फैज और मजाज शायरी के सरताज

Kanpur Updated Sun, 14 Oct 2012 12:00 PM IST
उठ रही है कहीं कुरबत से तेरी सांस की आंच
अपनी खुश्बू में सुलगती हुई मद्धम मद्धम
दूर उफक पर चमकती हुई कतरा-कतरा
गिर रही है तेरी दिलदार नजर की शब्नम
फैज

क्यों तबियत कहीं ठहरती नहीं
दोस्ती तो उदास करती नहीं
हम हमेशा के सिर चश्म सही
तुझको देखें तो आंख ठहरती नहीं
फराज
-इश्क-मोहब्बत तक सिमटी शायरी को इन्किलाब तक ले गए
-डीजी कॉलेज के सेमिनार में वक्ताओं ने शान में कसीदे पढ़े

स्टफ रिपोर्टर
कानपुर। ‘फैज अहमद ‘फैज’ और मजाज प्रगतिशील समाज के लेखक और शायर थे। दोनों शायरों ने हिन्दुस्तानी शायरी को नया आयाम दिया। इश्क-मोहब्बत तक सिमटी शायरी को उन्होंने समाज से जोड़ते हुये इन्किलाब तक ले जाने में महती भूमिका निभाई’। ये बातें वक्ताओं ने डीजी कॉलेज के उर्दू विभाग द्वारा आयोजित दो दिवसीय सेमिनार के उद्घाटन समारोह में कही। वक्ताओं ने उर्दू साहित्य को बचाने और बढ़ाने पर जोर दिया।
सिविल लाइन स्थित स्टॉक एक्सचेंज सभागार में ‘फैज और मजाज, रूमानी से इन्किलाब तक’ विषय पर आयोजित सेमिनार में मुख्य अतिथि पूर्व एचओडी उर्दू विभाग, लखनऊ विश्वविद्यालय के प्रोफेसर महमूदुल हसन रिजवी ने कहा कि फैज और मजाज उस दौर के शायर रहे जब देश में प्रगतिशीलता आ रही थी। देश की आजादी के आन्दोलन में शायरी भी योगदान देने लगी थी। दोनों शायरों की शायरी में रूमानियत की ठंडक और इन्किलाब की गर्मी भी थी। दोनों शायरों ने इश्क और मोहब्बत के दायरे तक सिमटी शायरी को गंगा-जमुनी संस्कृति और हिन्दू-मुस्लिम एकता, राष्ट्र प्रेम की ओर बढ़ाने में प्रभावी भूमिका निभाई। आवारा व्यक्ति के भीतर जागते देश प्रेम को ‘शहर की ये रात मैं नाकाम व नाकारा, फिरूं, जगमगाती, जागती सड़कों पे आवारा फिरूं’..शायरी के माध्यम से व्यक्त किया। मुख्य वक्ता दिल्ली विश्वविद्यालय के डा. अली जावेद ने कहा कि उर्दू साहित्य, जिसे समाज में प्यार, मोहब्बत तक ही सीमित होकर देखा जाता था, उसे फैज और मजाज ने हिन्दू-मुस्लिम एकता के सूत्र में पिरोया। प्रोफेसर शारिब रुदौलवी ने कहा कि दोनों शायरों की शायरी को वर्तमान परिपेक्ष्य में समझने की आवश्यकता है। साथ ही उर्दू साहित्य को संरक्षित करने की भी आवश्यकता है। संचालन डा.नगमा जायसी ने किया। पदमश्री इरशाद मिर्जा, प्राचार्य डा. मीता जमाल, डा.एसएनएस आब्दी, डा. हिना अफशां, डा. नगीना जबीं, रुखसाना सिद्दीकी, डा.आफताब अहमद आफाकी, डा. सैयद रजा, नासेहा आदि मौजूद रहे।

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