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4674 हैंडपंपों में 494 पड़े खराब

Kannauj Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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तिर्वा (कन्नौज)। उमर्दा विकास खंड पेयजल विकराल समस्या से गुजर रहा है। विभिन्न गांवों में पेयजल आपूर्ति के लिए लगाए गए 4674 हैंडपंप में 494 शोपीस बन गए हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में लगे कुछ हैंडपंपों के अराजकतत्वों ने कलपुर्जे तक गायब कर दिए हैं। वाटर रिचार्जिंग व जानवरों के पानी के लिए खोदे गए 209 तालाबों में 50 में धूल भरी हैं। उधर मनकापुर गांव में 5 तालाबों पर तो ग्रामीण अवैध कब्जे कर चुके हैं।
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उमर्दा विकास खंड क्षेत्र की 78 ग्राम पंचायतों में ग्रामीणों को पेयजल आपूर्ति करने के लिए शासन ने बीते वर्षो में विभिन्न मदों से 4419 हैंडपंप लगाए थे। वर्ष 2011-12 में भी 175 हैंडपंप लगवाए गए। इनके रख-रखाव की जिम्मेदारी ग्राम प्रधानों को सौंपी गई। आज हालत यह है कि विभिन्न पंचायतों में 174 हैंडपंप पिछले कई माह से रिबोर होने के लिए पड़े हैं। 320 हैंडपंप छोटी-मोटी कमियों के चलते खराब हो चुके हैं। ग्राम पंचायतों में कुछ ऐसी ही हालत तालाबों की भी है। विकास खंड क्षेत्र में कुल 209 तालाब खोदे गए थे। जिनमें 79 तालाब मनरेगा योजना के तहत खुदे थे। इनमें 149 तालाबों में तमाम वायदों के बाद भी पानी नहीं भरवाया जा सका। पैथाना ग्राम पंचायत में 11 तालाब खोदे गए थे, इनमें 5 तालाब सूखे पड़े हैं। बेहटा ग्राम सभा के 6 तालाबों में से 4 सूखे पड़े हैं। भखरौली के 9 में 7, चंदौली के 9 में 8, भुन्ना 19 में 13, चंदियापुर के 6 में 5, हरेईपुर के 11 में 9, सरसई के 15 में 10 तालाब सूखे हैं। इसी तरह सिमरिया ग्राम सभा के 13 में 11, हमीरपुर के 13 में 5, औसेर के 7 में 6 तालाब, त्रिमुखा के 9 में 8, वैसार के 8 में 3, गूरा के 3 में 2, खानपुर के 13 में 12, मझिला के 11 में 5, अगौस के 12 में 3, बेलामऊ सरैया के 7 में 6, नान्हेंपुर के 6 में 2, फतेहपुर कपूरापुर के 6 में 3, किनौरा के 11 में 9, सखौली के 2 में 1, पट्टी पवोरा के 2 में 1, तिर्वा देहात के 3 में 1 तालाब सूखे हैं। खराब पड़े हैंडपंपों व सूखे तालाबों को लेकर खंड विकास अधिकारी रवींद्रनाथ सिंह का कहना है कि हैंडपंपों को रिबोर कराने के लिए जल निगम को कई बार सूची भेजी जा चुकी है, पर बजट उपलब्ध न होने के कारण अभी तक काम शुरू नहीं हो पाया। सूखे पड़े तालाबों को लेकर उनका तर्क था कि इसके लिए ग्राम पंचायत अधिकारियों व ग्राम प्रधानों को निर्देश दिए गए थे। अब वह खुद जांच करा रहे हैं कि इन तालाबों में पानी क्यों नहीं भरवाया गया।

मनरेगा योजना से वर्ष 2011-12 के वित्तीय वर्ष में डयोढ़ा में सूरजपुर गांव में सिमरिया, दिसरापुर, निस्तौली, हरेईपुर, मलिहापुर गांव में करीब 12 लाख की लागत से तालाब खोदे गए थे। ग्राम प्रधानों व अधिकारियों की लापरवाही के चलते यह तालाब ऐसी जगह बना दिए गए, जहां से तालाबों में पानी भरने का कोई साधन उपलब्ध नहीं है। निकट न तो कोई बोरिंग है, और न माइनर। इन तालाबों को सिर्फ बारिश के पानी का ही आसरा है। इस मसले पर बीडीओ का कहना है कि यह पूर्व के अधिकारियों द्वारा किया गया है। उन्होंने इसकी जांच कराने का निर्देश दे दिया है।

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