वीवीआईपी जिले में मनरेगा हुई बेदम

Kannauj Updated Sun, 17 Jun 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। महात्मा गांधी राष्ट्रीय रोजगार गारंटी योजना वीवीआईपी जिले में बेदम पड़ी है। सूबे में सरकार बदलने के साथ जिले की नौकरशाही में भी भले ही काफी बदलाव हो चुका है लेकिन मनरेगा की दिशा और दशा नहीं बदली। आंकड़ों की चाल ही बेहद सुस्त मिलने पर कानपुर मंडल के कमिश्नर ने नाराजगी जताई है। जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे व सीडीओ एमपी सिंह को चिट्ठी भेजकर तेजी लाने की हिदायत दी है।
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कन्नौज जनपद में गांव के बेरोजगारों को साल के 365 दिनों में से 100 दिन का रोजगार देने की गारंटी देनी वाली यह योजना उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पा रही है। ताबड़तोड़ बजट मिलने के बावजूद उसे खर्च कर जनता का कल्याण करने में न जाने क्यों हाकिमों और जनप्रतिनिधियों को पसीना आ रहा है। खास बात यहा है कि मनरेगा की रफ्तार धीमी होने की पोल विकास भवन में तैयार सरकारी आंकड़ों ने ही खोली है। वित्तीय वर्ष 2012-12 के दो महीने बीत गए हैं।
ग्राम्य विकास विभाग को भेजी गई मई अंत तक की प्रगति रिपोर्ट को ही सच मान लें तो इस बार लेबर बजट 6392 लाख 58 हजार रुपये अनुमोदित किया गया। अप्रैल व मई महीने में पूरी ताकत झोंकने के बावजूद जिले भर में 204 लाख 84 हजार रुपये ही विकास कार्यों पर खर्च किए जा सके। आठ ब्लाकों में सबसे फिसड्डी जलालाबाद ब्लाक रहा जहां लक्ष्य व उपलब्ध बजट के सापेेक्ष 3 फीसदी ही विकास कार्य हुए। वहीं टाप पर रहने वाला कन्नौज ब्लाक 28 फीसदी धनराशि ही व्यय कर सका। विभिन्न सरकारी महकमे तो मात्र 11 फीसदी बजट ही विकास कार्यों पर खर्च कर पाए।
जिले की सबसे बड़ी पंचायत कही जाने वाली जिला पंचायत भी मनरेगा को हल्के में ले रही है। वित्तीय वर्ष 2012-13 में जिला पंचायत का लेबर बजट 163.99 लाख रुपया अनुमोदित किया गया। अप्रैल व मई बीत चुके हैं, लेकिन जिला पंचायत एक रुपये का भी काम नहीं करा सकी है। जिला पंचायत सदस्य भी सदन की बैठक के दौरान विकास कार्यों की मांग करते हैं, लेकिन मनरेगा से काम न होने के मुद्दे पर वे मौन हैं। क्षेत्र पंचायत प्रशासन भी जिला पंचायत के ही नक्शेकदम पर चल रहा है। क्षेत्र पंचायत को 12 महीने में 696.97 लाख रुपये खर्च किए जाने हैं, लेकिन अब तक मात्र 9 हजार रुपया ही व्यय हो सका है।
सीडीओ एमपी सिंह की मानें तो मनरेगा में तेजी लाने के लिए पुरजोर प्रयास किए जा रहे हैं। बीडीओ, सचिवों, प्रधानों, एपीओ, तकनीकी सहायकों, रोजगार सेवकों को निरंतर बैठक में निर्देश जारी किए जाते हैं। अब जो सुस्ती बरतेगा उसके खिलाफ कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।
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