टूट गया आंखों में बंधा आंसुओं का सैलाब

Kanpur Updated Tue, 23 Oct 2012 12:00 PM IST
कानपुर। मेरा राजा बाबू कहां है? उसे बुला लाओ, साथ ले जाऊंगा...। हैलट इमरजेंसी के बाहर बदहवास जफर बस यही रट लगाए था। अफसर समझ नहीं पाए कि राजा बाबू कौन है। इधर-उधर दौड़े तो पता चला कि परिजन साहिबा को ही प्यार में ‘राजा बाबू’ कहते थे। रो-रोकर जफर साहिबा को इसी नाम से पुकार रहा था। परिजनों के कलेजे मानो फटे जा रहे थे। 10 दिन से उनकी आंखों में बंधा आंसुओं का सैलाब टूट गया। उधर, तसनीम को नहीं पता कि उनकी बेटी अब इस दुनिया में नहीं है।
साहिबा की मौत के बाद भाई जफर, बहन कायनात और शाहीन पर गम का पहाड़ टूट पड़ा। ऐसा कोई लम्हा नहीं जब बहन को बचाने के लिये उन्होंने दुआ न पढ़ी हो। जफर तो नमाज भी अस्पताल में ही अदा करता था। सुबह जब बहन की मौत का पता चला तो वह सुध-बुध खो बैठा। राजा बाबू-राजा बाबू... पुकारते हुए इधर-उधर भागा। रिश्तेदारों ने उसे संभाला तो बहनें बिलख पड़ीं। इसी बीच किसी को आईसीयू में अकेली पड़ी तसनीम का ख्याल आया। रिश्ते के मामा किसी के कान में बुदबुदाए, आईसीयू जाओ, बहन अकेली है। उधर, अफसरों के समझाने पर एक पल के लिए शांत जफर अगले ही पल बेकाबू हो जाता। कभी कहता राजा बाबू को बुलाओ तो कभी कहता मां को बुलाओ। दोनों को साथ घर ले जाऊंगा। कभी कहता मैं घर जा रहा हूं, तुम लोग आते रहना। तसनीम की हालत देखते हुए परिजनों ने उनसे साहिबा की मौत की बात उनसे छिपा ली। हालांकि, उन्हें अंदाजा हो गया था कि कुछ अनहोनी हुई है।

‘गुंडों से हाथ जोड़कर माफी मांग लूंगी’
साहिबा की मौत और तसनीम की गंभीर हालत ने परिवार के बाकी सदस्यों का हौसला तोड़ दिया। जफर ने कहा, दशहरा सत्य पर असत्य की जीत है लेकिन यहां असत्य जीत गया। कायनात और शाहीन ने कहा, अब घर जाकर गुंडों के हाथ जोड़कर माफी मांग लेंगे। मां-बहन ने आग लगा ली, फिर भी पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। पुलिस उनके साथ खड़ी है। अब तो वो हमारा जीना हराम कर देंगे। अच्छा यही है कि घर चलकर सबसे पहले उनसे रहम की भीख मांगें। हालांकि, अफसरों ने उन्हें कार्रवाई करने का भरोसा दिलाया।

मौत आ गई पर जांच रिपोर्ट नहीं
मकान पर कब्जे का विवाद और आत्मदाह के प्रयास की जांच डीआईजी रेंज सुनील कुमार गुप्ता ने गत बुधवार को एएसपी कन्नौज को सौंपकर 72 घंटे में रिपोर्ट मांगी थी लेकिन 5 दिन बाद भी जांच पूरी नहीं हो सकी है। डीआईजी रेंज ने बताया कि कुछ सीओ और एलआईयू के लोग वीआईपी ड्यूटी के लिये बाहर गए हैं, इसलिए बयान नहीं हो सके हैं। उनके बयान होते ही आगे की कार्रवाई होगी।

मौत को रविवार रात ही हो गई थी!
अस्पताल सूत्रों की मानें तो साहिबा ने रविवार रात ही दम तोड़ दिया था लेकिन अस्पताल प्रशासन जानबूझकर इसे छिपाए रहा। दरअसल, रविवार को घटना की कवरेज करने हैलट इमरजेंसी गए प्रेस फोटोग्राफरों और जूनियर डॉक्टरों में झगड़ा हो गया था। साहिबा के इलाज लापरवाही को लेकर अस्पताल प्रशासन पहले ही कठघरे में है। मामला और न बिगड़ जाए इसलिए अस्पताल प्रशासन ने सुबह होने का इंतजार किया।

पुलिस का मैनेजमेंट काम न आया
पुलिस-प्रशासन के अफसरों को अंदाजा था कि साहिबा की मौत के बाद बवाल हो सकता है। यही वजह है उन्होंने पहले ही शहर काजी आलम रजा नूरी और रियाज अहमद हशमती सहित जफर के कई करीबियों से संपर्क बना रखा था। साहिबा के दम तोड़ने की खबर मिलते ही सबको हैलट बुलवा लिया गया। सबने मिलकर जफर को काफी समझाया लेकिन यह मैनेजमेंट काम नहीं आया। जफर और उनके परिजन करीब 6 घंटे तक हैलट परिसर में हंगामा करते रहे और अफसर उनके आगे-पीछे घूमते रहे।

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