665 डिग्री टीचर्स की नियुक्ति निरस्त

Kanpur Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
कानपुर। छत्रपति शाहूजी महाराज यूनिवर्सिटी से संबद्ध 180 सेल्फ फाइनेंस डिग्री कालेज के 665 टीचर्स की नियुक्ति निरस्त कर दी गई है। इनमें 225 टीचर ऐसे हैं, जो 65 साल की उम्र पूरी कर चुके हैं लेकिन फिर भी बीएड, बीपीएड, एमएड, एमपीएड की पढ़ाई करा रहे थे। 440 टीचर्स का अनुमोदन एक से ज्यादा डिग्री कालेज में था। नियमानुसार योग्य टीचर एक ही कालेज में पढ़ाकर सैलरी ले सकता है। इसी फर्जीवाड़े की बीते माह जांच रिपोर्ट आने पर कुलपति प्रो. अशोक कुमार ने संबद्ध सभी राजकीय, अनुदानित, सेल्फ फाइनेंस डिग्री कालेज के टीचर्स के कोड सत्यापित करने का आदेश भी दिया है। यह जिम्मेदारी सिस्टम मैनेजर डा. सरोज द्विवेदी को सौंपी गई है।
यूनिवर्सिटी प्रशासन को टीचर्स की नियुक्ति में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़े की शिकायत मिली थी। अज्ञात व्यक्ति ने शिकायत में कहा था कि एक ही टीचर का नाम 3-4 अलग-अलग कालेजों के टीचर्स की सूची में दर्ज है। कुछ टीचर्स ऐसे हैं, जिनके शैक्षिक दस्तावेज हथिया करके उनके नाम का अनुमोदन करा लिया गया है। इसकी जानकारी संबंधित टीचर को भी नहीं है। इसे लेकर ही यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जांच कराई तो बड़े गोलमाल का खुलासा हुआ। पता चला कि 14 जिलों के सेल्फ फाइनेंस कालेजों में टीचर्स की नियुक्ति में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया है। अकेले कानपुर नगर के 42 कालेजों में टीचर्स के नाम रिपीट हैं। 65 साल की उम्र पूरी कर चुके टीचर्स भी पढ़ा रहे हैं। इस पर यूनिवर्सिटी प्रशासन ने सभी टीचर्स की नियुक्ति निरस्त करके इसकी सूची यूनिवर्सिटी की वेबसाइट पर डाल दी है।

2011 से चल रही थी जांच
सूत्रों ने बताया कि मामले की शिकायत 2010 में की गई थी, जिसकी जांच अगस्त 2011 से चल रही थी, जिसके नतीजे अब सामने आए हैं। टीचर्स की नियुक्ति में सबसे ज्यादा फर्जीवाड़ा बीएड, बीपीएड, एमएड कालेजों में हुआ है। बीए, बीएससी, बीकॉम की पढ़ाई के लिए एक ही टीचर का नाम अलग-अलग कालेजों में इस्तेमाल हो रहा है। यही नहीं संबंधित टीचर की अच्छी सैलरी दिखाकर सेल्फ फाइनेंस कालेज संचालक ज्यादा फीस वसूल रहे हैं जबकि टंपरेरी, कम अर्हता वाले टीचर से पढ़ाई कराकर उन्हें कम सैलरी दे रहे हैं। इसे लेकर ही कुलपति ने टीचर्स कोड के सत्यापन का आदेश दिया है। उन्होंने कहा है कि फर्जीवाड़ा करने वाले सभी टीचर्स की नियुक्ति निरस्त की जाएगी।

पैनल सदस्यों की भूमिका भी संदिग्ध
डिग्री कालेजों में टीचर्स की नियुक्ति में हुए फर्जीवाड़े में यूनिवर्सिटी के पैनल की भूमिका भी संदिग्ध रही है। पैनल के सदस्यों ने शैक्षिक दस्तावेज तो देख लिए लेकिन कागजात पर मौजूद फोटोग्राफ का मिलान नहीं किया। इस कारण एक ही टीचर का अनुमोदन अलग-अलग कालेजों में हो गया। अब ऐसे टीचर्स के खिलाफ कार्रवाई करने की तैयारी की जा रही है। यही नहीं फर्जीवाड़े में शामिल कालेज संचालक, प्रिंसिपलों को भी नोटिस दिया गया है। इन सभी से जवाब मांगा गया है। जवाब मिलने के बाद आगे की कार्रवाई होगी।

ऐसे हुआ फर्जीवाड़ा
किसी भी डिग्री कालेज में संबद्धता से पहले टीचर्स की नियुक्ति होती है। यूनिवर्सिटी से पैनल गठित होता है, जो इंटरव्यू के बाद टीचर्स का नाम अनुमोदित करता है। कुछ डिग्री कालेजों में एमएड, पीएचडी डिग्रीधारकों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। शैक्षिक दस्तावेज, फोटोग्राफ जमा कराए गए लेकिन सीटें नहीं मिल सकीं। इस कारण अभ्यर्थियों को टरका दिया गया। बाद में सीटें मिलीं तो उन्हीं के नाम का इस्तेमाल करके संबद्धता ले ली गई। उन्हीं टीचर्स का नाम अभी तक चल रहा था।

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