में श्रमिकों की जान से खिलवाड़ किए जाने का आरोप लगाते हुए मिल से संबद्ध जेके जूट मिल मजदूर मोर्चा के महामंत्री राजू प्रसाद के नेतृत्व में एक प्रतिनिधि मंडल एडीएम फाइनेंस से मिला। राजू प्रसाद ने कहा कि वर्ष 2008 में मिल चालू करते वक्त यूनियनों के साथ हुए समझौते में गोविंद सारडा को मिल का टेक्निकल एडवाइजर और दामोदर भट्टर को ऑक्यूपायर डायरेक्टर बताया गया है। इसमें कहीं भी मालिक का जिक्र नहीं किया गया है। उन्होंने कहा कि मिल में बड़े पैमाने पर सुरक्षा से समझौता किया जा रहा है। कभी भी हादसा संभव है। इस पर कौन जिम्मेदार होगा। विश्वनाथ कुशवाहा, दिलीप कुमार, एमएएस जैदी आदि प्रतिनिधिमंडल में शामिल रहे।
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घनश्याम सारडा ने किया मिल पर दावा
कानपुर। सारडा परिवार के घनश्याम सारडा ने जेके जूट मिल पर अपना स्वामित्व जताते हुए आईफर में एक मेमो (संख्या. 165-12) दाखिल किया है। इसमें उन्होंने कहा है कि जेके ग्रुप द्वारा रैनी पार्क सप्लायर के नाम से 87.63 प्रतिशत शेयर ट्रांसफर हुए थे। इसमें सारडा परिवार ने 51 प्रतिशत शेयर अपने परिवार में लिया। गोविंद, जगदीश और उनके नाम बराबर हिस्सा आया। उन्होंने यह तर्क दिया है कि गोविंद सारडा मिल चला पाने में असफल हैं। दो साल में चार बार मिल बंद हो चुकी है। इसलिए उन्हें मौका दिया जाए।

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