सीएचसी-पीएचसी का हाल जानने पहुंचेंगे सपाई

Kannauj Updated Mon, 28 May 2012 12:00 PM IST
कन्नौज। दूरस्थ क्षेत्रों में स्थित सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में सपाई छापे मारेंगे। कभी वे मरीज बनकर लाइन में लगेंगे तो कभी तीमारदार की तरह वहां मौजूद लोगों के साथ पहुंचेंगे। ताकि अस्पताल की हकीकत व डाक्टरों के रवैए का पता चल सके।
सपाइयों ने ग्रामीण अंचल की स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने का मन बनाया है। सपा सदर विधानसभा क्षेत्र अध्यक्ष विनय पांडेय, सपा नेता बबलू मिश्रा कहते हैं कि सामुदायिक और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर डाक्टरों व कर्मचारियों के गायब रहने की शिकायतें मिल रही हैं। देर से खुलने वाले अस्पताल समय से पहले बंद हो जाते हैं, जिससे मरीज व उनके घरवाले परेशान होते हैं। पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ वह स्वास्थ्य सुविधाओं का जायजा लेंगे। आम आदमी की तरह पीएचसी व सीएचसी पर पहुंचकर वहां की दशा पता की जाएगी।
अल्पसंख्यक प्रकोष्ठ के महासचिव हसीब हसन, सपा नेता नाजिम खान, छात्रसभा पदाधिकारी पिंटू यादव कहते हैं कि सरकारी पगार लेकर भी निजी प्रैक्टिस करने वाले डाक्टरों के खिलाफ भी अभियान चलाएंगे। जो डाक्टर, फार्मासिस्ट, एएनएम या अन्य स्वास्थ्य कर्मी ड्यूटी के वक्त गायब रहते हैं उनकी सूची बनाकर मुख्यमंत्री को सौंपी जाएगी।
शहर में खुलेआम निजी प्रैक्टिस की जाती है। ले-देकर विभागीय अफसरों की कृपादृष्टि मिलने के बाद कोई पत्नी तो कोई रिश्तेदारों के नाम पर अस्पताल खोले है। कभी रात के अंधेरे में तो कभी दिन के उजाले में सरकारी डाक्टर निजी नर्सिंग होम में इलाज करते नजर आते हैं। प्राइवेट अस्पतालों को चलाने के लिए जानबूझकर सरकारी चिकित्सीय व्यवस्था चौपट की जाती है।
ॎ खैर नगर, मढ़पुरा, हसेरन, इंदरगढ़, जनखत, गुगरापुर, सकरावा, नादेमऊ, सौरिख, जलालाबाद क्षेत्र में बने सरकारी अस्पताल खुद बीमार हैं। यहां न तो पर्याप्त डाक्टर हैं और न ही चिकित्सीय सुविधाएं। ऐसे में मरीजों की जान अक्सर खतरे में पड़ जाती है। ग्रामीणों की मानें तो एक सप्ताह तक लगातार छानबीन की जाए तो सारी हकीकत खुद सामने आ जाएगी।
लोगों की मानें तो स्वास्थ्य सुविधाएं बदतर होने के लिए चिकित्सा विभाग के बड़े अधिकारी ही जिम्मेदार हैं। उनकी कथनी करनी में अंतर है। अधिवक्ता अशोक सिंह कहते हैं कि कमाई के चक्कर में चिकित्सीय स्टाफ को मनमानी करने की छूट दे दी गई है। प्राइवेट अस्पतालों से सेटिंग होने के कारण जानबूझकर सरकारी स्वास्थ्य सेवाएं फेल की जाती हैं। ताकि मजबूर होकर लोग निजी नर्सिंग होम व क्लीनिकों में जाएं।
जिलाधिकारी सेल्वा कुमारी जे की मानें तो सुधार के लिए सख्ती होगी। स्वास्थ्य सुविधाओं पर फोकस है। शहर से लेकर गांव तक के अस्पतालों को समय से खुलवाने, मरीजों को सरकारी सुविधाओं का लाभ दिलाकर बेहतर इलाज कराने का प्रयास जारी है।
कांग्रेस शहर अध्यक्ष अनुज मिश्र कक्का की मानें तो शासन-प्रशासन केवल कागजी घोड़े दौड़ा रहा है। सुधार के नाम पर कार्रवाई का दिखावा और खानापूरी से मरीजों को कोई राहत मिलने वाली नहीं। सत्ता पक्ष के नेता व अधिकारी संरक्षण देना बंद करें। तभी डाक्टर व चिकित्सीय स्टाफ कामचोरी बंद करेगा।

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