उग्र किसानों ने टीम को बगैर सर्वे किए खदेड़ दिया।

Kannauj Updated Mon, 21 May 2012 12:00 PM IST
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कन्नौज। चिह्नित जमीन पर निर्माण कार्य के सर्वे को आवास एवं विकास परिषद की टीम रविवार को कलेक्ट्रेट के पीछे तिर्वा-कन्नौज मार्ग पर पहुंची थी। इसकी भनक लगते ही बड़ी संख्या में किसान वहां पहुंच कर हंगामा करने लगे। उग्र किसानों ने टीम को बगैर सर्वे किए खदेड़ दिया। किसानों ने इस मामले से विधायक अनिल दोहरे को भी अवगत कराया है।
आवास एवं विकास परिषद को यहां आवासीय कालोनी के लिए 500 एकड़ जमीन की तलाश एक दशक से है। तमाम प्रयासों के बावजूद जमीन का मसला अब तक हल नहीं हुआ। पहले सरायमीरा देविनटोला के पीछे जमीन देखी गई थी जो किसानों के विरोध के चलते निरस्त कर दी गई। इसके बाद कलेक्ट्रेट के निकट 200 एकड़ जमीन देखी गई। इसके अधिग्रहण को तीन साल से कागजी कार्रवाई चल रही है। दो साल से मामला ठंडे बस्ते में है। रविवार को विभागीय अभियंता पीके गुप्ता, हरिओम शर्मा समेत अन्य कर्मचारियों की टीम कलेक्ट्रेट के पीछे तिर्वा-कन्नौज मार्ग पर पहुंची। पूर्व में चिह्नित अकबरपुर सरायघाघ, सरायमीरा देहात, फतुंआपुर और मानपुर की जमीन पर निर्माण कार्यों का सर्वे शुरू किया। इसकी भनक जैसे ही किसानों को लगी। नापजोख के दौरान किसान आलोक शुक्ला, राकेश कटियार, उमेश कटियार, डा. इरशाद, मुस्तकीम और इकबाल आदि वहां पहुंच गए। किसानों ने टीम के सदस्यों को खरीखोटी सुनाई। किसान अफसरों की कोई भी बात सुनने के लिए तैयार नहीं थे। माहौल गरमाता देख टीम लौट गई। किसान आलोक शुक्ला ने बताया कि विधायक अनिल दोहरे ने आश्वासन दिया है कि किसानों की उपजाऊ जमीन नहीं ली जाएगी। कहा सोमवार को मुख्यमंत्री को पत्र भेजेंगे।
आवास एवं विकास परिषद के अभियंता पीके गुप्ता ने बताया कि परिषद ने जमीन चिह्नित की है। आपत्तियों की सुनवाई 28 मई को कलेक्ट्रेट में होगी। इस दौरान उप जिलाधिकारी सदर के अलावा प्रशासनिक अधिकारी व परिषद के अधिकारी मौजूद रहेंगे। जमीन को लेकर जिन किसानों ने आपत्तियां दाखिल की हैं उनका निराकरण किया जाएगा। सहमति के आधार पर जमीन अधिग्रहीत की जाएंगी।
आवास एवं विकास परिषद की तरफ से प्रस्तावित कालोनी में करीब 8 हजार आवास बनाने की योजना है। इसमें कुछ मकान बने बनाए आवंटित किए जाएंगे, जबकि कुछ भूखंड होंगे। परिषद ऐसी जमीन चाहता है तो रोडवेज बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन, शैक्षणिक संस्थानों के निकट हाइवे किनारे हो। ताकि बेहतर सुविधाएं मिल सकें।
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