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अहंकार से होता है जीव का पतन

Kannauj Updated Thu, 14 Jun 2012 12:00 PM IST
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छिबरामऊ (कन्नौज)। बनवारीनगर में सिद्धस्थान बनवारी बाबा के स्थान पर चल रही श्रीमद् भागवत कथा में मथुरा से आए परम पूज्य संत वितरागानंद जी महाराज के शिष्य पं.राजेश अग्निहोत्री जी महाराज ने कहा कि अहंकार से जीव का पतन होता है।
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गजेंद्र मोक्ष की कथा सुनाते हुए आचार्य राजेश ने कहा कि गजेंद्र को अपने बल का अभिमान था। उसने पूर्व जन्म में ब्राह्मण का अपमान किया था इसीलिए उसके अभिमान (अहंकार) को मिटाने के लिए प्रभू ने गज और ग्राह की लीला कराई। अहंकार से जीव का पतन होता है जब तक जीव के अंदर अहंकार होता है तब तक वह भगवान से बहुत दूर रहता है। हमें ब्राह्मण और संतों का कभी निरादर तथा तिरस्कार नहीं करना चाहिए। जब तक हम सांसारिक प्राणियों की सहायता की इच्छा रखते हैं तब तक कष्ट सहना पड़ता है। गजेंद्र को जब तक अपने तथा अपने परिवार वालों की ताकत का भरोसा रहा प्रभु नहीं आए और जैसे ही उसने प्रभु को याद किया भगवान उसकी सहायता को नंगे पैर दौड़े चले आए। भागवत कथा के अंत में नंद उत्सव मनाया गया। कथा स्थल को झंडी, वंदनवार, गुब्बारे तथा केले के पत्तों से सजाया गया। पं.राजकिशोर राजू ने विधि विधान से पूजन एवं स्वस्तिवाचन कराया। मथुरा के संगीतज्ञ जगदीश शर्मा, हरिओम शर्मा व कृष्ण बल्लभ शर्मा ने बधाईयां गाकर श्रोताओं को नृत्य के लिए विवश कर दिया। सभी भक्त झूम उठे पूरा पांडाल जयकारों से गूंज उठा। इस दौरान कृष्ण के स्वरूप में वर्षा दीक्षित व रूक्मणी के स्वरूप में शिवानी पांडेय ने सभी का मन मोह लिया। जयपुर के विनोद कुमार अग्निहोत्री ने बधाई एवं पिंटू अवस्थी, संजू अग्निहोत्री, लालू दुबे, रामू जी पाठक रमा तिवारी, मनोज शुक्ला, मगनबिहारी तिवारी, रमा, सीमा, रानी देवी ने भागवत जी की आरती उतारी।
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