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छोटे काश्तकारों के लिए वरदान बनी टमाटर की फसल

Kannauj Updated Tue, 26 Jun 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। गरीब व छोटे काश्तकारों के लिए टमाटर की फसल फायदे का सौदा साबित हो रही है। बाजार में अधिक मांग व फसल तैयार करने में आने वाली कम लागत के चलते किसानों की यह पहली पसंद बन चुकी है। इस फसल से कई गरीब किसानों के परिवारों की रोजी-रोटी चल रही है। इस बार आंधी-पानी न आने से हुई अधिक पैदावार से किसानों को काफी मुनाफा हुआ है। यही नहीं किसान अपने खेतों में एक साल में दो बार इसकी फसल तैयार कर लाभ उठा रहे हैं।
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किसान ऊधनलाल ने बताया कि टमाटर की फसल के लिए नर्सरी तैयार करनी पड़ती है। इसके लिए खेत के किनारे छोटी सी क्यारी बनाकर बीज बो दिया जाता है। देखभाल व सिंचाई से महज 25 दिनों में नर्सरी तैयार हो जाती है। नर्सरी हो जाने पर खेतों में पानी लगाकर पौधों को रोप दिया जाता है। रोपाई के बाद सिर्फ 2 माहीने में भी उपज मिलनी शुरू हो जाती है।
किसानों का कहना है कि टमाटर की फसल में सिंचाई की लागत कम आती है। इसके अलावा बराह विधि से फसल तैयार की जाती है। इसकी वजह से एक एकड़ की फसल की सिंचाई केवल एक घंटे में हो सकती है।
किसानों की मानें तो टमाटर की फसल से खेत की उर्वरा शक्ति कम नहीं होती है। इस बारे में किसान सुनील का कहना है कि करीब 40 फीसदी टमाटर पकने पर दागी या सड़ जाते हैं। इन्हें फसल की तुड़ाई करते समय खेत में ही छोड़ दिया जाता है। बारिश शुरू होने पर हैरों से फसल को खेत में कटवा दिया जाता है। इसके तुरंत बाद मक्का की फसल को तैयार किया जा सकता है। जबकि जायद की मक्का या अन्य फसल तैयार करने के बाद खेत को कुछ दिनों से लिए खाली छोड़ना पड़ता है।

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