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नहीं हुई सुनवाई फिर महिला की जान पर बन आई

Kanpur Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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कानपुर। सुनवाई न होने से आहत एक महिला की तबीयत डीएम कोर्ट की चौखट के सामने बिगड़ गई। इससे कलेक्ट्रेट में मंगलवार जैसा अफरा-तफरी का माहौल बुधवार दोपहर एक बार फिर बन गया। बदहवास बेटी मदद की गुहार लगा रही थी और कलेक्ट्रेट के कुछ कर्मचारी मदद की बजाय सिपाहियों से उन्हें जल्दी वहां से हटाने को कह रहे थे। बाद में महिला को उर्सला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। बेटी का आरोप है कि एडीएम सिटी के समस्या सुनने की बजाय डपटने पर मां की हालत बिगड़ गई। हालांकि एडीएम इस आरोप को सिरे से खारिज कर रहे हैं। इस पूरे घटनाक्रम के दौरान ‘अमर उजाला’ रिपोर्टर आशुतोष और फोटो जर्नलिस्ट संजीव शर्मा मौके पर ही थे। जैसा देखा, वैसा ही घटनाक्रम पेश किया जा रहा है।
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दोपहर 12.25 बजे की बात है। एक महिला नीम बेहोशी की हालत में कलेक्ट्रेट प्रथम तल स्थित डीएम कोर्ट के सामने पड़ी थी। उसकी बेटी मदद के लिए गुहार कर रही थी। पूछने पर मां का नाम लक्ष्मी गुप्ता और निवास 133/93 एम ब्लाक किदवई नगर बताया। इसी दौरान वहां मौजूद कुछ लोग बोले, हटाओ इन्हें यहां से नीचे ले जाओ। बस फिर क्या था, दो महिला सिपाही हाथ पकड़ कर उन्हें वहां से हटाने लगीं। महिला के साथ आए वकील रोशन लाल वर्मा अंदर एडीएम सिटी अनूप कुमार श्रीवास्तव के पास पहुंचे और लक्ष्मी को अस्पताल पहुंचाने की व्यवस्था करने को कहा। इस पर एडीएम बरामदे में आए और वकील पर बिगड़ते हुए कहने लगे नौटंकी कराते हो...इन्हे यहां से ले जाओ...आप लोगों की समझ में नहीं आता...। यह कहते हुए उनकी नजर लक्ष्मी पर गई तो बिगड़ी हालत देखकर शायद उन्हें मौके की नजाकत समझ आई। कर्मचारियों से कहा कि इसे उर्सला में भर्ती कराओ..। महिला सिपाहियों ने लक्ष्मी को किसी लाश की तरह उठाया और नीचे लाकर एसडीएम की गाड़ी में लिटाकर उर्सला भेजा। लक्ष्मी के अधिवक्ता का कहना है कि एडीएम सिटी की कोर्ट के आदेश पर किराएदार लक्ष्मी का सामान हटवा दिया गया था। कुछ सामान वहीं रह गया था। इसे दिलवाने की अर्जी लेकर महिला के साथ गए थे। वहीं जूही एसओ राकेश कुमार यादव ने बताया कि एडीएम सिटी कोर्ट के आदेश पर मकान खाली कराया था, लक्ष्मी का कोई सामान वहां नहीं रह गया था। वीडियो ग्राफी कराई गई थी।



मुझसे मिलने महिला नहीं आई थीं। उनके वकील आए थे। बरामदे में महिला लेटी थी। उसकी हालत बिगड़ी दिखी, इसलिए अस्पताल भिजवा दिया। मां और बेटी को डपटने का आरोप गलत है। यह महिला पहले तीन बार एसीएम-1 की कोर्ट में भी इसी तरह नौटंकी कर चुकी है।
-अनूप कुमार श्रीवास्तव, एडीएम सिटी

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