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रनवे पर ‘फिसली’ एचएएल की ड्रीम फ्लाइट आईजेटी!

Kanpur Updated Mon, 15 Oct 2012 12:00 PM IST
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संजय त्रिपाठी
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कानपुर। हिन्दुस्तान एयरोनॉटिकल्स लिमिटेड (एचएएल) के महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट इंटरमीडिएट जेट ट्रेनर (आईजेटी) पर संकट के बादल छा गए हैं। इन विमानों का उत्पादन एचएएल, कानपुर में 2012 में शुरू होना था पर अभी तक यह परीक्षण का दौर ही नहीं क्लियर कर पाया है। हालात इसलिए भी गंभीर हैं कि पिछले पांच साल में तीन प्रोटोटाइप विमान दुर्घटनाग्रस्त हो चुके हैं। इस प्रोजक्ट के लटकने का सीधा असर एयरफोर्स के पायलटों के ट्रेनिंग प्रोग्राम पर पड़ेगा। इसलिए एयरफोर्स इस संबंध में कई पत्र एचएएल प्रबंधन को लिख अपनी चिंता से अवगत करा चुकी है।
जेट विमानों की दुर्घटनाओं से परेशान एयरफोर्स ने अपने पायलटों को बेहतर ट्रेनिंग देने के मकसद से आईजेटी विमानों के निर्माण संबंधी एक अनुबंध किया था। इसे दो हिस्सों में तैयार होना था। पहला लिमिटेड एडिशन और दूसरा सीरीज प्रोडक्शन। लिमिटेड एडिशन की तैयारियों के लिए कानपुर से एचएएल के अधिकारियों की एक टीम बंगलुरु स्थित एयर क्राफ्ट रिसर्च एंड डिजाइन सेंटर (एआरडीसी) रवाना गई थी। लिमिटेड एडिशन के तहत 12 विमान बनाने के बाद उसे एआरडीसी से एप्रूव कराया जाना था। सूत्रों के अनुसार अभी लिमिटेड एडिशन के ही सिर्फ 5 विमान तैयार हो सके हैं जबकि वर्ष 2012 तक हर हाल में कानपुर स्थित कारखाने में इसका सीरीज प्रोडक्शन शुरू होना था। एचएएल सूत्रों के मुताबिक फिलहाल यहां विमान बनाने के दूर-दूर तक कोई आसार नजर नहीं आ रहे हैं।

गौरतलब है कि इस प्रोजेक्ट के तहत एयरफोर्स को 73 विमान दिए जाने थे, जिसके लिए अरबों का एडवांस भी एचएएल ले चुका है। इस संबंध में एयरफोर्स के आला अधिकारियों की तरफ से भी तमाम पत्र एचएएल को भेजे जा चुके हैं। एचएएल के महाप्रबंधक डी. बालासुब्रमण्यम ने इस मामले पर कुछ कहने से इनकार कर दिया। वहीं आईजेटी प्रोजेक्ट के प्रमुख टीके मंडल ने इसे सरकारी प्रक्रिया बताते हुए मामूली देरी होने की बात कही। उनका कहना है कि इस संबंध में प्रोक्योरमेंट (खरीदारी) आदि के कार्य आरंभ हो रहे हैं। जल्द ही सीरीज प्रोडक्शन आरंभ किया जाएगा।


वायुसेना चिंतित
आईजेटी के संबंध में प्रगति से हम संतुष्ट नहीं हैं। एचएएल ने इसके लिए एक डिजाइन टीम बनाई थी, मगर अभी तक कुछ खास नतीजे देखने को नहीं मिले हैं। यह एक ट्रेनिंग एयरक्राफ्ट है और इसमें सुरक्षा के मुद्दे पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।
एयरचीफ मार्शल एनएके ब्राउन (एक मैगजीन को दिया इंटरव्यू)


पांच साल में तीन हादसे
कानपुर। जिस एयरक्राफ्ट को इसी मकसद से तैयार किया जाना है कि जेट दुर्घटनाएं रुक सकें, वह खुद ही पांच साल में तीन बार क्रैश हो चुका है। पहला क्रैश बंगलुरु में आयोजित एयर इंडिया शो के दौरान फरवरी, 2007 में हुआ। इसके बाद फरवरी, 2009 में रुटीन हवाई उड़ान के दौरान हादसा हुआ। तीसरी बार अप्रैल, 2011 में एक और विमान बंगलुरु में ही क्रैश हो गया।

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