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देशी मक्का: खेत की सेहत के साथ स्वाद का भी तड़का

Kannauj Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। इसे जागरूकता कहें या किसानों की मजबूरी। हाईब्रिड मक्का के हजारों किस्म के बीज बाजार में उपलब्ध होने के बावजूद किसान देशी मक्का के बीज की खरीददारी के दौड़भाग में लगे हैं। इसके चलते गांवों की गलियों से लेकर गल्ला मंडी तक देशी मक्का की बुवाई के लिए बीज की जमकर बिक्री हो रही है।
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गांव उमरायपुरवा निवासी किसान शिवनंदन का कहना है कि मानसून के देर से आने से फसलों की बुवाई पिछड़ी है। खरीफ की फसलों में प्रमुख रूप से मक्का की पैदावार की जाती है। खरीफ के बाद अधिकांश किसानों द्वारा आलू की बुवाई की जाती है। हाईब्रिड मक्का की सबसे कम अवधि फसल भी करीब 3 माह लेती है। जबकि आलू की बुवाई सितंबर से शुरू हो जाती है। ऐसे में किसान कम अवधि की फसलों को तैयार करना चाहता है। देशी मक्का की फसल दो माह में ही पककर तैयार हो जाती है। इसके चलते किसान बड़े पैमाने पर इसकी बुवाई कर रहे हैं। गांव बलारपुर निवासी किसान दिनेशचंद्र कटियार का कहना है कि देशी मक्का की उपज भले ही कम हो लेकिन स्वाद के मामले में यह हाईब्रिज मक्का से बेहतर हैं।

फत्तेपुर जसोदा निवासी किसान सत्यवीर का कहना है कि देशी मक्का का बीज सस्ता और लागत भी कम आती है। इसके अलावा उत्पादन कम होने से खेत की उर्वरा शक्ति भी कमजोर नहीं होती है। उधर, उप कृषि निदेशक रोताश कुमार का कहना है कि अधिक उत्पादन देने वाली फसलों से खेत की उर्वरा शक्ति कम होना स्वाभाविक है। ऐसे में किसानों को रासायनिक उर्वरकों के कम प्रयोग वाली फसलों के अलावा फसल चक्र भी अपनाना चाहिए।

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