जसोदा लिफ्ट कैनाल का 11 लाख से होगा कायाकल्प

Kannauj Updated Mon, 11 Jun 2012 12:00 PM IST
ख़बर सुनें
कन्नौज। काली नदी के पानी से दो दर्जन गांवों के खेतों की प्यास जल्द बुझने लगेगी। जसोदा में बनी लिफ्ट कैनाल की टूटी पटरियां पक्की होंगी। कई स्थानों पर जर्जर पटरी की मरम्मत भी की जाएगी। मनरेगा के तहत पहली किश्त के तौर पर 11 लाख रुपये का बजट रिलीज कर दिया गया है। तीन दिन के अंदर काम शुरू करा दिया जाएगा। इससे तेरारागी, वैसावारी, जसौरा, कूलापुर, सतवारी, श्याम नगला, तेरारागी सरैंया, पाहला, फतेहपुर जसोदा के किसानों को पानी लगातार मिल सकेगा।
1972 में जसोदा लिफ्ट कैनाल बनाई गई थी। तब करीब सात किमी हिस्से में फैले गांवों के किसानों को खेतों की सिंचाई के लिए पानी मिलता था। मगर बीते एक दशक से लिफ्ट कैनाल दुर्दशाग्रस्त है। नहर की पटरियां दर्जनों स्थानों पर जर्जर हैं। खांदी कट जाने के कारण कई जगह तो पटरी गायब सी हो गई है। इस कारण आगे पानी बढ़ ही नहीं पाता है। किसानों की दिक्कतों को अमर उजाला ने प्रमुखता से छापा। समस्या लखनऊ तक पहुंची तो आनन-फानन में सुधार की कवायद हुई।
लिफ्ट कैनाल के संचालन के लिए तैनात नलकूप खंड के जेई जगदीश कनौजिया ने बताया कि मनरेगा के तहत लिफ्ट कैनाल का कायाकल्प करने की कवायद शुरू हो गई है। 7 लाख रुपये से नहर की पटरी की मरम्मत कर मजबूती प्रदान की जाएगी। नहर पटरी की खांदी जहां बार-बार कटती है वहां पर ईंटों से पक्की पटरी का निर्माण होगा। पुलिया नंबर दो के पास पक्की पटरी बनेगी। कुल 4 लाख रुपये पक्की पटरी बनाने पर खर्च होंगे। सीडीओ एमपी सिंह ने बताया कि विभाग ने जितना बजट मांगा, उतना दे दिया गया है। अब फटाफट गुणवत्तापरक काम पूरा कराने के निर्देश दिए गए हैं।

Recommended

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

Spotlight

Most Read

Nainital

रामलीला को लेकर विवाद न उत्पन्न करे लोग

रामलीला को लेकर विवाद न उत्पन्न करे लोग

20 अगस्त 2018

Related Videos

स्कूल होने के बावजूद यहां खेतों में पढ़ाई कर रहे हैं बच्चे, जानिए वजह

सरकार बच्चों को स्कूल तक लाने के लिए जहां कई उपक्रम अपना रही है, वहीं यूपी के इटावा में बच्चे खेतों में पढ़ने को मजबूर है। जानिए आखिर क्यों खेतों में पढ़ रहे बच्चे।

12 जुलाई 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree