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स्कूल चलो अभियान, शिक्षा के हक का सच

Kannauj Updated Thu, 05 Jul 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालयों में शासन के निर्देश पर छात्रों के शत प्रतिशत दाखिले के लिए स्कूल चलो अभियान व शिक्षा के हक के लिए काफी तेजी से प्रचार-प्रसार किया जा रहा है। ताकि सौ फीसदी दाखिले किए जा सकें, लेकिन खंड शिक्षाधिकारियों से कराए गए सर्वे में चौकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिले के 133 विद्यालय ऐसे हैं, जिनमें शिक्षक ही नहीं है। विभाग ने शिक्षक विहीन विद्यालयों में शिक्षक भेजने की व्यवस्था शुरू कर दी है। जिनमें शिक्षकों की संख्या अधिक हैं, उनकी छंटनी करके बंद विद्यालयों में संबद्धीकरण किया जाएगा। फिलहाल सब कुछ रामभरोसे ही है। मसलन स्कूल बैसाखी के भरोसे और प्रशासन के ख्वाब सितारा तोड़ लाएंगे।
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गौरतलब है परिषदीय प्राथमिक व उच्च प्राथमिक विद्यालय खुल गए हैं, लेकिन जिले में 133 विद्यालय ऐसे हैं, जिनको कोई खोलने वाला ही नहीं है। जब विद्यालय में शिक्षक ही नहीं है, तो छात्र दाखिला किसके पास कराएंगे। ग्राम पंचायत स्तर पर निकाली जाने वाली स्कूल चलो अभियान, शिक्षा के हक के लिए प्रभात फेरियां तो टांय-टांय फिस्स नजर आएंगी। हलांकि विभाग ने इस आंकड़े को देखकर भागदौड़ शुरू कर दी है। शिक्षक विहीन विद्यालयों को खोलने की व्यवस्था के लिए अधिक संख्या वाले शिक्षकों का समायोजन किए जाने की व्यवस्था चल रही है। इन शिक्षकों के पहुंच जाने से कम से कम छात्रों के दाखिले तो हो जाएंगे, लेकिन शिक्षण गुणवत्ता सुधरने की कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि अकेला शिक्षक केवल छात्रों के घेरने के सिवाए और कुछ नहीं कर सकता। इसके अलावा स्कूल में नियुक्त शिक्षा मित्रों की निकाय चुनाव, जनगणना सहित अन्य कार्यक्रमों में ड्यूटी लगी हुई है। अधिकारी भी असमंजस की स्थित में आखिर स्कूल किस तरह से संचालित कराएं। जिले में पहले से ही शिक्षकों की संख्या काफी कम है। उधर निकाय चुनाव के चलते नियुक्ति संबंधी सारे कार्य भी बंद पड़े हुए हैं। खंड शिक्षाधिकारियों का कहना है कि स्कूल खोलने के लिए उन्होंने लगभग लिस्ट फाइनल कर ली है। बीएसए अम्बरीश कुमार यादव का कहना है कि विद्यालय बंद न हो इसकी व्यवस्था की जा रही। समायोजन/स्थानांतरण शासन की ओर से पूरी तरह से बंद है। विद्यालय खुल सके इसके लिए अस्थाई व्यवस्था करके शिक्षकों को बंद विद्यालयों में भेजा जा रहा है।

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