उद्यान विभाग कराएगा आयुर्वेदिक औषधियों की खेती

Kannauj Updated Sun, 15 Jul 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना के तहत जिले में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति को विकसित करने के इरादे से जीवन शक्ति परियोजना (औषधि एवं सुगंध पौधों का पौधरोपण) उद्यान विभाग शुरू करेगा। सर्पगंधा, पामारोजा, लेमनग्रास, सेंट्रोनेला, अश्वगंधा, कालमेघ, इसवगोल आदि की खेती कराई जाएगी। इसका प्रस्ताव तैयार कर मुख्य विकास अधिकारी को भेजा गया है। फिलहाल इस साल पामारोजा की खेती के पायलट प्रोजेक्ट को अलमी जामा पहनाने के लिए कसरत शुरू की गई है।
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जिला उद्यान अधिकारी मुन्ना यादव ने बताया कि कन्नौज विकास खंड क्षेत्र के गांव बलारपुर मे 125 बीघा क्षेत्रफल में पामारोजा की खेती की जाएगी। उन्होंने बताया कि पारंपरिक वनों का अच्छादित क्षेत्रफल घटता जा रहा है। इस कारण वनों में उपलब्ध होने वाली औषधियों की उपलब्धता नहीं हो पा रही है। इसीलिए कम लागत वाली आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति धीरे-धीरे महंगी होती जा रही है। पारंपरिक वैदिकी के व्यवहारिक पक्ष और उसक ी समाज में उपयोगिता को देखते हुए औषधियों के उत्पादन की तैयारी विभाग ने शुरू की है।
इससे परंपरागत कृषि से जुड़े किसानों की आय में बढ़ोतरी होगी। वैदिकी के लिए आसानी से औषधियां मिलेंगी। आयुर्वेद के लाभ से जनमानस की सेहत भी सुधर सकेगी। बेरोजगार वैद्यकों को रोजगार की मुख्य धारा से भी जोड़ा जा सकेगा। बीपीएल परिवार के किसानों, अनुसूचित जाति, जनजाति, इंदिरा आवास के आवंटी, पट्टेदार, लघु सीमांत श्रेणी के किसान योजना के लिए पात्र होंगे। लाभार्थी किसान को मनरेगा के तहत जाबकार्ड दिया जाएगा। अपने खेत में काम करने पर भी मजदूरी का भुगतान उसके खाते में भेजा जाएगा। संबंधित ग्राम पंचायत के रोजगार को मस्टर रोल भरने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी। तकनीकी सहायक एमबी करेगा।
बलारपुर के रामसरन, धर्मेंद्र कुमार, मुकेश कुमार, नितिन कटियार, रोशनलाल, श्यामा देवी, विमला, रामकिशन दोहरे, राजाराम, शिवनाथ, वीरेंद्र कुमार, प्रदीप कुमार, श्यामलाल आदि किसानों के खेतों में इस साल पामारोजा की खेती कराने की तैयारी है। किसानों को एफएफडीसी के जरिए बीज दिलाया जाएगा। जैविक खाद और तकनीकी जानकारियां भी मुफ्त में दी जाएंगी। समय-समय पर उद्यान विभाग के निरीक्षक, कृषि वैज्ञानिक व अधिकारी खेतों पर जाकर जायजा लेंगे और किसानों को कई तरह की जानकारियां मुहैया कराएंगे। मनरेगा के तहत 5 लाख 98 हजार रुपये इस खेती पर खर्च होंगे। इनमें 2.175 लाख सामग्री व 3.812 लाख रुपया श्रमांश पर व्यय होगा। छह महीने में फसल तैयार होगी।
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