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-तो तिर्वा क्षेत्र हो जाएगा शैक्षिक हब

Kannauj Updated Tue, 03 Jul 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। स्वर्णिम अतीत वाले तिर्वा स्टेट का वर्तमान भले ही बेहाल और बदरंग हो लेकन भविष्य संवरने वाला है। जमीनों का चक्कर यूं ही रहा तो आगे चलकर तिर्वा क्षेत्र की ही तरक्की का पहिया तेजी से घूमेगा। मुख्यमंत्री की तरफ से घोषित किए गए ज्यादातर विकास कार्य इसी इलाके में होने वाले हैं।
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कन्नौज जिला मुख्यालय पर सरकारी जमीन काफी कम है। विकास कार्यों के लिए कोई भी निजी भूमि देने के लिए तैयार नहीं है। मुख्यमंत्री ने कहा है कि जबरदस्ती किसी की जमीन न ली जाए। यही वजह है कि जमीन की खोज में जुटे राजस्व विभाग की दौड़ तिर्वा क्षेत्र में ही पहुंचकर समाप्त हो रही है। सुगंध के शहर में जमीन की कमी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि बजट सत्र में लोहिया उद्यान निर्माण के लिए डेढ़ करोड़ का बजट मिल चुका है, लेकिन 1 हेक्टेयर जमीन एक महीना बाद भी नहीं मिल सकी है।
जमीन की किल्लत ने राजस्व महकमे का रुख तिर्वा की तरफ मोड़ दिया है।कलेक्ट्रेट सूत्रों के अनुसार राजकीय इंजीनियरिंग कालेज के लिए 10 हेक्टेयर जमीन बड़नपुर वीरहार, राजकीय महिला डिग्री कालेज के लिए हसेरन के बनगवां में 1.5 हेक्टेयर, केंद्रीय विद्यालय के लिए बड़नपुर वीरहार में 9.63 एकड़, पीएसी वाहिनी मुख्यालय के लिए 20.22 हेक्टेयर जमीन कुढ़िना, पैरामेडिकल कालेज के लिए 50 एकड़ जमीन जनखत में तलाश ली गई है। राजकीय बालिका इंटरकालेज के लिए दो एकड़, डेयरी प्लांट के लिए तीन एकड़ व पावर प्लांट के लिए जमीन भी तिर्वा में ही खोजी जा रही है। यानी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव द्वारा की गईं ज्यादातर घोषणाओं के निर्माण कार्य भूमि के अभाव में तिर्वा क्षेत्र में स्थापित होने के प्रबल आसार बन गए हैं।

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